कुछ बदले नजर आ रहे हैं न्यूज चैनलों के सुर...

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संपादक, भड़ास4मीडिया, महोदय, मीडिया का मुंह सरकारी विज्ञापनों से भर कर मीडिया को सच दिखाने से रोकने की कोशिश और जनता को बरगलाने की कोशिश हो रही है. आज मैंने कई चैनलों पर कई सरकारी और पब्लिक सेक्टर कंपनी के विज्ञापन देखे. ये विज्ञापन पहले नहीं देखे थे इन चैनलों पर. कई चैनलों ने (एक वह भी चैनल है जिनके लोग सरकार से अवार्ड लेते रहे हैं और जिनकी पत्रकार राडिया से सेटिंग किया करती थी.

एक वह चैनल भी सुर बदले हुए था जो सबसे तेज होने का दावा बरसों से करता आ रहा है और जिसके एडिटर भी राडिया से सेटिंग करते फोन टैप में पाए गए थे) सुर बदल लिए हैं. क्या यह मीडिया का बिकना नहीं है? अब खबरों में कनफ्यूजन तैयार किया जा रहा है. तीसरे पक्ष को लेकर आ रहे हैं चैनल, बता रहे हैं कि यह तो संसद का अपमान है.  क्या वेब पत्रकारिता इन बिके हुए मीडिया के खिलाफ सच को सामने ला पायेगा? क्या आप जैसे लोग जनता की आवाज की हत्या होने देंगे. उम्मीद है आप जैसे लोग वेब मीडिया के द्वारा इस बेइमानी को उजागर करते रहेंगे.

आपका अपना
इशु मिश्रा
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