''दैनिक जागरण वाले मुझे फंसाने की कोशिश में लग गए हैं''

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: पुलिस भी बड़े अखबार के दबाव में : भाई यशवंत जी, मैं ने दैनिक जागरण में काम करते हुए अपराधियों को संरक्षित करने वाले पत्रकारों की करतूत को अपने अखबार ब्रह्मखोज में प्रकाशित कर पत्रकारिता पर लगाए जा रहे धब्बे को सार्वजनिक क्या किया कि दैनिक जागरण वाले मेरे खिलाफ मुकदमे खड़े करवाने में लग गए हैं।

एक महिला ने मुझे फोन कर कहा कि आपने मेरी गल्तियों को उजागर कर मुझे सावधान किया था तो मैं सुधर गई, लेकिन मेरे यहां दैनिक जागरण, घोसी के संवाददाता अरबिंद राय ने फोन पर आप के खिलाफ गलत धाराओं में मुकदमा कायम कराने के लिए दबाव डाल रहे हैं। मैं बतौर संपादक दैनिक जागरण की इस घटिया किस्म की हरकत से परेशान और हैरान हूं। दैनिक जागरण के संपादक को पूरे मामले की जानकारी होने के बावजूद वे अभी तक अपने कर्मचारियों की इस करतूत के प्रति चुप्पी साधे हुए हैं। मुझे दैनिक जागरण के रिपोर्टर बृजेश ने जब यह कहते हुए धमकी दी थी कि मैं ने विनय जायसवाल आदि के कहने पर अपने अपराधी भाई लालबहादुर को जान से मारने के लिए तुम्हारे पीछे लगा दिया, तब इस पूरे मामले की जानकारी मैंने मुकदमा दर्ज कराने से पहले दैनिक जागरण के संपादक को मोबाइल के जरिए दी थी।

जब उन्‍होंने कार्रवाई स इनकार कर दिया तब मैं ने जिले के थाना सरायलखंसी में भारतीय दंड संहिता की धारा 504 और 507 के तहत मुकदमा पंजीकृत कराया।इस मुकदमे के बाद दैनिक जागरण के लोग अप्रत्यक्ष रूप से मुझसे समझौते की बात करते रहे। चार दिनों तक परिणाम के इंतजार के बाद अंततः दैनिक जागरण के रिपोर्टर बृजेश के माध्यम से मेरे ऊपर फर्जी और मनगढंत मुकदमे दर्ज कराये गए। दोनों मुकदमें में जांच चल रही है। इस मामले में जब मेरे द्वारा पुलिस अधीक्षक से बृजेश यादव और मेरे मोबाइल नंबर 9532333435 के डिटेल निकलवा कर उसको दोनों मामले की विवेचना का आधार बनाने के लिए आवेदन किया गया तो पुलिस अधीक्षक पूरी तरह से दैनिक जागरण के दबाब में नजर आए।

अभी तक मेरे द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमे में मामले के विवेचक ने 9450274550 की काल डिटेल को नहीं निकलवाया है। यह नंबर दैनिक जागरण के रिपोर्टर बृजेश यादव द्वारा इस्तेमाल किया जाता है। यह नंबर जिले के चकउथ सुरजपुर के किसी मारकंडे राय के नाम आबंटित है। इस नाम का कोई आदमी गांव में नहीं है। मामले के विवेचक ने मेरे द्वारा दर्ज कराई गई रिपोर्ट से संबंधित मोबाइल नंबर की काल डिटेल नहीं निकलवा रही है। क्यों कि पुलिस को इस बात की जानकारी है कि मुझे जान से मरवाने के लिए पहले धमकी पर उतरे दैनिक जागरण के लोगों के नाम सार्वजनिक हो जाएगा तथा वे एक और मुकदमे के भागी होंगे।

यहां यह बताना जरूरी है कि पुलिस अधीक्षक को राज्य सरकार से कई पुरस्कार मिल चुके हैं। उन्हें कार्यक्षेत्र में इमानदारी के कई तमगे भी मिले हैं लेकिन इस मामले में पुलिस अधीक्षक ने मेरे मुकदमे की विवेचना के दौरान ही मेरे खिलाफ फर्जी मुकदमे कायम कराए हैं। दैनिक जागरण के लोग अपराधिक कृत्यों को अंजाम दे रहे हैं फिर भी पुलिस इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रही है। मैं इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार से मांग करता हूं कि मुझ से संबंधित दोनों मामलों की जांच सीबीआई से कराई जाए। क्योंकि पुलिस इस मामले में दैनिक जागरण के दबाव में मुझे फंसाने की फिराक में है।

ब्रह्मानंद पांडेय

संपादक ब्रह्मखोज

मऊ


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