''भवानी जी, हमारे पैसे तो दे दीजिए''

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आदरणीय भाई साहब, जयपुर से एक दैनिक "परिवर्तन भूमि" नाम का पत्र निकलता था. 12 पृष्ठ का रंगीन. काफी अच्छा कलेवर था. पता नहीं क्यों अप्रैल में बंद हो गया और उनके फोन भी बंद हो गए. भवानी शंकर शर्मा उसके मालिक थे, हम लोगों ने उनके साथ काम किया था. हो सके तो हमारा वेतन दिलवा दीजिये प्‍लीज.  आपको तो पता ही है पत्रकारों के परिवारों की स्थिति. इसी प्रकार कुछ शहरों से उन्होंने पत्रकारों से एजेंसी के बाबत पैसे भी लिए. दो-एक महीने चलने के बाद समाचार पत्र बंद हो गया. अब क्या करें?

भवानी जी को फोन लगाते हैं तो बंद मिलता है. प्‍लीज कुछ करें. आदरणीय भवानी जी आप तो ऐसे न थे? प्‍लीज आप भी हमारे बच्चों की ओर देखें.

उत्तम

जयपुर


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