कहीं फिर मेरे भाई पर मुसीबत तो नहीं आएगी?

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आज जब सुबह ऑफिस आया तो सभी समाचार पत्रों को सरसरी निगाह से देखने की आदत के अनुसार ''आज समाज'' में फोटो के साथ छपी एक खबर पर नज़र पड़ी. खबर मेरे लिए चौंकाने वाली थी और डराने वाली भी. कारण यह था कि उसमें एक ऐसे व्यक्ति की गिरफ्तारी की खबर छपी थी जिसकी वजह से हमारे पूरे परिवार की इज्जत मर्यादा सबकुछ धूल में मिल गई थी.

मेरा नाम सुनकर याद होगा कि एक दिन मेरे नाम से bhadas4media में ''एक पत्रकार साथी को मदद की दरकार'' शीर्षक से खबर छपी थी जिसमें यशवंत जी द्वारा मेरी मदद के लिए अपील की गई थी.  फिलहाल उसमें जो मदद बन सकी, सभी लोगों ने की. 16 महीने की लम्बी लड़ाई के बाद भाई भी छूट गया. उसे छूटे अभी २०-२२ दिन हुए हैं. फिलहाल वो गाव में है. वाकया यह है कि यह व्यक्ति (जिसके बारे में अखबार में खबर छपी है) जो बहुत ही शातिर है और लोगो को बेवकूफ बनाकर चपत लगाने में माहिर है, इसके निशाने पर कब कौन होता है, कुछ भी पता नहीं. पहले भी जेल जा चुका है. इसके ऊपर कई मामले धोखाधड़ी के हैं.

मेरे भाई वाले मामले में तो मिलीभगत करके फरार भी हो चुका है यह. इसकी वजह से और अनजाने लोगों पर मुसीबत आ रही थी. समाचार पत्रों से मिली ख़बरों के अनुसार यह कल यह श्रीराम कालेज के पास धोखाधड़ी के लिए गया हुआ था जहाँ जाल बिछाकर दिल्ली पुलिस ने इसे धर दबोचा. भोलेभाले लोगों को बेवकूफ बनाकर लूटने का इसका पुराना धंधा रहा है. लोगों से दोस्ती करके उन्हें चपत लगाने की जैसे इसे मास्टर डिग्री हासिल हो. शक्ल-ओ-सूरत से कोई कह नहीं सकता कि यह शख्स इतना शातिर होगा.

आज मेरे भाई की तारीख है. देखते हैं यहाँ क्या होता है. कहीं एक बार फिर से तो मेरा भाई इसके चक्कर में नहीं फसेगा, या फिर पुलिस के नुमाइंदे अपनी सूझ-बूझ का परिचय देते हैं. भाई गाव में है. आज माफ़ीनामा लगाने पर विचार चल रहा है. वैसे कल गिरफ्तार होने पर इस संजय नाम के शख्स के पास से २२.५ लाख की धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है. इसके नाम से २.१२ लाख रुपये नकद, ४ पैन कार्ड, १० डेबिट कार्ड, ५ जाली हस्ताक्षरित चेक मिले हैं. कई चेकबुक, बिजली बिल, प्रिंटिंग सामग्री जैसी चीजें साथ ही एक मोटर-साइकिल भी बरामद हुई है. और भी ख़बरें हैं उसे लेकर, शायद आज शाम तक कुछ और पता चले. मैं कमेन्ट के माध्यम से सूचित करता रहूँगा.

श्रवण कुमार शुक्ला
पत्रकार
नोएडा


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