'' पीपुल्‍स समाचार की नीयत मेरे पैसे लौटाने की नहीं है''

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एक अच्‍छा पत्रकार बनने की सोच  लेकर मैं पीपुल्‍स समाचार से जुड़ा. करीब डेढ़ वर्ष से अधिक समय तक एजेंसी संचालक एवं संवाददाता के कार्यकाल में मेरे द्वारा समय समय पर विज्ञापन दिए गए एवं सर्कुलेशन की राशि नियत समय पर जमा कराई गई. पीपुल्‍स से जुड़ना मेरे लिए गर्व की बात थी, क्‍योंकि मुझे जानकारी लगी थी कि पीपुल्‍स ग्रुप भोपाल में कई कॉलेज और विद्यालय संचालित करता है.

इससे मेरे मन में पीपुल्‍स ग्रुप के प्रति जबर्दस्‍त लगाव हुआ एवं प्रभावित होकर मैंने पीपुल्‍स समाचार पत्र की एजेंसी ले ली, इसके लिए मैंने 15000 रुपये भी जमा किए. किंतु अचानक बिना बताए 15 अप्रैल 2011 से समाचार पत्र की प्रतियां आनी बंद हो गईं. इसके बारे में पीपुल्‍स कार्यालय, इंदौर से जानकारी ली तो पता चला कि ब्‍यूरोचीफ की समस्‍या के कारण प्रतियां प्रकाशित होनी बंद हुई हैं. कुछ दिनों में ब्‍यूरोचीफ की व्‍यवस्‍था होने पर समाचार पत्र वापस जाना प्रारम्‍भ हो जाएगा. एक माह से अधिक समय तक इंतजार करने के बाद भी समाचार पत्र की प्रतियां प्राप्‍त नहीं हुईं.

मैंने पीपुल्‍स, इंदौर कार्यालय में जितेंद्र राज से सम्‍पर्क किया, जिन्‍होंने मुझे बताया कि आपने जो 15000 की राशि डिपाजिट की थी, उसे निकलवाने के लिए आवेदन दें और रसीद की मूल प्रति संलग्‍न करें, आपकी जमानत राशि 15000 जल्‍द से जल्‍द चेक के माध्‍यम से आपके पास पहुंच जाएगी. किन्‍तु साढ़े तीन माह से अधिक समय गुजर जाने के बावजूद भी पीपुल्‍स समाचार की तरफ से मेरी जमा राशि लौटाई नहीं गई है. सम्‍पर्क करने पर विभाग के अधिकारियों द्वारा अतिशीघ्र भोपाल कार्यालय से राशि अथवा चेक प्राप्‍त होने की बात कही जाती है किन्‍तु मेरी रिफंडेबल राशि नहीं दी जा रही है. जिससे लगता है कि इनकी नीयत साफ नहीं है.

ललित राजावत

पीपुल्‍स संवाददाता

बड़ौद, शाजापुर

मोबाइल -  9406876825


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