अश्लील विज्ञापन नैतिक रूप से भ्रष्ट लोगों के दिमाग की करतूत है

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हम नौजवानों को ध्यान में रखकर विज्ञापन बनाते हैं और नौजवानों को इसमें मजा आ रहा है। अब समाज भी बदल रहा है और आज के विज्ञापनों में जो दिखाया जा रहा है वही तो समाज का आईना है। ये बातें कही ऐड गुरू प्रहलाद कक्कड़ ने सीएनईबी के शो ''जनता मांगे जवाब'' में। इस शो में प्रहलाद कक्कड़ के साथ सुप्रीम कोर्ट की सीनियर एडवोकेट मीनाक्षी लेखी, टीवी और फिल्म लेखक अमित झा, मॉडल अदिति ओबोरॉय और मॉडल दिव्या सबलोक ने शिरकत की।

होस्ट की भूमिका में थे संपादक अनुरंझन झा। चर्चा के दौरान प्रहलाद कक्कड़ ने यह स्वीकार किया कि कुछ विज्ञापनों में अश्लीलता की सीमा पार होती है लेकिन इसकी वजह से सभी विज्ञापनों पर उंगली उठाना सही नहीं है। उन्होंने अश्लील विज्ञापन के विवाद को राजनीति से प्रेरित करार दिया। मीनाक्षी लेखी ने कहा कि आप किसके लिए बना रहे हैं यह बेहद अहम है लेकिन क्या आप बहुमत के लिए बना रहे हैं अगर ऐसा नहीं है तो कुछ लोगों की मानसिकता समाज का आइना नहीं हो सकती है।

विज्ञापनों में अश्लीलता के लिए जिम्मेदारी के सवाल पर दिव्या सबलोक ने जनता को जिम्मेदार ठहरा दिया। उन्होंने कहा कि जनता जो देखना चाहती है वही दिखाया जा रहा है लेकिन मीनाक्षी लेखी ने सवालिया लहजे में कहा कि जनता को जो परोसा जा रहा है उसके लिए जनता नहीं बल्कि अश्लील विज्ञापन परोसने वाले जिम्मेदार हैं। उन्होंने इस तरह के विज्ञापन बनाने वालों की मानसिकता पर सवाल खड़ा किया।

लेखी से असहमति जताते हुए मॉडल अदिति ने कहा कि ये बिजनेस है और कोई भी घाटा उठाना नहीं चाहता है। उन्होंने कहा कि मेरी उम्र के लोगों को इस तरह के विज्ञापन अच्छे लगते है और यह बेहद अहम है कि आप उसे किस नजरिए से देखते हैं। इस पर विरोध जताते हुए मीनाक्षी लेखी ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि  अश्लील विज्ञापन कम दिमाग और नैतिकरुप से भ्रष्ट लोगों की करतूत है और इसे कहीं से भी जायज नहीं ठहराया जा सकता।

अमित झा ने एक सवाल उठाते हुए कहा आखिर कितने लोग ड्योड्रेंट खरीदते हैं लेकिन उसके अश्लील विज्ञापन को तो अधिकतर लोग देखते हैं कहां तक यह सही है? उन्होंने कहा कि  साफ-सुथरे विज्ञापन भी बने हैं जो बेहद लोकप्रिय रहे हैं। चर्चा के दौरान जब अदिति ने पश्चिमी सभ्यता का हवाला देकर विज्ञापनों में अश्लीलता को बोल्डनेस के नाम पर जायज ठहराने की कोशिश की तो मीनाक्षी लेखी ने कहा कि जिस सभ्यता का हवाला दिया जा रहा है वहां कम उम्र के बच्चों का भड़काऊ कपड़े पहनना जुर्म है। उन्होंने पश्चिम से बहुत कुछ सीखने की नसीहत दे डाली।

अश्लील विज्ञापनों पर प्रतिबंध के मसले पर सेल्फ रेगूलेशन के विकल्प पर अधिकतर लोग सहमत नजर आए। प्रह्ललाद कक्कड़ ने कहा कि सरकार की दखलंदाजी परेशानी का सबब बन सकती है वहीं मीनाक्षी लेखी ने कहा कि इस तरह के मसले पर कई कानून हैं अगर सरकार की नीयत साफ होती तो यहां तक नौबत ही नहीं आती। अमित झा ने कहा कि ऐसे विज्ञापनों पर रोक लगाने की जब तक कार्रवाई होती है तब तक विज्ञापन अपने मकसद में कामयाब हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि अश्लील विज्ञापन बनाने वालों पर लंबे के लिए प्रतिबंध लगाना चाहिए। सीएनईबी के इस शो का प्रसारण 28 मई शनिवार रात 8 बजे होगा और इसका दोबारा प्रसारण रविवार सुबह 11 बजे होगा। प्रेस रिलीज


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