किसी के नायक किसी के खलनायक ओसामा की मौत मामूली नहीं है

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अमिताभ: ओसामा बिन लादेन- इतिहास से होड़ : अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने आधिकारिक तौर पर विश्व को यह बता दिया है कि ओसामा बिन लादेन को मारा जा चुका है. यह इस समय की सबसे बड़ी खबर है और एक ऐसी खबर है जिसका मात्र तात्कालिक महत्व नहीं है बल्कि बहुत ही दूरगामी प्रभाव है. मतलब यह कि यह एक ऐतिहासिक खबर है. ऐतिहासिक इसीलिए क्योंकि ओसामा की मौत मात्र एक व्यक्ति की मौत नहीं है.

यह मौत इतिहास के एक बड़े पात्र की मौत है. एक ऐसे व्यक्तित्व की जिसे मात्र अपने पहले नाम से ही पूरा विश्व जानता है और शायद आगे कई पीढ़ियों तक जानता रहेगा. ओसामा की मौत कोई मामूली मौत नहीं है, यह बात इसी से सिद्ध हो जाती है कि इसे घोषित करने के लिए कोई सामान्य सा अमेरिकी प्रवक्ता टीवी पर आ कर रटी-रटाई सरकारी भाषा में यह सूचना दे कर इतिश्री नहीं कर लेता है बल्कि आज के समय के दुनिया के निर्विवाद रूप से सबसे ताकतवर आदमी अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा स्वयं कैमरे के आगे पूरी तैयारी कर के आते हैं और लगभग दस मिनट तक इस घटना पर बोलते हैं. मैं समझता हूँ किसी भी व्यक्ति के लिए इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है कि उसकी मौत पर दुनिया का सर्व-स्वीकृत सर्वाधिक शक्तिशाली व्यक्ति ना सिर्फ उसकी मृत्यु की आधिकारिक घोषणा करता है बल्कि इस को एक सन्दर्भ के रूप में लेकर कई सारी ऐतिहासिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनयिक तथ्यों की व्याख्या और विश्लेषण भी करता है.

ओबामा जब यह खबर दुनिया को दे रहे होते हैं तब उनके चेहरे पर यदि गर्व का भाव स्पष्ट नहीं भी दिख रहा होता है तो कम से कम संतुष्टि और उपलब्धि की भावना तो साफ़ दिख ही जाती है. मेरी निगाह में उस मृत व्यक्ति के लिए इससे बड़ी धरोहर, इससे बड़ा उपहार और इससे बड़ा महत्व और कोई नहीं होगा. मैं दावे से कह सकता हूँ कि अमेरिका के राष्ट्रपति तमाम देशों के राष्ट्राध्यक्षों के नाम तक नहीं जानते होंगे, बहुतों को पहचानते भी नहीं होंगे, कभी-कभार ही इन लोगों से बात किया करते होंगे. पर वही शख्स ओसामा को मारने के लिए अपने व्यक्तिगत पर्यवेक्षण में एक पूरी टीम खड़ा कर देते हैं और इस बात को खुलेआम स्वीकार करते हैं कि यह काम मेरे व्यक्तिगत टीम ने किया है. क्या यह एक व्यक्ति को मामूली महत्ता देना है?

मैंने इतिहास में पढ़ा था कि एक समय के विश्वविजेता सिकंदर महान ने हिंदुस्तान की सरहद पर स्थित राजा पोरस को बंदी बना लेने के बाद पूछा था कि बताओ तुम्हारे साथ क्या सलूक किया जाए और तब पोरस ने कहा था मैं तुमसे वैसे ही व्यवहार की उम्मीद करता हूँ जैसा एक राजा दूसरे राजा के साथ करता है. पता नहीं क्यों मुझे इस पूरे घटनाक्रम में इतिहास का वही दृष्टांत एकदम से सामने याद आ जाता है. मुझे लगने लगता है कि आज का एक राजा ओबामा एक दूसरे अघोषित राजा (अच्छे या बुरे) ओसामा को ह्रदय से वही सम्मान दे रहा है जो कोई भी राजा किसी भी दूसरे राजा को देता है.

व्यक्ति का मनोविज्ञान बहुत ही जटिल होता है और कौन व्यक्ति अच्छा है और कौन बुरा, इसे समझना उतना ही दुष्कर है जितना इस बात पर फैसला कर देना कि दो विश्वसुंदरियों में कौन ज्यादा सुन्दर और आकर्षक है. जिस तरह से दूसरा प्रश्न बहुत ही सब्जेक्टिव है और हर व्यक्ति की निजी पसंद और चाहतों से संचालित होती है उसी तरह से एक आदमी की अच्छाई और बुराई भी है. मेरे लिए कोई अच्छा हो सकता है पर मेरे सगे भाई के लिए ही बुरा और इसी तरह हर किसी के लिए. इतिहास गवाह है कि एक ही व्यक्ति का आकलन देश और समाज के अनुसार कई रंगों में होता है और कई बार तो उसी स्थान पर समय के परिवर्तन के साथ एक व्यक्ति के आकलन में बहुत अंतर पड़ जाता है. भगत सिंह को इसी देश के एक जेल में फांसी चढाया गया और आज उसी जेल में उनकी समाधि बनी हुई है जहां उनकी पूजा की जाती है.

यह तो हुआ सापेक्ष और तुलनात्मक विश्लेषण का परिणाम. कई बार एक व्यक्ति लगभग सार्वभौम स्तर पर खलनायकीय भूमिका में स्वीकारा जाता है पर साथ ही यह बात भी सत्य होती है कि इतिहास उस व्यक्ति के बगैर नहीं चल पाता. क्या यह संभव है कि कोई भी रामायण रावण के बगैर और कोई भी महाभारत कंस, शकुनी और दुर्योधन के बगैर चल सके. इसी प्रकार इस्लाम के इतिहास में कर्बला के युद्ध के खलनायकों की भी उतनी ही जरूरत है जितनी हसन और हुसैन की, अन्यथा युद्ध की कहानी बन ही नहीं सकती.

यहाँ मैं इस बात में नहीं जा रहा कि ओसामा रावण, कंस, शकुनी और याजिद की परंपरा में माने जायेंगे या किसी देश या कौम के शहीदों की श्रेणी में, पर इतना तो दावे से कह सकता हूँ कि ओसामा एक बड़े ऐतिहासिक चरित्र के रूप में निरंतर याद किये जायेंगे, चाहे अच्छे के तौर पर या बुरे के तौर पर. थोडा अधिक विश्लेषण करने पर मैं यह पाता हूँ कि संभवतः ओसामा एक ऐसे विवादित ऐतिहासिक पात्र रहेंगे जिन्हें यदि अमेरिका और पश्चिमी देश एक हत्यारे खलनायक और वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के अभियुक्त के रूप में जानेगी तो इस्लामी समाज के एक बहुत बड़े हिस्से में लोग उन्हें अपने नायक के तौर पर स्थापित किये रहेंगे. कुछ उसी प्रकार से जैसा सद्दाम हुसैन के मामले में हुआ था.

आज ओसामा की मृत्यु हो गयी पर ओसामा नाम तो अमर हो गया है. कई लोगों का यह खलनायक और कईयों का यह नायक कोई सामान्य मनुष्य नहीं था जिसने कोई साधारण सी जिंदगी जी हो और फिर गुमनामी की मौत सो गया हो. ओसामा वह कद्दावर ऐतिहासिक चरित्र है जो एक मिथक, एक चेहरे, एक प्रतीक और एक बिम्ब के रूप के पुरे विश्व पर अपने आप को प्रतिबिंबित और अधिरोपित करते रहा है और भविष्य में भी ओसामा का नाम इतिहास के बड़े किरदारों में लिया जाता रहेगा.

सबसे आश्चर्य की बात जो मैं खुद में देख रहा हूँ कि वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के इस कथित कातिल और पूरी दुनिया के अनेकानेक आतंकी घटनाओं के जनक के रूप में माने जाने वाले ओसामा की मृत्यु पर उसके बारे में सोचते समय मैं सीधे-सीधे प्रसन्न या उत्साहित होने की जगह कुछ दार्शनिक सा हो गया हूँ जो एक व्यक्ति के जीवन के विरोधाभाषी पहलुओं और उसके व्यापक वैश्विक प्रभावों पर सोचते हुए मानव मन की संश्लिष्टता और जीवन और मृत्यु से जुड़े व्यापक प्रश्नों पर सोचने को उद्धत हो रहा है.

लेखक अमिताभ यूपी कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं. इन दिनों मेरठ में पदस्थ हैं.


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