क्‍यों एक अपराधी विधायक को बचाने में जुटे हैं मेरठ के अखबार?

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प्रतिष्ठा में, सम्पादक दैनिक हिन्दुस्तान/जनवाणी/अमर उजाला/जागरण/ प्रभात। जनपद मेरठ। महोदय, आपके सम्मानित समाचार पत्र जिस प्रकार एक अपराधी विधायक एवं उसके परिवार को बचाते नजर आये उससे लगता है कि मीडिया निष्पक्ष नहीं है। इस अपराधिक छवि वाले विधायक एवं उसकी पत्नी तथा अन्य सहयोगियों ने न जाने कितनी महिलाओं के सुहाग उजाडे़ हैं तथा कितने ही परिवारों को बेघर किया है, अगर जनाब हाल जानना है तो हस्तिनापुर विधानसभा क्षेत्र में जाकर जनता से पता करें।

कोई सैकड़ों लोगों को लेकर पुलिस पर पथराव करे तो आपके संवाददाता अधिक जानकार हैं वो क्या करें? क्यों नहीं आपके समाचार पत्रों में लक्ष्मी बंसल हत्याकांड को प्रमुखता से उठाया गया? क्या कारण है कि इस अपराधिक छवि वाले विधायक के काले कारनामों एवं हत्याकांड में नाम आने पर किसी भी समाचार पत्र में जगह नहीं दी गयी? इससे लगता है कि मीडिया कहीं न कहीं इस विधायक के स्वार्थ से प्रभावित है। पुलिस ने पहली बार सही काम किया है तो उसके विरोध में मीडिया जहर उगल रही है।

दैनिक हिन्दुस्तान व अमर उजाला : इन दोनों समाचार पत्र ने तो इस अपराधी विधायक की परित्याग की हुई पत्नी को देवी बना दिया। एक नहीं कई स्थानों पर फोटो छाप कर तथा तीन सम्पूर्ण पेजों पर कवरेज दे कर क्या साबित करना चाहते हैं सम्पादक महोदय? अगर इसकी अपने स्तर से जांच कराई जाये तो आपको पता चलेगा कि आपका संवाददाता कितना धन इस अपराधी से लेकर आपके अखबार को बेच रहा है? जिस अपराधी विधायक की पत्नी को आप देवी साबित करने पर तुले है, इसी महिला ने अपनी सगी बहन सहित कई महिलाओं को अपने पति की अय्याशी के लिए परोस चुकी है और उसका नतीजा है कि आज यह महिला उस अपराधी विधायक की दूसरी पत्नी कहलाती है?

दैनिक जनवाणी : जनवाणी समाचार पत्र के मालिक तो इस अपराधी के बिजनेस पाटर्नर हैं। इनसे और उम्मीद ही क्या की जा सकती है। साथ ही इस समाचार के संस्थान में मेरठ के दागी पत्रकार नौकरी करते हैं तो वे अपने हितों के लिए कुछ भी कर सकते हैं? क्योंकि इस संस्थान के मालिकों को पत्रकारिता की एबीसीडी...भी नहीं आती? जनवाणी द्वारा दिनांक 24 सितम्बर, 2011 से इस अपराधी छवि के विधायक को महात्मा बनाये जाने की कवायद जारी है। शर्म करो सम्पादक महोदय.... आप इन अपराधियों के लिए समाचार पत्र का प्रकाशन करते हैं या आम पाठकों के लिए?

दैनिक जागरण : जागरण अपनी निष्पक्षता के लिए जाना जाता है, लेकिन आपके समाचार पत्र में जिस प्रकार इस भोण्डे आंदोलन को जगह दी गयी है वो अत्यंत शर्म की बात है?

दैनिक प्रभात : प्रभात ने तो श्याद किसी नेता से अपनी दुश्मनी निकालने का काम किया है, ये इस बात से भी साबित है कि इस समाचार पत्र का सिटी चीफ केपी त्रिपाठी, जिसके पिता माध्यमिक शिक्षा परिषद के एक बनाम कर्मचारी थे जो पैसे के लिए कुछ भी कर सकते थे और संवाददाता संजय वर्मा इस अपराधी विधायक का रिश्ते में साला लगता है, इसलिए वो अपनी बहन को बचाने के लिए कुछ भी कर सकता है? सम्पादक जी आंखें बंद करके रहोगे तो ये केपी त्रिपाठी व संजय वर्मा सरीखे नौसिखये आर्थिक हित साधने वाले पत्रकार आपकी वर्षों की पत्रकारिता को भ्रष्टाचार की भेट चढ़ा देंगे। खबर हवा में लिखने वाले ये पाठकों का क्या संदेश देना चाहते हैं? सम्पादक महोदय इस रिपोर्टर की बेतुकी बातों से आम पाठक को क्यों सता रहे हैं?

आज के आपके समाचार पत्रों के अंक देखकर अत्यंत ही दुखः हुआ और पाठक जागरूक मंच ने निर्णय लिया है कि आपके ऐसे बेहूदा व बेतुके तथा अपराधियों के संरक्षण दिये जाने वाले समाचारों का विरोध हर स्तर पर किया जायेगा। किसी भी ऐसी महिला व पुरूष को अपने समाचार पत्रों के माध्यम से देवी मत बनाओ जो समाज के लिए कंलक व कोढ़ हों?

भवदीया

मनीषा मोहन सिसौदिया

अध्‍यक्ष, पाठक जागरुक मंच

जागृति बिहार, सेक्‍टर 4, मेरठ

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