मेरठ के पत्रकार दीपक ने पत्रकारिता त्यागने के बाद अंततः रेस्टोरेंट खोल दिया

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पिछले साल मेरठ के दो नौजवानों ने भरी जवानी में पत्रकारिता को हमेशा के लिए बॉय बोल दिया था. उसमें से एक ने अब जाकर चुप्पी तोड़ी है. इनका नाम है दीपक अग्रवाल. दीपक आई-नेक्स्ट में रिपोर्टर हुआ करते थे. उसके पहले अमर उजाला में काम कर रहे थे. पत्रकारिता और अखबारों का हाल देखकर दीपक का संवेदनशील मन रो पड़ा और उन्होंने इससे अलग हो जाने का फैसला किया. दीपक ने करीब नौ महीनों तक घरवालों को कनवींस किया कि उन्हें स्वरोजगार करने दिया जाए.

इन महीनों के दौरान दीपक ने कई तरह के उद्यमों को नजदीक से देखा और शोध किया. पढ़ाई-लिखाई की. अंततः उन्होंने रेस्टोरेंट खोलने का फैसला किया. मेरठ के गंगानगर इलाके में दीपक का रेस्टोरेंट जब उदघाटित हुआ तो उस मौके पर करीब पांच सौ लोग पहुंचे. पत्रकारिता, मीडिया, राजनीति, ब्यूरोक्रेसी.. हर फील्ड के लोग आए. सबने दीपक को शुभकामनाएं दीं. दीपक ने भड़ास4मीडिया से बातचीत में बताया कि उनका घर गढ़-मुक्तेश्वर में है और रेस्टोरेंट खोलने के अपने सपने को साकार करने के बाद वे घर जा रहे हैं. वे पिछले नौ महीने से मेरठ में ही थे. दीपक का कहना है कि रेस्टोरेंट खोलने के चौथे दिन मैं यह कह सकता हूं कि अभी मैं रोजाना के खर्चों-आमदनी के हिसाब से नो प्राफिट नो लास में हूं. इससे संकेत मिलता है कि मैंने जो कुछ इनवेस्ट किया है, वह जल्द मेरे पास लौट आएगा और मैं लाभ में रहूंगा.

दीपक के मुताबिक ट्रेडीशनल खाना तो लोग घर पर बना लेते हैं या बनवा लेते हैं. इसलिए ब्रेकफास्ट और लंच वगैरह की व्यवस्था नहीं रखी है. सिर्फ फास्टफूड है. हां, बैठने की उम्दा व्यवस्था कराई है. तीन सौ मीटर के प्लाट में ऐसी हट बनवाई है कि अगर कोई एक बार इसमें बैठे तो उसे नहीं लगेगा कि वह मेरठ में बैठा है. यहां सुकून और शांति है. इसलिए उम्मीद है कि युवा काफी संख्या में रेस्टोंरेंट में आएंगे. इस रेस्टोरेंट का उदघाटन 11 अप्रैल को हुआ. इसके उदघाटन की खबर व तस्वीर आई-नेक्स्ट अखबार में भी प्रकाशित हुई जहां दीपक कभी रिपोर्टरी किया करते थे.

पत्रकारिता को अलविदा कहने वाले दीपक की शुरुआती खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें- गुडबॉय जर्नलिज्म


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