ईश्वर अरविन्द को दीर्घायु और बुराइयों पर विजय का आत्मसम्बल दें!

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बीते एक महीने से वाराणसी के तेजतर्रार और ईमानदार क्राईम रिपोर्टर अरविन्द उपाध्याय पर एक जालसाज महिला को मोहरा बनाकर यहाँ के दलालों ने जो खेल खेला उससे आप सब वाकिफ है. खैर कहा भी जाता है, सत्य थोड़ी देर के विचलित हो सकता है परन्तु पराजित नहीं.  इस बीच एडीएम (प्रशासन) वाराणसी द्वारा डीएम (वाराणसी)  को भेजी गयी रिपोर्ट भी आ गयी है.

इस में एडीएम ने सारे तथ्यों को परखने के बाद यह पाया कि जो वास्तविक भू-स्वामिनी एवं स्वामी (उसका पुत्र) है उन्होंने यह स्वीकार किया है कि जैसे ही अरविन्द और उनके मित्रों को यह जानकारी हुयी कि जमीन की रजिस्ट्री में धोखा हुआ है, उन्होंने तुरंत संपर्क करके कहा कि हम आपको आपकी जमीन के मालिकाना हक़ देने के लिए तैयार है, हमारे साथ दलालों ने धोखा करके हमें  मूर्ख बना दिया.  इसके बाद दोनों पक्षों (अरविन्द और वास्तविक भू-स्वामी ) ने आपसी सहयोग करते हुए सिविल कोर्ट में ०१-०२-२०११ को बैनामे को मन्सूख कराने के लिए सहमति भी दे दी.

इसके पूर्व अरविन्द थाना कैंट वाराणसी में २६-०८-२०१० को उस फर्जी महिला रमदेई उर्फ़ श्यामा देवी उर्फ़ श्यामदेई के विरुद्ध फर्जीवाड़े का मुकदमा दर्ज करा चुके थे,  लेकिन वाह रे वाराणसी पुलिस एक साल पहले के मुक़दमे का हाल जस का तस है, लेकिन वह फर्जी रमदेई (जो विधवा पेंशन गलत तरीके से लेने की स्वयं आरोपी है) एक शातिर जालसाज और हत्यारोपी से मिल बैठी, और ७-६-२०११ को अरविन्द के खिलाफ कैंट थाना में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराई, और पुलिस के ऊपर न जाने किस मोहिनी का प्रयोग की, कि पुलिस ने कोर्ट से अरविन्द के खिलाफ एनबीडब्लू जारी करा लिया.

बहरहाल एडीएम वाराणसी की यह रिपोर्ट स्वयं एक प्रमाण है कि ईमानदारी से पत्रकारिता करने वाला किस तरीके से भ्रष्ट पुलिस, माफियाओं और दलालों की सुनियोजित चाल में फंस गया. समूचे घटनाक्रम में अमर उजाला वाराणसी के सम्पादक साधुवाद के पात्र हैं, जिन्होंने अपने रिपोर्टर की निष्ठा और ईमानदारी पर पूरा विश्वास दिखाया और कोई प्रतिकूल प्रविष्टि अरविन्द को नहीं दी. खैर ईमानदार ही ईमानदारी की क़द्र जानता है.  लेकिन समूचे मीडिया जगत के लिए यह एक विचारणीय प्रश्न है कि क्या पत्रकार इतने कमजोर हो गए हैं कि कोई भी ऐरा-गैरा उन्हें और उनके परिवार को संकट में डाल सकता है?

अरविन्द की कलम की धार हमेशा माफियाओं और दलालों के खिलाफ सख्ती से चली है और चलती रहेगी. अरविन्द को अपने ही बिरादरी वालों से सहयोग चाहिए था, तब जागरण ने क्या-क्या नहीं किया, सब जानते है, लेकिन जो यह कर रहे है वो यह नहीं जानते कि ईमानदारी क्या चीज होती है? ईश्वर अरविन्द को दीर्घायु और बुराइयों पर विजय का आत्मसम्बल दें.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गये पत्र पर आधारित.

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