घटिया कंटेंट पापुलर हो, जरूरी नहीं : प्रकाश झा

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प्रकाश झा27 फरवरी 1952 को पश्चिमी चंपारण (बिहार) में जन्मे प्रकाश झा निर्माता-निर्देशक के रूप में पूरे देश में स्थापित होने के बाद अब कई नए क्षेत्रों में भी सक्रिय हो गए हैं. राजनीति, उद्यम, मीडिया में वे कई नई चीजें कर रहे हैं. हाल-फिलहाल उन्होंने बिहार-झारखंड पर केंद्रित चैनल 'मौर्य टीवी' को लांच किया है. हिंदी भाषी इलाके के जन-मानस की नब्ज समझने-बूझने वाले प्रकाश ने फिल्मी दुनिया में अपनी मेहनत, समझ-बूझ और विशिष्ट शैली के चलते जो मुकाम हासिल किया है, वह अनुकरणीय है. अपनी नई फिल्म 'राजनीति' की शूटिंग पूरी करने के बाद 'मौर्य टीवी' की लांचिंग कराने के बाद इसे स्थापित कराने के लिए कमर कसे हुए प्रकाश झा से भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत सिंह ने कई मुद्दों पर बातचीत की. पेश है बातचीत के अंश-


-फिल्म की दुनिया वाले प्रकाश झा अब मीडिया की दुनिया में भी आ गए? क्या सोचकर आए?

--मैं इंटरटेनमेंट फील्ड से हूं. इसी फील्ड से ताल्लुक रखता है टीवी भी. टेलीविजन बहुत पुराने समय से करते आ ही रहे हैं. दूसरी चीज यह कि बिहार की चीजें अपनी हों, बिहार के लोग लगें, मिलें और बनाएं, बिहार का प्रोडक्शन हो ताकि कोई कहे कि भाई ये तो चैनल बिहार का है। हम अन्य चीजों में भी इनवेस्ट कर ही रहे हैं. माल-मल्टीप्लेक्स बनावा रहे हैं. फैक्ट्री लगवा रहे हैं. कई चीजें प्लान हो रही हैं. जो भी इनवेस्टमेंट संभव है, वो मैं कर रहा हूं. मीडिया भी बहुत जरूरी चीज है. हम इससे जुड़े हुए हैं. चैनल शुरू हुआ है. उद्देश्य बिहार की सोच-समझ, विचार-समाचार को सामने लाना है. और यह सब बिहार के लोग ही करें. यही मकसद है. रेडियो के तरफ भी मेरा ध्यान है. प्रिंट मीडिया की भी शुरुआत करने की योजना है. हम कोशिश कर रहे हैं.

-टीवी न्यूज चैनलों के बारे में एक मिथ है कि अगर आप जनता और सरोकार की पत्रकारिता करेंगे तो आपकी टीआरपी नहीं मिलेगी. टीआरपी के लिए उल-जुलूल चीजें दिखानी पड़ती हैं. आपकी क्या राय है?

प्रकाश झा

--ये बात तो जरूर है कि लोग कंटेंट समझ नहीं पा रहे हैं. कंटेंट को किस तरह से पेश किया जाए, यह समझ नहीं पा रहे हैं. न्यूज के साथ भी बहुत सारा पैकेजिंग हो सकता है, कंटेंट हो सकता है, उसको क्रिएटिवली ला सकते हैं सामने. हमारी तो एक्सपर्टीज इसी चीज में है. अपने चैनल को न्यूज चैनल बनाना है. मौर्य टीवी में कंटेंट हम किस तरह सामने लाते हैं, देखिएगा. हम बेसिकली न्यूज को, कंटेंट को बहुत स्पेशल तरीके से सामने लाने की कोशिश कर रहे हैं।

-न्यूज चैनलों के लिए जारी होने वाली वीकली टीआरपी की व्यवस्था को खत्म करने की मांग आजकल उठ रही है. क्या आपके चैनल में प्रकाश झाभी टीआरपी को ध्यान में रखकर प्रोग्राम बनाए जाएंगे या टीआरपी के दबाव के बिना आप लोग काम करना पसंद करेंगे?

--मांग तो ठीक है लेकिन जब कोई माध्यम बन जाता है प्रचार-प्रसार का तो हर आदमी जानना चाहेगा कि मेरा सामान कहां तक पहुंच रहा है, मेरी बात कहां तक पहुंच रही है. तो कहीं न कहीं, कोई न कोई, मापदंड तो बनाना ही पड़ेगा उसका. मुझे लगता है कि इसको हमें चैलेंज के रूप में लेना चाहिए. बेहतर से बेहतर कंटेंट बना कर सामने लाना चाहिए. कोई जरूरी नहीं है कि घटिया कंटेंट ही पापुलर हो. कहानी जब भी अच्छी होगी, कंटेंट जब भी अच्छा होगा, लोग उसको देखेंगे ही देखेंगे. इसमें कोई शक की बात नहीं है. मेरा मानना हमेशा यही रहता है. हमने अपने फिल्म मेकिंग करियर में कोई घटिया फिल्म नहीं बनाई. हमने अपने कंटेंट को अपने तरीके से पेश किया. 'दामुल' एक जमाने में बनाई थी. तब कई तरह की बातें हुईं. मैंने कंटेंट को री-पैकेज किया. 'मृत्युदंड' बनाई, वो चली. 'गंगाजल' बनाई, वो चली. 'अपहरण' बनाई, वो चली. कहना तो वही है जो हम कहना चाहते हैं. जो मान्यताएं है बालीवुड की, उसको मैंने आंख बंद करके फालो नहीं किया. तो हम इसमें बिलीव करते हैं कि हम कंटेंट को अपने तरीके से ले आएंगे और इसे चलाएंगे.

-बिहार और झारखंड में करप्शन एक बड़ा मुद्दा है. आपका चैनल इसे उठाएगा?

--एक न्यूज चैनल का जो दायित्व होता है, हम उसका निर्वाह करेंगे. करप्सन अगर सामने आएगा तो उसे उजागर किया जाएगा. चैनल हर मुद्दे को निष्पक्ष रूप से पेश करेगा और करना भी चाहिए.

-कई बार तो मीडिया हाउस ही भ्रष्टाचार में भागीदार हो जाते हैं?

--मैं इन-प्रिंसिपल जो सोचता हूं वो यह कि सच्चाई को हमेशा सामने लाया जाना चाहिए. हर चीज निष्पक्ष हो करके दिखाना चाहिए. अगर हम यह करते हैं तो राह से भटकेंगे नहीं.

-बिहार-झारखंड के पोलिटिशियन्स के प्रति आपका चैनल क्या रवैया अपनाएगा?

--मैं व्यक्तिगत रूप से नहीं बैठा हूं एनालिसिस करने के लिए. जो होगा वो अपना चैनल चलाएगा. अगर मैं भी गलती करूंगा तो चैनल मेरी भी गलती को बताएगा क्योंकि मैं भी तो बिहार का ही हिस्सा हूं.

-मौर्य टीवी में अंदरखाने काफी कुछ उथल-पुथल हुआ. कई लोग आए और गए. यह क्यों हुआ?

प्रकाश झा

--कुछ रोडब्लाक्स थे. उनको एक बार जिम्मेदारी दी गई. पर सब कुछ ठीक से स्पष्ट नहीं हो रहा था. तब बैठ करके और बातचीत करके हमने व्यवस्था बनाई. व्यवस्था बदली गई. अभी आप देख रहे होंगे कि पिछले एक-दो महीने से सब कुछ बिल्कुल ठीक चल रहा है. सुचारू रूप से चैनल लांच हो रहा है. अब कोई दिक्कत की बात नहीं है. मीडिया में तो ऐसा होता ही रहता है. कोशिश यही रही है कि सब ठीकठाक से चले. सभी अपनी जिम्मेदारी सही तरीके से संभाल सकें. हमने तो पिछले दो साल से चैनल के लिए हर वो काम किया, जो एक व्यवस्थित चैनल के लिए जरूरी होता है. तभी बिहार का कांपैक्ट सैटेलाइट चैनल विथ प्रोडक्शन हाउस लांच हो पाया है.  

-आप बिहार की धरती से निकले और प्रतिभा-मेहनत के संयोग से सफल भी हुए. एक उद्यमी के रूप में भी स्थापित हो रहे हैं. लेकिन देखा जाता है कि आमतौर पर हिंदी भाषी लोग खुद का बिजनेस या उद्यम करने में बहुत आलसी होते हैं, ऐसा क्यों?

--मेहनत तो करते हैं लोग. सफल होना भी चाहते हैं. लेकिन समस्या यह होती है कि हम लोगों की जो जमीन है, बिहार की, यूपी की, हिंदी भाषी क्षेत्र की, वो बहुत उर्वर जमीन है. यहां जो लोग हैं वो थोड़े सुख के आदी होते हैं. जमीन पर जो भी रहते हैं, सुख के आदी हो जाते हैं. ये अनफारचुनेट बात है. जब हम लोग बाहर जाते हैं और तरह-तरह की कठिनाइयों को झेलते हैं तो हमारी प्रोडेक्टिविटी बहुत बढ़ जाती है. हम जब वापस अपनी जमीन पर चले जाते हैं तो हम फिर आलसी हो जाते हैं. हम प्रोडक्टिविटी में नहीं रहते हैं. हमे कहीं न कहीं से खाना मिल जाता है. ये प्राब्लम है हम लोगों के साथ. हमारी संपदा ही हमारी प्राब्लम है. तो इसलिए लोगों में जो ललक होती है इनवेस्ट करने की, काम करने की, वो ललक हमारे यहां कम मिलती है. पर चीजें बदल रही हैं. आने वाले जनरेशन के बच्चे इतिहास बदलेंगे. बिहार-यूपी समेत हिंदी भाषी के बच्चे काफी कंपटेटिव हो रहे हैं. वो इतिहास बदलेंगे.

-आप खुद का जो मीडिया हाउस खड़ा कर रहे हैं, उसमें कैसा वर्क कल्चर देखना चाहते हैं?

प्रकाश झा

अभी तो हम ग्रो कर रहे है मेरे भाई. जैसे-जैसे ग्रोथ मीडिया हाउस की होगी, वो लोग जो इसे चला रहे हैं, उनकी भी ग्रोथ होगी. हम लोग हमेशा से मिल-जुलकर काम करने में विश्वास करते रहे हैं. हमारी संस्कृति तो आज तक यही रही है कि हम एक दूसरे को मान-सम्मान दें, एक दूसरे के साथ मिल कर काम करें. हमारी फिल्म कंपनी में लोग हमारे साथ 20-20 वर्षों से जुड़े हुए हैं और काम कर रहे हैं. हमारे साथ उनकी भी ग्रोथ हुई है. हम इसी फिलासफी को यहां भी रखेंगे. हमारा मानना है कि वी वर्क टूगेदर, वी लिव टूगेदर, वी लर्न टूगेदर एंड वी ग्रो टूगेदर।

-प्रकाश झा बिहार की राजनीति करना चाहते हैं?

देखिए हमारी राजनीति बहुत क्लीयर है. हमारी राजनीति पार्टी, पालिटिक्स और समीकरण की राजनीति नहीं है. आप कभी भी हमको इन प्लेटफार्मों पर नहीं पाए होंगे और न पाएंगे. हमारी राजनीति इकानामी से जुड़ी हुई है. वेल्थ जनरेशन से जुड़ी हुई है. हम अगर एमपी बनना भी चाहते थे तो हम एक ऐसी पोजीशन पर आना चाहते थे ताकि रिसोर्सेज एक्सेस कर सकें. हमने जो भी काम किया वह जाति-पाति से परे हटकर किया. हमने सुगर फैक्ट्री लगाने का काम किया, माल-मल्टीप्लेक्स बनाने का काम किया, टेलीविजन चैनल लाने का काम किया. ये सब विकास के ही काम तो हैं. हम तो इनवेस्टमेंट कर रहे हैं. लोगों के साथ काम करना है, यही हमारी राजनीति है मेरे भाई. आपने हमें कभी ऐसे प्लेटफार्म पर पाया है जहां जाति-पाति समीकरण की बात हो रही हो? ये मेरी राजनीति ही नहीं है. मैं तो ये चाहता हूं कि सबके सब लोग मिल-जुल करके काम करें. बिहार के बारे में सोचें. सोचें कि बिहार में धन की उत्पत्ति कैसे हो. आज एक प्लेटफार्म बना है. वर्षों बाद बिहार के प्रति लोगों में अच्छी भावना आ रही है. इससे कितना दिल खुश होता है.

-प्रकाश जी, आपको चैनल लांचिंग पर ढेर सारी शुभकामनाएं.

मुझे आप सभी लोगों की शुभकामनाएं चाहिए. हम जो करना चाहते हैं अगर कर ले गए तो उसमें सिर्फ मेरा नहीं बल्कि पूरे बिहार और समाज का भला है. आपको धन्यवाद.


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