क्या वाकई महुआ प्रबंधन अपने स्ट्रिंगरों के साथ बंधुआ मजदूर सरीखा व्यवहार करता है?

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नमस्कार, मुझे कुछ कहना है. हम लोग बिहार से महुआ न्यूज़ के लिए काम करते है. हम लोगों का वेतन पिछले छह माह से बंद है. जब कभी भी अपने एकाउंट हेड मनोज से वेतन की बात करते हैं तो यह कह कर टाल देता है कि एक सप्ताह में पहुँच जायेगा. जब 15 दिनों के बाद पूछता हूँ तो कहता है कि अगले सप्ताह में मिल जायेगा या तो फिर कहता है कि महुआ के मालिक पी.के. तिवारी की बहू चेक पर साइन करेगी तो चेक दो-चार दिन में आपके हाथ में रहेगा.

इस तरह से कभी छह माह या आठ माह कर देता है. जब चेक आता है तो पता चलता है कि यदि मैं रोड पर पान बेचूंगा तो इससे चार गुना ज्यादा कमा लूँगा. और तो और, उपर से प्रतिदिन डे प्लान भेजो और कम से कम दस स्क्राल के लिए टिकर भेजो. ये सब जरूरी है. पता चलता है कि एक तो समय पर वेतन नहीं मिलता है और चार हज़ार रुपये में दुनिया भर का टेंशन ले रहा हूँ. और, इसी टेंसन में किसी अपराधी के खिलाफ खबर डालता हूँ तो फिर अपराधियों द्वारा मेरी मौत तय है. हम लोग काफी मानसिक टेंशन में हैं.

हम लोग कंपनी के बंधुआ मजदूर बन गए हैं. उनका कहना होता है कि महुआ नंबर वन है, इसलिए ईटीवी से पहले न्यूज़ आनी चाहिए नहीं तो हटा दूंगा. हमारा तो प्रयास है किसी तरह हम लोगों का पैसा कंपनी से निकल जाये. फिर कोई नौकरी या नया काम तलाशेंगे. महुआ न्यूज के बिहार के सारे स्ट्रिंगर यही प्लान बना रहे हैं कि यदि पैसा नहीं मिला तो एक बार पूरे बिहार का स्ट्रिंगर हड़ताल कर देगा. आप वक्त आ गया है कि लोगों को इस बात की जानकारी मिलनी चाहिए कि नंबर एक चैनल किसे कहते है? कृपया मेरा नाम मत छापियेगा.

आपका
एक्स वाई जेड


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