नवरात्रि के बाद खोलूंगा लखनऊ के भ्रष्‍ट पत्रकारों की पोल

E-mail Print PDF

: मौसेरे भाई हैं लखनऊ के चोर पत्रकार : सीबीआई जांच हो तो कई पत्रकार जेल की हवा खा सकते हैं : यूपी की मठाधीश पत्रकारिता का चेहरा अब धीरे-धीरे सबके सामने आने लगा है। क्योंकि अब उन मठाधीश पत्रकारों को भी अपने दामन में लगे काले धब्बे स्पष्‍ट रूप से सामने दिखाई देने लगे हैं, जो पिछले चार दशकों से एकछत्र कब्जा किए थे।

जब से देश की मीडिया की खबरों को बेबाक रूप से यशवंत भाई ने अपने पोर्टल भडास4मीडिया.कॉम में दिखाना शुरू किया है, तब से लेकर अब तक यूपी की राजधानी लखनऊ के उन पत्रकारों के चेहरे सामने बेनकाब होने लगे हैं, जो कई दशकों से मीडिया के नाम पर अपनी काली कमाई करके समाज के ठेकेदार बन बैठे थे। यह मठाधीश पत्रकार कई सालों से अपने रूतबे व अपने काले कारनामों से पिछली कई सरकारों को ब्लैक मैल करके संगठन के नाम पर अकूत संपत्ति के मालिक बन बैठे है। जिसकी जांच अगर मायावती सरकार सीबीआई से करा ले तो यह चेहरे काल कोठरी और तिहाड़ जेल तक की हवा खा सकते हैं। मैंने कई सालों से इस मुहिम को आगे बढ़ाये रखा है। मुझे भड़ास4मीडिया पोर्टल के मालिक यशवंत जी का पूरा सहयोग निष्‍पक्ष रूप से मिला है। इसके चलते मेरा हौसला और बढ़ा है।

ताजा वाक्या यूपी प्रेस क्लब को लेकर जारी के. विक्रम राव के पत्र के बाद उपजे घमासान का है, जो पत्रकारों के दो गुट के बीच चल रहा है। यह दोनों गुट कभी एक दूसरे के हमराह हुआ करते थे। हर चोरी में साथ रहते थे लेकिन कुछ सालों से ठाकुर बनाम अन्य जाति का जो चक्कर यूपी प्रेस क्‍लब में चल रहा है, उससे एक मठाधीस पत्रकार के. विक्रम राव को अब शायद अपनी ढलती उम्र में पश्‍चाताप की आग में झुलस कर कुछ करने की बात याद आई है। उन्होंने जिस तरह से एक पत्र लिखकर यूपी प्रेस क्लब में हो रहे गोरखधंधे को खुलासा करने की बात कही है और वर्तमान अध्यक्ष रवीन्द्र सिंह पर आरोपों की झड़ी लगाई है, वह पूरी तरह से सत्य है।

इस पूरे मुहिम को मैं आज से दस साल पहले उठाया था, तब विक्रम राव के नीचे यह सभी मठाधीश सम्मानित पत्रकार काम करते थे, लेकिन उस समय मेरी बात को किसी ने तवज्जों नहीं दिया, लेकिन अब जब खुद विक्रम राव के हाथ कई आरोपों में जलने लगे हैं तो उन्हें सत्य याद आ रहा है। क्यों कि जब इंसान आखिरी पड़ाव पर आता है तो उसे अपनी हर उस गलती का एहसास होता है जो उसने की थी। आज यूपी की पत्रकारिता का चेहरा इतना वीभत्स हो गया है कि उसके जिम्मेदार के. विक्रम राव भी हैं। साथ ही उनके गुट के लोगों का भी इसमें भारी योगदान है। जोखी तिवारी व रवीन्द्र सिंह पहले के. विक्रम राव के ही चेले थे, लेकिन कुछ दिनों से यह लोग विक्रम राव को ठेंगा दिखाए हुए हैं, उससे क्षुब्ध होकर ही विक्रम राव ने यह पत्र लिखा है। यूपी की मुख्यमंत्री मायावती को भी पत्र लिखने का राजनैतिक नाटक चल रहा है, उसी तरह से पत्रकारिता में भी अब एक दूसरे पर कीचड़ उछालकर पत्रबाजी की जा रही है, जिससे यूपी की पत्रकारिता का चेहरा काफी खराब हो रहा है।

मेरा स्पष्‍ट कहना है कि इस पूरे वाकये से यह बात साबित होती है कि जो मैं कहता था कि यूपी प्रेस क्लब दारू व अय्यासी का अड्डा बना हुआ है। मुर्ग मुसलम की दुकान सरकारी जमीन में खुली है और पत्रकारों को जो वास्तविक पत्रकार हैं, उन्हें इसकी सदस्यता नहीं दी जाती है। मान्यता प्राप्त पत्रकार इसका सदस्य बन ही नहीं सकता। यूपी प्रेस क्लब के नाम पर संगठन का पूरा कब्जा है। इसे सरकार तत्काल प्रभाव से इस तथाकथित संगठन से मुक्त कराये लेकिन मेरी आवाज को हर बार दबा दिया गया। आज मैं फिर भड़ास पोर्टल के माध्यम से इस पूरे प्रकरण में यही कहना चाहूंगा कि इस दोनों गुट की आपसी लड़ाई से यह साबित होता है कि चोर-चोर मैसेरे भाई हैं। के. विक्रम राव व वर्तमान अध्यक्ष रवीन्द्र सिंह। मेरी मांग मायावती सरकार से है कि अब वह समय आ गया है कि यूपी प्रेस क्लब, जो चाइनागेट पर स्थित है, जिसे सरकारी जमीन पर सभी सम्मानित पत्रकारों के लिये आबंटित किया गया था, उसे तत्काल प्रभाव से अपने कब्जे में लेकर उस पर सूचना निदेशक यूपी या फिर सूचना सचिव मुख्यमंत्री के अधीन कर दिया जाए और तत्काल प्रभाव से दोनों गुटों की जांच कर ली जाए कि आखिर मुर्ग मुसलम की दुकान से क्या अध्यक्ष से लेकर समिति के सभी सदस्यों को लाभ मिल रहा है या फिर इस प्रेस क्लब में कोई और आवंछनीय गतिविधियां तो नहीं संचालित हो रही हैं।

जांच करके तत्काल प्रभाव से प्रेस क्लब को अपने कब्जे में लेकर इस पर सरकारी रिसीवर की नियुक्ति कर दी जाए। राजधानी में एक ही प्रेस क्लब है, जिसे एक संगठन अपनी बपौती बनाकर उस पर कानून विरोधी काम कर रहा है। इससे पूरी पत्रकारिता बिरादरी पर प्रश्‍न चिन्ह लग रहा है। मैं के. विक्रम राव से यही कहूंगा कि प्रभात की बात उन्हें अब देर में समझ में आई है। देर आए दुरूस्त आये को लेकर मैं उनको बधाई देता हूं कि उन्‍होंने खुद इस पूरे मकड़जाल पर अपनी चुप्पी तोड़कर अपने मन को हल्का किया है, जिससे उनके बचे कुछ दिनों पर उनको पश्‍चाताप करने का मौका ईश्‍वर ने दिया है। मेरा पत्रकारिता के काले चेहरे को बेनकाब करने का मिशन चालू रहेगा। नवरात्रि के बाद में वह सूची जारी कर रहा हूं जो प्रदेश की पत्रकारिता में एक भूचाल खड़ा कर देगा। इस सूची को कई सालों से मैं तैयार कर रहा हूं, जिसको जारी करने का वक्त अब आ गया है। मैं ने इस पर काफी मेहनत की है। कुछ विलम्ब हुआ है लेकिन मैं पूरे सबूत के सामने देश को यह बताना चाहता हूं कि पत्रकरिता के नाम पर यूपी में मठाधीश पत्रकार क्या-क्या कर रहे हैं।

प्रभात त्रिपाठी

मान्यता प्राप्त संवाददाता-लखनऊ यूपी

मोबाइलः 9450410050


AddThis