तीन सूचनाएं- दो अखबारों के रिपोर्टरों को वेतन नहीं, एक पत्रकार ने भड़ास को थैंक्स कहा

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: अपडेट : तीन सूचनाएं मेल के जरिए आई हैं. एक मेल में कहा गया है कि जनसंदेश टाइम्स के पत्रकार इन दिनों वेतन ना मिलने से काफी तंगहाली के दौर से गुजरते हुए पत्रकारिता कर रहे हैं. उन्नाव, रायबरेली, कानपुर के रिपोर्टरों को करीब तीन महीने से पैसा नहीं मिला है. इस कारण कई रिपोर्टर अब दूसरे बैनर की तलाश में जुट गए हैं.

सूचना भेजने वाले ने अपना नाम गोपनीय रखने का अनुरोध किया है. पर जनसंदेश टाइम्स, कानपुर के प्रबंधन का कहना है कि प्रत्येक महीने की सात तारीख को तनख्वाह सभी को मिल जाती है. इस बारे में किसी से भी पूछा जाना जा सकता है. कुछ लोग जानबूझकर जनसंदेश टाइम्स की छवि खराब करने के लिए उलजुलूल मेल भेज रहे हैं. भविष्य में भड़ास4मीडिया को भी ऐसी खबरों को क्रासचेक करने के बाद ही प्रकाशित करना चाहिए.

एक अन्य मेल लखनऊ से आया है. इसमें कहा गया है कि अभी हाल में ही लखनऊ से लांच हुए लोकमत अखबार के कर्मियों को तीन महीने से सेलरी नहीं मिली है. लोगों को आशंका है कि कहीं लोकमत प्रबंधन लखनऊ से अपने अखबार को गुपचुप तरीके से बंद तो नहीं कर देगा. अगर ऐसा हुआ तो करीब सौ से ज्यादा पत्रकारों के लाखों से ज्यादा रुपये डूब जाएंगे. इस बारे में लोकमत, लखनऊ से जुड़े कुछ लोगों का कहना है कि हर महीने कुछ लोगों को तनख्वाह मिल जाती है और कुछ अन्य लोगों को अगले महीने तनख्वाह दी जाती है. प्रबंधन की कोशिश सभी को तनख्वाह देने की है.

तीसरी सूचना राजस्थान से है. यहां के एक न्यूज चैनल एचबीसी में काम कर चुके एक पत्रकार दुर्गसिंह राजपुरोहित ने जानकारी दी है कि उन्हें तनख्वाह न दिए जाने की सूचना भड़ास पर प्रकाशित होने के बाद प्रबंधन ने मजबूर उन्हें तनख्वाह दे दी है और इसका सारा श्रेय भड़ास को जाता है. राजपुरोहित ने लिखा है- ''शुक्रिया भड़ास4मीडिया''

अगर उपरोक्त सूचनाओं में कोई करेक्शन नजर आए तो उसे प्लीज नीचे दिए गए कमेंट बाक्स के जरिए अपडेट, करेक्ट कर दीजिए.


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