राजेंद्र जोशी नहीं दे रहे हैं सेलरी के चौंतीस हजार रुपये

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: नए लोग मीडिया में आएं तो हरामियों से निपटना भी सीखकर आएं : सेवा में, संपादक जी, bhadas4media, महोदय, चार महीनो से मैं डिप्रेशन में आ चुका हूँ. मुझे लगता है कि जब तक मैं अपनी पूरी भड़ास न निकाल लूँ, मुझे सुकून नहीं मिलेगा. इसलिए मैं आज अपनी आपबीती आपके पोर्टल के जरिये सबको बताना चाहता हूँ ताकि मेरे साथ साथ मेरे दूसरे साथी भी इस खबर को पढ़ कर हकीकत जान सकें.

यशवंत जी, मेरा नाम मानव सिंह रावत है. मैं जैन टीवी, उत्तराखंड में काम करता था. यहां के प्रभारी राजेन्द्र जोशी थे. उनकी निशंक जी से अच्छी खासी सांठगाँठ थी. इसके चलते उन्होंने जैन टीवी को उनकी एम्बुलेंस चलाने का ठेका उत्तराखण्ड में दिलवा दिया. साथ ही बदले में उत्तराखंड में जैन टीवी का एक स्लाट ले लिया. इसमें उनको स्टाफ की जरूरत पड़ी. तब हमको भी बुलाया गया. बड़ी-बड़ी बातें की गईं. बड़े-बड़े आश्वासन देकर हमें जैन टीवी के उत्तराखंड वाले स्लाट में काम करने को कहा गया क्योंकि उत्तराखंड में स्लाटों की कई दुकाने हैं जहां सेलरी देने में कई बार ना नुकर होती है. तब मैंने राजेन्द्र जोशी जी से कहा कि ऐसा हमारे साथ ना हो तो जोशी जी ने कहा- चिंता मत करो, मैं हूं ना, मुझ पर भरोसा नहीं है क्या.

उनके इस झूठे आश्वासन पर मैंने काम करना शुरू कर दिया. चार महीनों तक काम करने के बाद जब मेरी कुल सेलरी 34000 रुपये नहीं आई तो मजबूरन नौकरी छोड़नी पड़ी. अब मैं मुबई में एक प्रोडक्शन हाउस में काम कर रहा हूं. मगर मेरी आर्थिक स्थिति बड़ी खराब है. मैंने जोशी जी को भी कहा मगर वो हमेशा झूठ बोलकर टाल देते हैं. अभी मुख्यमंत्री निशंक बदले तो जोशी जी भी उत्तराखंड से हट गए. जब मैं उनसे अपनी सेलरी मांगने के लिए फोन करता हूं तो वो फोन नहीं उठाते. दिल्ली के लोग भी हमारी सेलरी नहीं दे रहे हैं. बार बार मिन्नत करके मैं थक गया हूं. नौकरी छोड़ते वक्त मैंने सेलरी मांगी तो मिल जाएगी कहकर बात टाल दी. तब से लेकर अब तक मैं लगातार अपनी मेहनत की कमाई मांग रहा हूं मगर मुझे बार बार गुमराह कर ये लोग बेवकूफ बना रहे हैं.

जोशी जी कहते हैं कि दिल्ली में संतोष से बात करो. संतोष से कहता है कि दिलीप से बात करो. दिलीप कहता है कि राजेन्द्र जोशी जी के अकाउंट में डाल दी है, जोशी जी से बात करो. जोशी जी कहते हैं कि मेरे अकाउंट में कोई पैसा नहीं आया है वापस सन्तोष को फोन करो. तो इस तरह से सबने घुमा कर रख दिया है. अब आपके माध्यम से सभी जिम्मेदार लोगों से गुजारिश करना चाहता हूं कि हमारी सेलरी दिलवा दो. हमारी मेहनत को यूं बर्बाद ना होने दो. अब हमारे दिल से हर रोज बददुआऐं निकल रही हैं. किसी दिन लग गई तो बाद में उसका हमें भी दुख होगा. मेरी तरह मेरे और साथी भी चाहते हैं कि उनकी मेहनत की कमाई उनको मिले. मीडिया में आने वाले लोगों से निवेदन है कि इस लाइन में आने की ना सोचें और आएं तो हरामियों से निपटना भी सीखकर आएं.

Manavendra Singh Rawat (Manav)

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