एक-दो मिनट की कवरेज दिखाने के नाम पर हजारों ऐंठ लेते हैं ये

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श्रीमानजी, राजस्थान में गंगानगर एक ऐसा जिला है, जिसमें समाचार पत्रों की संख्या बहुत ज्यादा है। ऐसे-ऐसे लोग अखबार निकालने लगे हैं, जिनको पत्रकारिता के क ख ग का भी पता नहीं है। यह पत्रकारिता के लिए दुर्भाग्य की बात है। इससे भी बड़ी दुर्भाग्य की बात यह है कि गंगानगर जिला मुख्यालय पर इलेक्ट्रानिक मीडियाकर्मी टीवी पर खबर चलाने के नाम पर वसूली करने लगे हैं।

जो मैटर बिजनेस से संबंधित है, उनकी प्रेस कांफ्रेंस में जाते हैं और कवरेज करते हैं। एक-दो मिनट की कवरेज दिखाने के नाम पर हजारों रुपए ऐंठ लेते हैं। वैसे मीडिया को भी आर्थिक मदद की जरूरत होती है, लेकिन गंगानगर जिला मुख्यालय के रिपोर्टर आर्थिक मदद के रूप में अवैध वसूली कर रहे हैं। पिछले दिनों गंगानगर में जयपुर से आए बिल्डरों ने एक संवाददाता सम्मेलन बुलाया। इसमें समाचार पत्रों संवाददाताओं के अलावा इलेक्ट्रानिक मीडिया से जुड़े रिपोर्टर भी मौजूद थे। संवाददाता सम्मेलन समाप्त हुआ, तो आयोजकों ने एक लिफाफा सभी को थमा दिया। जब पत्रकारों ने लिफाफा खोला, तो उसें पांच-पांच सौ के नोट निकले। अधिकांश पत्रकारों ने तो लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की गरिमा का आदर करते हुए जहां आयोजकों को लताड़ पिलाई, वहीं एक इलेक्ट्रानिक मीडिया के अनुबंधित रिपोर्टर और उसके साथी (जो किसी अखबार या न्यूज चैनल में नहीं है, लेकिन अनुबंधित रिपोर्ट के साथ मिलकर अवैध वसूली में उसका सहयोग करता है) ने यह लिफाफा अपने पास ही रख लिया।

खैर, गंगानगर में इन दिनों इलेक्ट्रोनिक मीडिया के नाम पर अनेक लोग उठ खड़े हुए हैं, जो अपने आप को वरिष्ठ रिपोर्टर और पहुंचे हुए चैनल का रिपोर्टर बताते हैं। कोई ईटीवी, एनडीटीवी, टाइम टीवी, इंडिया टीवी, जी टीवी, आजतक का नाम लेकर संवाददाता सम्मेलनों में उपस्थित होकर बेतुके सवाल-जवाब कर जागरुक पत्रकारों को शर्मसार कर देते हैं। पिछले दिनों गंगानगर जिले के बींझबायला क्षेत्र में एक किसान सम्मेलन हुआ, जिसमें एक भाजपा नेता ने मीडियाकर्मियों के लिए अच्छी-खासी व्यवस्था की। व्यवस्था का मतलब उन्हें दो-दो हजार के बैग थमाए गए। इससे पहले गंगानगर में एक उद्योगपति का तो उपयोग इलेक्ट्रानिक मीडिया के लोग सीधे कमाई के जरिया के तौर पर कर रहे हैं।

सवाल यह है कि मीडिया से आम जनता को बहुत उम्मीद है। यदि मीडियाकर्मी ही इस आड़ में लोगों को मूर्ख बनाए, तो जनता किससे उम्मीद करेगी। यह चिंता का विषय तो है, लेकिन इस पर चिंतन करने की बजाय मीडियाकर्मियों को अपना व्यवहार सुधारना चाहिए। जब टीवी चैनल उन्हें उनकी इच्छा मुताबिक तनख्वाह देते हैं, तो आखिर अवैध वसूली कर अन्य मीडियाकर्मियों को बदनाम करने की क्या जरूरत।

जयप्रकाश मील

श्रीगंगानगर, राजस्थान

मो. 75978-27692


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