''एक अधिकारी मुझे फर्जी ढंग से फंसा रहा है और भास्‍कर उसका साथ दे रहा है''

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यशवंत जी, नमस्कार। मैं कुरुक्षेत्र (हरियाणा) से पत्रकार हूं व पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 17 सालों से जुड़ा हुआ हूं। आजकल मैं हिंदी दैनिक राष्ट्रीय सहारा एवं टोटल टीवी से जुड़ा हुआ हूं। 21 दिसम्बर 2009 को मैंने एक समाचार प्रकाशित किया था, जो कि चार समाचार पत्रों में छपा था-पंजाब केसरी (दिल्ली), उत्तम हिन्दू, अभी-अभी, गंगापुत्रा टाइम्स जिनकी फोटो प्रतियां भी आपको भेज रहा हूं।

यह समाचार एक आला अधिकारी से सम्बन्धित था, जिसने अपनी प्राइवेट गाड़ी पर लाल बत्ती लगा रखी थी जो कि कानून के विरुद्ध थी। इस अधिकारी का नाम हरीश कुमार रंगा है व यह उस समय कुरुक्षेत्र में जेल अधीक्षक के पद पर तैनात थे। उस समय भी उन्होंने मुझे एक दो जनों से संदेश भिजवाया था कि मैंने समाचार छाप कर ठीक नहीं किया। जनवरी 2011 में फिर एक बार यह तीन गनमैन लेकर घूम रहे थे व अपनी गाड़ी पर लाल बत्ती भी लगाई हुई थी, जिसकी खबर कई न्यूज चैनलों पर चली थी। उस समय इन्होंने पत्रकारों को बताया था कि इनके पास लाल बत्ती लगाने की स्पेशल परमिशन है। इन्हें जब पत्रकारों ने इनका पक्ष रखने को कहा तो इन्होंने एक पत्र भी दिखाया। जो कि बिना किसी भी हस्ताक्षर के था।

समाचार जब टीवी पर दिखाया गया तो इन्हें अपनी लालबत्ती उतारनी पड़ी क्योंकि यह लालबत्ती लगाने के लिए अधिकृत नहीं हैं। उसके बाद यह अधिकारी मुझसे द्वेष रखने लगा व 2 सितम्बर को इसने मेरे खिलाफ एक झूठी शिकायत पंचकूला थाना के सेक्टर-14 में कर दी, जिसमें इस अधिकारी ने मुझ पर आरोप लगाया कि मैंने इसे जातिसूचक शब्द कहे हैं, वह भी जेल महानिदेशक के कार्यालय में आकर। क्या ऐसा संभव हो सकता है कि कोई भी व्यक्ति किसी आला अधिकारी को जातिसूचक शब्द कह दे, वह भी महानिदेशक के कार्यालय में जाकर और जिस अधिकारी के पास तीन-तीन गनमैन हों, क्या ऐसे शब्द कहना संभव है।

9 सितम्बर को पंचकूला थाने से एक जांच अधिकारी कुरुक्षेत्र में मेरे कार्यालय में आए व मुझे कहने लगे कि आपके खिलाफ एक शिकायत आई है, जिसके बारे में आप पंचकूला आकर थाने में शामिल तफ्तीश होकर अपने ब्यान दर्ज कराएं। 11 सितम्बर को मैं कुरुक्षेत्र से अपने कुछ पत्रकार साथियों को लेकर गया व चंडीगढ़, पंचकूला से भी कुछ पत्रकार साथी पंचकूला के सेक्टर 14 के थाने में आए। वहां पर मेरे बयान दर्ज कर लिए गए, लेकिन शिकायतकर्ता तफ्तीश में शामिल नहीं हुए और पुलिस द्वारा संदेश भेजने के बावजूद भी वे थाने में नहीं आए। जांच अधिकारी ने मुझे कहा कि आपको दोबारा आना पड़ेगा।

25 सितम्बर को मुझे दोबारा पंचकूला थाने में बुलाया गया व 25 सितम्बर को भी शिकायतकर्ता जांच में शामिल नहीं हुए। उसके बाद 30 सितम्बर को मेरे विरुद्ध धारा 353/506 Sch. Castes & The Sch. Tribes (Prev. of ATRO) Act 1989 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया, जिसका एफ.आई.आर. नं. 114 है। मुझे तो 2 अक्तूबर को पता चला कि मेरे विरुद्ध मामला दर्ज हो गया है, वह भी समाचार पत्र में खबर छपी हुई थी। यूं तो हम पत्रकार हैं व आपस में इकट्ठे रहने की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन पंचकूला के दैनिक भास्कर के पत्रकार सुशील गंभीर ने तो सारी हदें पार कर दी व इस हिसाब से खबर छाप दी जैसे मेरी उनसे व्यक्तिगत दुश्मनी हो। मैं आपको खबर की कटिंग भी भेज रहा हूं।

शिकायतकर्ता अधिकारी हरीश कुमार रंगा हरियाणा की एक पूर्व मंत्री स्व. करतारी देवी को अपनी सगी साली बताता था व जब तक यह हरियाणा में मंत्री रही तो हरीश कुमार रंगा की तूती भी बोली व सभी लोग इनसे खूब डरते थे, लेकिन मैंने बिना किसी डर के एक सच्ची खबर छापी थी, जिसका खामियाजा मुझे अब मुकद्दमा दर्ज करके भुगतना पड़ रहा है। मेरे खिलाफ झूठा मुकद्दमा दर्ज हो गया, इसकी मुझे कोई चिंता नहीं है क्योंकि झूठ के कोई पैर नहीं होते लेकिन मुझे अपनी पत्रकार बिरादरी के ऊपर बहुत ही खिन्न आ रही है कि पत्रकार होने के बावजूद इन लोगों ने पत्रकारिता की सारी हदें पार कर दी व एक पीत पत्रकारिता का उदाहरण दिया, जिसमें मेरा पक्ष छापना भी उचित नहीं समझा।

3 अक्तूबर को दैनिक भास्कर के पत्रकार सुशील गंभीर को मैंने पंचकूला जाकर सारे कागज दिए व दिखाया कि कैसे मेरे खिलाफ झूठा मामला दर्ज हुआ। अगले दिन मेरे पक्ष में एक सिंगल कालम की खबर छापी, जिसका कि जानबूझकर हैडिंग भी गलत छाप दिया व अंदर खबर भी सारी झूठी छाप दी। पहली खबर में तो उन्होंने अपनी कलम ही तोड़ दी, लेकिन जब मेरा पक्ष छापने की बारी आई तो महज औपचारिकता करते हुए उन्होंने मनगढ़ंत एवं तथ्यों से परे समाचार प्रकाशित कर दिया। अत: मेरा आपसे निवेदन है कि भड़ास4मीडिया के माध्यम से मेरी मदद कीजिए।

पंकज अरोड़ा

पत्रकार

राष्ट्रीय सहारा, कुरुक्षेत्र

09812100016


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