अंधेरे-अकेलेपन से घिरी सुजाता एक अखबार में पत्रकार हुआ करती थी

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पिछले महीने नोएडा में एक घर की दो बहनों के बारे में पता चला था जिन्होंने सात महीनों से ख़ुद को घर के भीतर क़ैद कर रखा था. इन बहनों को अस्पताल पहुँचाया गया था जहाँ एक की मौत हो गई थी. दूसरे का इलाज करके भाई के साथ घर भेज दिया गया. पटना में भी एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. शिवपुरी मोहल्ले में पिता की मौत के बाद एक भाई और बहन ने खुद को घर में कैद कर रखा था.

महिला आयोग, पुलिस और एक एनजीओ की मदद से दोनों को गंभीर हालत में घर से बाहर निकाला गया. दोनों दो साल से एक कमरे में बंद थे. दरअसल अपने पिता की मौत के बाद बाबू और सुजाता दोनों डिप्रेशन में चले गए. डिप्रेशन की वजह से दोनों ने अपने आप को एक कमरे में बंद कर लिया. जब इसकी जानकारी एक एनजीओ को लगी तो पुलिस की मदद से दोनों को बंद घर से बाहर निकाला गया. घर का बिजली और पानी का कनेक्शन कटा हुआ था और घर में खाने का एक दाना भी नहीं था. फिलहाल दोनों को गंभीर हालत में पीएमसीएच अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है. डॉक्टरों का कहना है कि भाई-बहन दोनों मानसिक रोगी हैं. डाक्टर इन्हें सिज़ोफ्रेनिया के रोगी बता रहे हैं.

सुजाता कुछ दिनों तक यहाँ के एक हिंदी दैनिक में पत्रकार के रूप में काम कर चुकी है. लेकिन अब वह ठीक से बोल भी नहीं पाती. अब वह सिर्फ रह-रह कर चिल्ला उठती है. उसका भाई बाबू तो नरकंकाल-सा दिखता है. 'प्रयास भारती' नाम की संस्था चला रही समाज-सेविका सुमन लाल ने पुलिस से गुहार लगाई थी कि इन दोनों भाई-बहनों को बचाने में पुलिस और प्रशासन सहयोग करे. बताया जा रहा है कि पिता ब्रजकिशोर छपरा के डिप्टी कलेक्टर रह चुके थे.

तीन साल पहले पिता गुज़र गए और फिर विक्षिप्त हो चुकी माँ भी घर छोड़कर कहीं चली गईं. इस सदमे के बाद इनके एक भाई और एक बहन ने भी दम तोड़ दिया. लोगों का कहना है कि इसके बाद परिवार में ज़िंदा बची 32 वर्षीया सुजाता और 35 वर्षीय बाबू का भी मानसिक संतुलन बिगड़ गया. दोनों भूखे रहकर और घर के खिड़की-दरवाजे बंद कर या तो सोए रहते या कहीं खोए रहते. सुजाता कभी-कभार घर से निकलती भी तो 'पगली लड़की' की तरह लोगों से उलझते-खीजते हुए बदहवास स्थिति में घर लौट आती. फिर अँधेरे और सड़ांध भरे अपने कमरे में ख़ुद को क़ैद कर लेती. इस तरह मौत के काफ़ी क़रीब पहुँच चुके ये दोनों भाई-बहन एक जुझारू समाज सेविका की मदद से अब पटना के अस्पताल में हैं.



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