इतने बड़े बाबा बन गए कि चैन से मर भी नहीं पा रहे सत्य श्री साईं बाबा

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बाबाओं का निजी जीवन कई तरह के रहस्यों से भरा होता है. और ये रहस्य ही कम पढ़े लिखों में अंधआस्था और पढ़े-लिखों में कौतुक का भाव पैदा करते हैं. साईं बाबा को लीजिए. जीते जी कई बार विवादों में फंसे बाबा चैन से मर भी नहीं पा रहे हैं. उनका मरना भी विवादों से घिर गया है और इस कारण स्थगित-सा हो गया है. एक पूर्व सांसद ने आरोप लगाया है कि साईं बाबा को बंधक बनाकर रखा गया है और उनकी बीमारी एक गहरी साजिश का हिस्सा है.

एक संगठन ने अस्पताल और न्यास पर आरोप लगाया है कि बाबा के हालत की सही जानकारी न्यास के लोग नहीं दे रहे हैं जिससे बाबा के लाखों भक्त चिंतित है. इस मांग पर आंध्र प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने बाबा के स्वास्थ्य की रिपोर्ट तलब की है. पूर्व सांसद आदिकेशावुलु नायडू ने आरोप लगाया है कि बाबा को बंधक बनाकर रखा गया है.  पूर्व सांसद एवं तिरूमाला तिरूपति देवस्थानम (टीटीडी) के पूर्व अध्यक्ष आदिकेशावुलु नायडू ने आरोप लगाया है कि न्यास ने अस्पताल के साथ मिलकर बाबा को बंधक बना कर रखा है. उन्होंने कहा कि 85 वर्षीय बाबा की बीमारी के पीछे एक साजिश है.

पेनुगोंडा की एक अदालत में एक वकील ने याचिका दायर की है जिसमें न्यायालय से मांग की गई है कि वह आंध्र प्रदेश सरकार, अस्पताल और सत्य साई ट्रस्ट को निर्देश दे ताकि वे बाबा की स्थिति के बारे में पूरा विवरण उपलब्ध कराएं. इस याचिका को भास्कर रेड्डी ने दायर किया है जिस पर शनिवार को सुनवाई होगी. याचिका में अदालत से मांग की गई है कि वह आध्यात्मिक गुरु का इलाज कर रहे अस्पताल को उनकी स्थिति के बारे में बताने के लिए निर्देश जारी करे.  याचिककर्ता ने आरोप लगाया है कि अस्पताल और ट्रस्ट बाबा की हालत के बारे में सूचना को दबा रहे हैं और पुट्टापर्थू स्थित सत्य साई अस्पताल द्वारा प्रतिदिन जारी मेडिकल बुलेटिनों में भी बाबा की हालत के बारे में स्पष्टता से नहीं बताया जा रहा है.

आंध्र प्रदेश के मानवाधिकार आयोग ने सोमवार को राज्य सरकार को निर्देश दिया कि आध्यात्मिक गुरु सत्य साईं बाबा के स्वास्थ्य की रिपोर्ट पेश करे. बाबा का पुट्टापर्थी के अस्पताल में पिछले तीन सप्ताह से इलाज चल रहा है. आयोग ने मुख्य सचिव एस.वी. प्रसाद से 85 वर्षीय बाबा की स्थिति का ब्योरा 29 अप्रैल तक पेश करने को कहा. साथ ही यह जानकारी भी मांगी कि उनका किस तरह इलाज किया जा रहा है. आयोग ने यह आदेश एक संगठन 'दलित जनसभा' द्वारा दायर आवेदन पर जारी किया. आवेदन में सरकार को बाबा के स्वास्थ्य से सम्बंधित तथ्यों को सामने लाने के निर्देश जारी करने की मांग की गई थी.

आवेदनकर्ता ने आरोप लगाया कि सत्य साईं सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के आधिकारी और सत्य साईं केंद्रीय न्यास बाबा के स्वास्थ्य की सही जानकारी नहीं दे रहे हैं, जिस कारण देश और देश के बाहर के बाबा लाखों भक्त चिंतित हैं. ज्ञात हो कि चिकित्सा शिक्षा निदेशक रवि राज के नेतृत्व में राज्य सरकार के चिकित्सकों का दल बाबा की स्थिति पर नजर रख रहा है. बाबा को 28 मार्च को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई है. इलाज कर रहे चिकित्सकों का कहना है कि बाबा के कई अंग ठीक से कार्य नहीं कर रहे हैं. उन्हें लगातार जीवन रक्षक प्रणाली की मदद दी जा रही है.

उधर, सत्य साईं ट्रस्ट के 40 हजार करोड़ की संपदा पर सरकार और साईं के रिश्तेदारों की गिद्ध दृष्टि जमीं हुई है. 85 वर्षीय आध्यात्मिक गुरु श्री सत्य साईं बाबा को फेफडे और सीने में दर्द की शिकायत के चलते २८ मार्च को अस्पताल में भर्ती किया गया था. इस बात की अटकलें तेज हो गयी हैं इस अपार संपत्ति का वारिस सत्य साईं के बाद कौन होगा. इस ट्रस्ट की पुट्टपर्ती, बैंग्लोर, हैदराबाद, चेन्नई, मुंबई सहित विदेशों मे भी काफी प्रॉपर्टी है जिनकी कीमत 40 हजार करोड़ से ऊपर आंकी जा रही है. इसके अलावा ट्रस्ट स्कूल, कालेज और दो हाईफाई अस्पताल भी चलाता है. इस ट्रस्ट पर आंध्र सरकार भी नजर रखे हुये है.

उत्तराधिकारी के दौड़ में बाबा के भतीजे और ट्रस्टियों में से एक आर.जे. रत्नाकर राजु का नाम सबसे आगे है. मगर इस बात को भी लेकर चर्चा है कि ट्रस्ट उत्तराधिकारी का चुनाव जनतांत्रित ढंग से करती है या फिर परिवार के किसी सदस्य के हाथों ये पूरी बागडौर सौंप देती है. आंध्र सरकार के देखरेख में पांच सदस्यीय एक टीम पुट्टपर्ती में उनके खातों को खंगालने में जुटी है. गौरतलब है कि इस ट्रस्ट की आमदनी का मुख्य जरिया देश विदेशों से आने वाला डोनेशन है. सुनने में यह भी आ रहा है कि आंध्र सरकार केंद्र सरकार से इस ट्रस्ट की बागडोर अपने हाथों सौंपने की गुजारिश कर सकती है. कुल मिलाकर साईं ट्रस्ट की अथाह संपत्ति विवादों की जननी है. देखना है कि यह किसके हाथों लगता है.


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