शबाना आजमी से सबक सीखें सेलीब्रिटी और सरकारें

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आजमगढ़ : मशहूर शायर कैफी आजमी अपने अन्तिम दिनों में मिजवां गांव में शिक्षा व्यवस्था को लेकर काफी परेशान रहा करते थे, लेकिन उनकी बेटी शबाना आजमी ने पिता के इन्तकाल के बाद उनके सपनों को साकार किया और गांव में लड़कियों के लिए शिक्षा केन्द्र, कम्प्यूटर शिक्षा और कढ़ाई सिलाई के साथ ही चिकनकारी सेन्टर की स्थापना की।

शबाना के प्रयास से ही चिकनकारी सेन्टर से वर्तमान समय में देश के मशहूर फैशन डिजाइनर अब आर्डर पर कपड़े तैयार कराते हैं। परन्‍तु शबाना इतने पर ही रूकने को तैयार नहीं हैं। वो अपने गांव की बालिकाओं के उन्नयन के लिए कितनी गंभीर हैं यह तब पता चला जब इस बार उन्होंने एक अनोखी व अत्याधुनिक प्रणाली का इस्तेमाल कर लड़कियों को बेहतर अंग्रेजी सिखाने का बीड़ा उठाया है। यह प्रयास प्रदेश में एकदम अनूठा है जिसमें अमेरिका की संस्था द्वारा मिजवां की छात्राओं को इण्टरनेट की स्काइप आनलाइन वीडियो सेवा द्वारा अंग्रेजी बोलने व लिखने की शिक्षा दी जाएगी। शबाना ने खुद इस सेवा का प्रदर्शन किया।

शबाना बताती हैं कि जब उन्होंने यह महसूस किया कि सारी कोशिशों के बावजूद अंग्रेजी इस क्षेत्र के लड़के-लड़कियों के बेहतर भविष्य में बाधक बन रही है तो इसके लिए उन्होंने प्रयास किया और वालन्टियर आफ टीचर्स, जिसे अमेरिका की एन फाउन्डेशन चलाती है, की मदद ली और मिजवां गांव में अब इण्टरएक्टिव टेलीविजन विधि के माध्यम से अंग्रेजी सीखने के केन्द्र की स्थापना की गयी। अब गांव के बच्चे आडियो-वीडियो की इस विधि के माध्यम से अंग्रेजी बोलना सीख सकेंगे, जिससे उनका भविष्य बेहतर बन सकेगा। हम तो यही कहेंगे कि लाखों करोड़ों खर्च कर कर्मचारियों की पूरी सेना लगा कर जो काम सरकार नहीं कर पा रही है, उसे आजमगढ़ के मिजवां और यहां की बेटी शबाना आजमी से सबक ले कुछ तो प्रयास करना ही चाहिए।

देवव्रत श्रीवास्‍तव

संपादक

आजमगढ़ लाइव न्‍यूज पेपर


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