सुधीर चौधरी बोले- 'नो नानसेंस कंटेंट' है हमारी सफलता का राज

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सुधीर चौधरीलाइव इंडिया न्यूज चैनल अगर टीआरपी के हिसाब से लगातार आगे बढ़ रहा है तो किस वजह से बढ़ रहा है. कैसा कंटेंट दिखाया जा रहा है इस चैनल पर. क्या रणनीति अपनाई है इस न्यूज चैनल ने. ऐस ही कुछ सवालों का जवाब पाने के लिए चैनल के सीईओ और एडिटर इन चीफ सुधीर चौधरी को भड़ास4मीडिया ने पकड़ा.

सुधीर ने साफगोई से सब कुछ बता दिया. उन्होंने बधाई स्वाकारी, टीआरपी चार्ट में चैनल को चार नंबर की कुर्सी पर बिठा पाने में सफल होने की, और जवाब में थैंक्यू के साथ कहा- बहुत मेहनत करते हैं हम लोग, यह सफलता किसी एक की नहीं बल्कि इसके लिए लाइव इंडिया की पूरी टीम बधाई की पात्र है.

पहला सवाल सुधीर से- लोग कह रहे हैं कि डीटीएच प्लेटफार्म को टैम वालों ने टीआरपी मीटर के दायरे में ला दिया है, इस कारण लाइव इंडिया को अचानक बहुत फायदा मिलने लगा? कितनी सच्चाई है इसमें??

जवाब में सुधीर कहते हैं- सारे बड़े खिलाड़ी पहले से ही डीटीएच प्लेटफार्म्स पर हैं. तो फायदा सिर्फ हमें कैसे मिलेगा, या तो सभी को मिलेगा या किसी को नहीं मिलेगा. हम बराबरी पर लड़ रहे हैं. फील्ड वही है. पिच वही है. अगर देखा जाए तो मुश्किल ज्यादा हम लोगों के सामने है क्योंकि हम लोग तो टाटा स्काई पर नहीं है, सन टीवी पर नहीं हैं, दूरदर्शन के सबसे बड़े नेटवर्क डीडी डायरेक्ट पर नहीं हैं. इन तीन नेटवर्क पर अगर हम लोग आ गए तो फिर नंबर दो की पोजीशन पर आने में भी देर नहीं लगेगा.

दूसरा सवाल था- किस तरह का कंटेंट दिखाकर आप सफल हो पा रहे हैं? टीआरपी चार्ट में लगातार सक्सेस होते रहने का राज क्या है?

सुधीर कहते हैं- मैं अपनी टीम के वरिष्ठों को सिर्फ एक बात ब्रीफ करता हूं, वह भी एक लाइन में- नो नानसेंस कंटेंट. बस, यही हम लोगों का नारा है. कुछ भी ऐसा मत दिखाओ जो लाजिकल न हो, साइंटिफिक न हो. भूत प्रेत दिखाओ लेकिन उसके पीछे एक सचेत दिमाग होना चाहिए, साइंटिफिक एप्रोच होना चाहिए. और ऐसा नहीं है कि अच्छे चैनल भूतप्रेत नहीं दिखाते. डिस्कवरी और नेशनल ज्योग्राफिक चैनल भी भूत प्रेत दिखाते हैं, पर उनका विजन व एप्रोच देखिए. आपको स्तरीय कार्यक्रम मिलेगा, इनफारमेटिव प्रोग्राम दिखेगा. पर कुछ न्यूज चैनलों ने भूतप्रेत से जुड़ी वाहियात किस्म की स्टोरीज दिखा के पूरे न्यूज चैनल जगत को बदनाम कर दिया. हम लोग ऐसा नहीं करते. धरती के विनाश की खबर दिखाइए लेकिन इनफारमेशन भी तो दीजिए, साइंस की खोजों से भी तो इसे कनेक्ट करिए, एक आशावादी नजरिया भी तो पेश करिए.

लोगों को डराना मकसद नहीं होना चाहिए. लोगों को किसी भी तरह से ब्लैकमेल किया जाना ठीक नहीं, वो चाहे इमोशनल हो या डराकर हो. लोगों को ज्यादा लाजिकल व इनफारमेटिव बनाने की कोशिश करना चाहिए. हम सबकी आंखों के सामने आब्जेक्ट सेम है. केवल देखने व दिखाने के तरीके अलग हैं, एप्रोच अलग हैं. डिस्कवरी का एप्रोच देखिए. आपको लगता है कि शानदार कार्यक्रम दिखा रहे हैं ये लोग. पर उसी विषय पर कोई घटिया चैनल प्रोग्राम बनाता है तो लोग टिककर नहीं देखते. ऐसा सिर्फ एप्रोच के कारण होता है. नानसेंस कंटेंट नहीं होना चाहिए. मैंने अपने साथियों से कह रखा है कि जो भी करो, ईमानदारी से करो और जबरदस्त होमवर्क करके करो.

आखिरी सवाल था- सुधीर चौधरी ने जमीन से शुरुआत की है और धीरे धीरे करके आज इस स्थिति में आ गए हैं कि उनकी टीवी इंडस्ट्री में अलग साख है. और ये जो सफलता है, उससे सुधीर चौधरी का ग्राफ काफी ऊंचा हो गया है. कुल कितने दिनों की यात्रा है आपकी मीडिया की?

सुधीर का जवाब- निजी यात्रा की बात करूं तो 17 साल से मीडिया इंडस्ट्री में हूं और लाइव इंडिया के यात्रा की बात करूं तो सिर्फ तीन साल में हम लोग टीआरपी चार्ट में शून्य से 10.3 तक पहुंचे हैं. मैंने वर्ष 2007 में जनमत चैनल ज्वाइन किया था जो डिस्कशन बेस्ड चैनल था. बाद में उस चैनल को बंद करके न्यूज बेस्ड चैनल लाइव इंडिया लांच किया. उसके पहले की बात करूं तो शुरुआत वर्ष 1994 से जी न्यूज से की. वहां 2002 तक रहा. असिस्टेंट एडिटर था. प्राइम टाइम नामक शो का एंकर था. उसके बाद वर्ष 2002 में सहारा में गया. सहारा समय लांच कराया. वर्ष 2004 में इंडिया टीवी आया. एक्जीक्यूटिव एडिटर था. रजत शर्मा के साथ ब्रेकिंग न्यूज नामक शो करता था. ये तीन घंटो का शो था.


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