विवादों वाले सत्य साईं बाबा तो मार्च महीने में ही मर गए थे!

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सत्य साईं बाबा नहीं रहे. लगभग एक महीने से वे अस्पताल में पड़े थे. जीवन रक्षक प्रणालियों के जरिए उनका जीवन चल रहा था. उनकी उम्र 85 साल थी. उनके निधन के बाद उनके 55 हजार करोड़ रुपये के साम्राज्य के उत्तराधिकारी को लेकर लड़ाई तेज हो गई है. करीब डेढ़ सौ देशों में बाबा का साम्राज्य फैला था. साईं बाबा की 55 हजार करोड़ की संपत्ति अब सत्य साईं सेंट्रल ट्रस्ट के अधीन हो जाएगी.

सत्य श्री साईं बाबा के निधन पर दुनिया भर के करोड़ों भक्त गमगीन हैं. बाबा वर्ष 2005 से व्हीलचेयर पर थे. बाबा की दो बड़ी बहनें, एक बड़े व एक छोटे भाई की मौत हो चुकी है. श्री सत्य साईं बाबा को शिरडी साईं बाबा का अवतार माना जाता है. साईं बाबा का जन्म आन्ध्र प्रदेश के पुत्तपार्थी गांव में 23 नवंबर 1926 को हुआ था. उन्होंने खुद को 14 साल की उम्र में 'अवतार' घोषित कर दिया था. उनके भक्तों का कहना है कि 1940 में बिच्छू काटने के बाद उन्होंने संस्कृत श्लोक बोलना शुरू कर दिया, जबकि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी. साईं बाबा की आलोचना भी कम नहीं होती रही है.

किसी ने उन्हें भौतिकवादी बताया तो कभी उन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगा. बीबीसी ने एक डाक्यूमेंट्री का प्रसारण किया जिसमें बाबा के बारे में कई नकारात्मक बातें कही गईं. वर्ष 1993 में साईं बाबा के कमरे में चार घुसपैठियों की पुलिस द्वारा हत्या आज भी रहस्य है. हाथ में भभूत पैदा करने के उनके चमत्कार पर सवाल उठाए गए. कई देशों के सांसदों के कई समूहों ने बाबा पर आरोप लगाए कि सत्य साईं तिकड़म और हाथ की सफाई दिखाते हैं. उनका आरोप था कि वह भक्तों को सम्मोहित कर उनका यौन शोषण करते हैं. कई भक्तों ने आरोप लगाए कि मोक्ष दिलाने के बहाने उनके साथ शारीरिक संबंध बनाए गए. ब्रिटेन की एक महिला भक्त ने तो यहां तक कहा था कि बाबा और उनके सहयोगियों ने लंबे समय तक उसका शारीरिक शोषण किया.

1970 में एक ब्रिटिश लेखक टॉल ब्रोक ने सत्य साईं बाबा को सेक्स का भूखा भेड़िया करार दिया था. उनके खिलाफ विदेश में कई केस भी दर्ज किए गए थे. सत्य साईं बाबा के चमत्कारों को देश के कई नामी जादूगरों ने चुनौती भी दी. मशहूर जादूगर पीसी सरकार ने तो सत्य साईं के सामने ही भभूत और सोने की चेन निकालकर दिखा दी थी. वारिस की दौड़ में बाबा के भतीजे और ट्रस्टियों में से एक आरजे रत्नाकर राजू भी हैं. बाबा ने पुट्टपर्थी में रहने वाले अपने सारे रिश्तेदारों को खुद से दूर रखा और रत्‍‌नाकर राजू अकेले हैं, जो उनके ट्रस्ट में शामिल हैं. आंध्र सरकार की भी नजर ट्रस्ट पर है.

यदि उत्तराधिकारी का विवाद बढ़ा तो आंध्र सरकार केंद्र सरकार से ट्रस्ट की बागडोर अपने हाथों सौपने की गुजारिश कर सकती है. ट्रस्ट को लेकर लंबे समय से विवाद है. पुट्टपर्थी में उनके करीब 200 रिश्तेदार हैं, जो ट्रस्ट को पारिवारिक बताकर हक जताते हैं. लेकिन साईं बाबा ने उन सभी को खुद से दूर रखा. ट्रस्ट में उनके केवल भाई आरवी जानकीराम थे, जिनका 2005 में निधन हो गया. आरजे रत्‍‌नाकर राजू उन्हीं के बेटे हैं.

बहुत से लोगों का मानना है कि 28 मार्च को अस्पताल में भर्ती होने के एक दिन बाद ही उनकी मौत हो गई थी. परिजन उनकी मौत की घोषणा के लिए किसी उपयुक्त समय की प्रतीक्षा कर रहे थे. इस आरोप को बल इस बात से भी मिलता है कि कई सांसदों व संगठनों ने बाबा को बीमारी के बहाने कैद किए जाने का आरोप लगाकर न्यायालय में याचिकाएं दायर की थी. बाबा का इलाज उनके ही बनाए अस्पताल में हो रहा था. डाक्टरों का दल भी रोज यही कहता रहा कि बाबा की हालत बिगड़ रही है पर स्थिर है, शरीर के अंग काम नहीं कर रहे हैं व बाबा जीवनरक्षक प्रणालियों पर चल रहे हैं. किसी भी बाहरी व्यक्ति को अस्पताल में बाबा के निरीक्षण की अनुमति नहीं थी.


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