पत्रकार रहे मनीष सिसौदिया हैं टीम अन्ना के पांचवें चाणक्य

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आखिर क्या वजह है कि अन्ना आंदोलन की घोषणा करते हैं, और मीडिया में छा जाते हैं. आखिर क्या वजह है कि अन्ना के आगे हर बार सारी खबरें बौनी बन जाती हैं और अखबार से लेकर टीवी चैनल तक पर बस अन्ना अन्ना और अन्ना नजर आते हैं. पिछले चार दिनों से आलम कुछ ऐसा है कि क्रिकेट टेस्टमैच की खबरें भी कहीं पीछे छूट गईं और अन्ना 24 घंटे टीवी स्क्रीन पर चमकते रहे.

इन कारणों को समझने के लिए जानना होगा अन्ना के उन चाणक्यों के बारे में, जो मीडिया मैनेज नहीं करते बस मीडिया को समझते हैं और मीडिया अपने आप मैनेज होती चली जाती है. ये चाणक्य हैं, अरविंद केजरीवाल, शांति भूषण, प्रशांत भूषण, किरण बेदी और मनीष सिसौदिया. बाकी लोगों के बारे में तो हर कोई जानता है पर मनीष सिसौदिया को कम लोग जानते हैं.

मनीष सिसौदियाभ्रष्टाचार के खिलाफ देश भर में अलख जगाने वाले अन्ना को दिल्ली पुलिस गिरफ्तार कर चुकी थी. एक तरफ अन्ना के समर्थक गिरफ्तारी के विरोध में पुलिस का विरोध कर रहे थे तो दूसरी ओर तमाम न्यूज चैनलों पर अन्ना का संदेश टेलीकास्ट हो रहा था. हर कोई हैरान हर था. अन्ना तो  पुलिस की हिरासत में थे.फिर वो देश को संबोधित कैसे कर सकते हैं. अन्ना के आंदोलन को कुचलने पर आमादा सरकार के तो जैसे होश गुम हो गए थे. न्यूज चैनलों पर प्रमुखता से चलने वाले इस वीडियों ने सरकार के रणनीतिकारों की बखिया उधेड़ कर रख दी.

मीडिया मैनेजमेंट का इससे बेहतरीन नमूना हिंदुस्तान के इतिहास में पहले कभी नहीं देखा गया. जब से अन्ना ने आंदोलन का ऐलान किया है अन्ना की टीम ने सरकार को हर चाल में मात दी है. मीडिया को मैनेज करने के लिए अन्ना की टीम के पास बकायदा एक नियमावली है. जिसका टीम का हर सदस्य कड़ाई से पालन करता है. सिर्फ प्रेस मीडिया मैनेजमेंट ही नहीं टीम अन्ना ने अपने आंदोलन से ऐसे पत्रकारों को भी जोड़ा है जो मास मीडिया की कार्य प्रणाली से अच्छी तरह वाकिफ हैं.

मीडिया को दोस्त बनाकर कब कहां और कैसे ब्रेकिंग न्यूज चलवानी है. ये बात अन्ना की टीम बखूबी समझती है. इतना ही नहीं, न्यूज चैनलों के टाइम स्लॉट को समझकर मीडिया स्ट्रैटजी तैयार करना टीम अन्ना की सबसे बड़ी खासयित है और इसके पीछे है उन पत्रकारों का दिमाग जो अन्ना के साथ काम कर रहे हैं. जी न्यूज के पूर्व पत्रकार, मनीष सिसोदिया और स्टार न्यूज की जानी मानी एंकर रहीं, साजिया इल्मी मीडिया को समझती हैं. खबरों में अन्ना और उनका आंदोलन कैसे रहे इसकी बारीकी इन्हें पता है. इसके अलावा एनडीटीवी से जुड़े अभिनंदन शेखरी ने भी अन्ना के आंदोलन को काफी हद तक मीडिया फ्रेंडली बनाया है.

सिर्फ मीडिया मैनजमेंट ही नहीं आंदोलन के लिए तकनीक के इस्तेमाल में भी टीम अन्ना सरकार से कई कदम आगे है. आंदोलन के बारे में पल पल की जानकारी देने के लिए अन्ना की टीम ने एक कॉल सेंटर बनाया. इंडिया अंगेस्ट करप्शन नाम की वेबसाइट तैयार की जिसको हर पल अपडेट किया जाता है. आंदोलन से जुड़ी हर खबर इसके जरिए लोगों तक पहुंचाई जाती है. मोबाइल मेसेज के जरिए भी आंदोलन को पूरे देश में फैलाया गया.

वालंटियर्स की एक पूरी फौज है टीम अन्ना के पास जो चौबीसों घंटे फोन पर आंदोलन के बारे में जानकारी देने के लिए तैयार रहती है. इतना ही नहीं टीम अन्ना ने अपना संदेश लोगों तक पहुंचाने के लिए रिएलिटी शोज का भी इस्तेमाल किया. साफ है कि अन्ना की टीम मीडिया मैनेजमेंट से लेकर सूचनाओं के प्रचार और जनमत बनाने में हर मामले में सरकार पर बीस साबित हुई है.

सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य को एक चाणक्य ने नंदवंश का नाश करके राजा बना दिया था. अब सोचिए अन्ना के साथ हैं 5 चाणक्य. ऐसे में अन्ना के आंदोलन का मज़बूत होना लाज़िमी टीम अन्नाहै. आइए जानें मनीष सिसौदिया के बारे में. टीम अन्ना के पांचवें चाणक्य हैं मनीष सिसौदिया. पेशे से पत्रकार रह चुके सिसौदिया, समझते हैं कि कैसे टीवी पर छाया जा सकता है. अन्ना के फैसलों में सिसौदिया भी शामिल रहते हैं. भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार अन्ना के सामने ऐसे झुक जाएगी ये खुद सरकार को भी गुमान नहीं होगा और इसकी वजह है टीम अन्ना. जी हां सिविल सोसायटी से एक और शख्स जुड़ा है जो मीडिया की नब्ज़ को अच्छे से जानता है और उसका नाम है मनीष सिसौदिया.

अन्ना के फैसलों में सिसौदिया का भी अहम रोल होता है. आज अन्ना का आंदोलन मीडिया में छाया हुआ है तो शायद उसकी वजह मनीष सिसोदिया ही हैं क्योंकि मनीष सिसौदिया एक टीवी पत्रकार रह चुके हैं और टीवी पर छाए रहने के गुर उनसे बेहतर अन्ना को कौन बता सकता है? मनीष सिसौदिया आरटीआई, यानी राइट टू इनफॉर्मेशन से जुड़े हुए हैं. सरकारी कार्यप्रणाली में खुलापन और पारदर्शिता लाने के लिए 2005 में इस अधीनियम को बनाया गया था. आरटीआई लोकतांत्रिक संस्थानों को मजबूत बनाने, करप्शन हटाने, जनता को अधिकारों से लैस बनाने और देश के विकास में नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने में मील का पत्थर साबित हुआ.

मनीष सिसौदिया केजरीवाल के साथ परिवर्तन संस्था से भी जुड़े हैं यानी भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए कब क्या करना है और खास कर मीडिया में कैसे बने रहना है ये गुर सिसौदिया को ठीक से पता है और ऐसे में अन्ना और आंदोलन कैसे बने रहें सुर्खियों में इसके पीछे सिसौदिया के सलाह की अनदेखी नहीं की जा सकती. साभार : आजतक


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