गुणसूत्र बदलने से बढ़ रहीं बीमारियां

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पोहरेमहाराष्ट्र की उपराजधानी नागपुर में 14 टन जहरीला चीनी लहसुन जब्त होना हमारे खोखले हो रहे भ्रष्ट तंत्र का प्रतीक है. यह कितने आश्चर्य की बात है कि चीनी लहसुन बिना किसी रुकावट के नागपुर पहुंच जाता है, जबकि कृषि मंत्रालय ने इसके आयात पर प्रतिबंध लगाया हुआ है. वस्तुतः चीनी लहसुन ‘जेनेटिक’ है. कंद-मूल, फल-फूलों को जेनेटिक करने अर्थात उनके गुणसूत्र बदलने से ही आजकल बीमारियां बढ़ रही हैं.

चीन में जो लहसुन पैदा होता है, वह जेनेटिक ही होता है. इसे खाने से एंबीसिया एलिया नामक वायरस के संक्रमण का खतरा बना रहता है. फिर लहसुन ही क्यों, आजकल लौकी, जामुन, गोभी आदि फल व सब्जियां भी मॉडीफाइड आ रही हैं. अनेक बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने इन सब्जियों-फलों के  कुदरती गुणसूत्र नष्ट कर उनकी ज्यादा फसलें प्राप्त करने के उद्देश्य से उन्हें ‘जेनेटिक’ बना दिया है. इसी कारण ये वायरस मानव शरीर को नुकसान पहुंचा रहे हैं.

कुदरत ने हजारों वर्षों से ‘जीन’ बना रखा है. काले रंग के आदमी का पुत्र काला ही होता है. किसी ब्राह्मण या मारवाड़ी का पुत्र भी ब्राह्मण या मारवाड़ी (व्यापार) कर्म ही करता है. यह उसके ‘जीन’ का असर होता है. किन्तु आजकल साइंस के चमत्कार के नाम पर अमानवीय एवं अप्राकृतिक प्रयोग कर कुदरती गुणसूत्र नष्ट किए जाने का पाप धड़ल्ले से किया जा रहा है. गुणसूत्र बदलने के कारण ही मानव जीवन में बीमारियां धड़ल्ले से बढ़ रही हैं.

बीटी बैंगन, बीटी कपास का उदाहरण सामने है. बीटी कपास के कारण किसानों का नुकसान हुआ है. उसी तरह जब बीटी बैंगन लाया गया, तो उसका पुरजोर विरोध किया गया. पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश पूरे भारत में घूमे और आखिरकार बीटी बैंगन की किस्म भारत में नहीं आ पायी. अन्यथा भारत में नई-नई प्रकार की बीमारियों का तांता लग जाता. जरूरत है जेनेटिक फसलों को रोकने की, तभी भारत में मानव जीवन स्वस्थ व तंदुरुस्त रह पाएगा.

लेखक प्रकाश पोहरे देशोन्‍नति ग्रुप के चेयरमैन और प्रधान संपादक हैं.


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