ग्रामीण पत्रकारों का दरद न जाने कोय

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जन-जन की आवाज बुलन्द करने वाले ग्रामीण पत्रकार पूरी तरह से उपेक्षित हैं। उनके हित में चल रहे तमाम पत्रकार संगठन भी उनकी समस्या को बलपूर्वक आवाज नहीं दे सके। यह समस्या सिर्फ बड़े अखबार की ही नहीं छोटे अखबारों में भी यही हो रहा है। ग्रामीण पढ़े लिखे युवा मान प्रतिष्ठा, सम्मान पहचान के लालच में पत्रकार बन रहे हैं। अखबार ऐसी भावनाओं वाले लोगों की बदौलत अपने व्यवसाय की तरक्की कर रहे हैं।

हम इसी दौर से गुजरे हैं इसीलिए शायद हम अच्छी तरीके से अपनी आपबीती के अनुसार जगबीती का अनुमान भी लगा रहे हैं। आइए बताते हैं कि हरदोई जिले में ग्रामीण पत्रकार बनने के लिए आपको क्या चाहिए। आप पत्रकार बनना चाहते हैं किसी दफ्तर चले जाइए अपना नाम पता बता कर दो आश्‍वासन जाते ही जाते दे देना। पहला कि एजेन्सी की शुरुआत सौ प्रतियों से,  दूसरा हर पर्व पर 5-10 हजार का विज्ञापन। बस आगे फिर योग्यता और समाचार लिखने के ढंग और विचारधारा से कोई सरोकार नहीं, बस आप बन गए पत्रकार। घर आ जाइए। अपनी गाड़ी में प्रेस लिखाकर पुलिस थाना पहुँचों। अखबार से व्यवहार बनाना चालू कर दो। कमाई का ठिकाना नहीं रहेगा। सुबह से शाम तक पूरे जलवे के साथ मस्ती करो। अब तो तुम्हारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ेगा।

यही है पत्रकार का मौजूदा स्वरूप। अगर आपके पास पैसे का अभाव है आपको समाचार लेखक अच्छे हैं तो आपको अखबार दस पाँच साल में बहुत खुश हुआ तो मानदेय देगा, जो चार सौ से शुरू होकर आठ सौ तक हो सकता है। समाचार कैसे आएंगे कैसे जाएंगे इसका सिरदर्द सिर्फ संवाददाता को ही झेलना पड़ता है। खबर छूटी तो गाली-गलौज और फटकार से नवाजा जाएगा। ईमानदारी के साथ बड़े अखबार में ग्रामीण स्तर पर काम करने की बात करना बहुत ही कठिन है। लोकल के अखबारों को अधिक समाचार चाहिए जिसमें संवाददाता पूरे दिन उसी के चक्कर में दौड़ भाग करता फिरता है। इसलिए ईमानदारी से ग्रामीण पत्रकारिता करना आज के दौर में कठिन कार्य है।

आवागमन और चिकित्सा जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं से ग्रामीण पत्रकार वंचित हैं। जिनके पास अनाप-शनाप कमाई है उन्हें तो लगता है कि यह बात बहुत छोटी कही जा रही है, जिनके पास कमाई को कोई जरिया नहीं वह परेशान हैं। ग्रामीण पत्रकारों में अब एकता की जरूरत है। पत्रकार संगठन कुटीर धन्धे बनते जा रहे हैं। ग्रामीण पत्रकारों को जोड़कर सदस्यता और कार्यक्रम के नाम पर वसूली की जा रही है। ऐसे में हमारा ग्रामीण पत्रकार समाज लगातार पत्रकारिता के स्तर को गिराता जा रहा है।

हरदोई में ऐसे भी जिला संवाददाता हैं जो ग्रामीण पत्रकारों से शराब मंगाकर पीते हैं। जो पीने और पिलाने के झंझट से दूर रहते हैं उनका समाचार, विज्ञापन और प्रसार को लेकर उत्पीड़न किया जा रहा है। क्या ग्रामीण पत्रकारों के साथ हो रहा इतना अन्याय अभी काफी नहीं है। अभी भी ग्रामीण पत्रकार एकता और संगठन से दूर भाग रहा है। आज वक्त आ गया है साथियों अपने स्वाभिमानी स्वभाव को जागृत कर ग्रामीण पत्रकारों के एक साथ खड़ा होने की।

लेखक सुधीर अवस्‍थी हरदोई जिले में पत्रकार हैं.


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