कंडोम बेचना है तो अराजक सेक्स का दर्शन फैलाना बहुत जरूरी है बॉस

E-mail Print PDF

: कंडोम कंपनी के सेक्स सर्वे के निहितार्थ : कैट-सल्लू के साथ सेक्स करने की क्यों है ख्वाहिश : गज़ब अंतरविरोधों भरी दुनिया है. जनता के लिए नियम कानून अलग और धनपशुओं के लिए अलग. इसीलिए तो एक धनपशु सैकड़ों लड़कियों के साथ सेक्स करने के बाद भी पब्लिक फीगर बना रहता है और एक बेचारा गांव से आया कोई नौजवान या कोई शहरी माडर्न मिडिल क्लास टीनएज किसी एक छोकरी पर मर मिटने के जुर्म में जेल की हवा खाने लगता है.

क्योंकि वो छोकरी को पैसे से नहीं, दिल से चाहता था और छोकरी को दिल नहीं, पैसा चाहिए था, सो उसकी चाहत को अपराध घोषित कर दिया. यहां हम साफ कर दें कि छोकरी का मतलब सिर्फ उन लड़कियों से है जो अपना देह बेचती हैं, पैसे वालों को, पैसे के लिए, और किसी गरीब को प्यार के इजहार के बदले थप्पड़ लगा देती हैं क्योंकि वे माडर्न कालगर्ल होती हैं जिन्हें ऐशो-आराम भरी जिंदगी चाहिए, तुरंत, किसी भी कीमत पर. आए दिन ऐसी घटनाएं, खबरें पढ़ने सुनने को मिलती रहती हैं. पर धनपशु के लिए खूबसूरत बालाएं पैसे के दम पर उपलब्ध हैं. कई अभिनेत्रियां लाखों लेकर सेक्स को तैयार रहती हैं, इससे संबंधित स्टिंग भी टीवी चैनलों पर आ चुके हैं.

ये बाजार है और इसका दर्शन भी भरपूर बाजारू है. कंडोम बेचने वाली कंपनियों को शरीफ सेक्स में भरोसा नहीं है. वे यौन उत्तेजना को भड़काने में लगी रहती हैं, वे फटाफट सेक्स, जहां चाहे वहां सेक्स को प्रमोट करती रहती हैं पर उनका एक ही कहना होता है कि कंडोम का इस्तेमाल जरूर करें वरना गड़बड़ हो जाएगा, एड्स हो जाएगा और घुट घुट कर भयानक तरीके से मरेंगे. ध्यान दें, पहले उकसाना, फिर डराना, फिर माल बेचना. कंडोम कंपनियों में बड़ी बेचैनी है. भारत की शराफत उन्हें रास नहीं आ रही क्योंकि लोग धड़ाधड़ कंडोम नहीं खरीदते. पर अब जमाना बदल रहा है.

नई पीढ़ी पूरी बाजारू ट्रेनिंग लेकर मैदान में आ चुकी है. शराफत को वो समाजवादी दौर, नैतिकता का वो गांधीवादी दौर जाने कबका खत्म हो गया. जिनमें कुछ बचा है तो वो जीवन के उत्तरार्ध में पहुंचे हुए हैं, उनके लिए यौनेच्छा शांत करने से ज्यादा जरूरी गृहस्थी को बचाना, बनाना व बढ़ाना है. सो, कंडोम कंपनियों की युवाओं के बीच चांदी हो रही है. वे अपने सर्वे से नौजवानों के दिमाग में यह बिठाने में सफल हो चुकी हैं कि चाहे जिसके साथ सेक्स करो, कोई गलत नहीं है, बस कंडोम साथ रखो. नौजवान मन ही मन कैटरीना कैफ से सेक्स करने लगते हैं. युवतियां आंख बंद कर सलमान खान को बाहों में जकड़ रही होती हैं. अभी के पहले ऐसे खयाल दिमाग में आने पर युवक-युवती व इनके मां-पिता इसे भटकाव मानते थे, और मन को बुरी चीजों से हटाकर अच्छे कामों में लगाने के बारे में सोचते थे, वह एक एक्स्ट्रीम था जहां सेक्स पर सोचना गुनाह था, जहां सेक्स को जीवन का हिस्सा मानना गुनाह था, तभी तो देहातों में कई ऐसे किस्से होते हैं कि रात सबके सोने के बाद पुरुष घरवाली के घर में घुसता था और सबके जगने के पहले निकल भागता था, जैसे कुछ हुआ ही न हो और घर वाले भी सब जान के इस दर्दनाक दर्शन से अनजान बने रहते थे.

कम से कम अब मां-पिता यह कबूल तो करने लगे हैं कि बेटा का शादी हुआ है तो वह रात में अपनी पत्नी के साथ ही सोएगा. पर अब जो नई एक्स्ट्रीम डेवलप हो रही है, जो यूरोप में लोप की तरफ है, क्योंकि वहां देह में अब किसी का दिल नहीं लगता, स्त्री देह और पुरुष देह, दोनों ने एक दूसरे की हदें जान ली हैं या बचपन से जान लेते हैं, सो, कोई रस, कोई इच्छा, कोई लालसा देह को लेकर नहीं बची होती है पर यहां तो देह के लिए बचवा से लेकर बुढवा तक पगलाए रहते हैं क्योंकि देह का दर्शन बाजार तेजी से फैला रहा है ताकि उसके देह से संबंधित सारे माल बिकें, सेक्सी मोबाइल से लेकर सेक्सी परफ्यूम तक, कंडोम से लेकर वियाग्रा तक.

इस नए माहौल में, जहां कंडोम कंपनियां सेक्स सर्वे कराकर बताती हैं कि महिलाएं अधेड़ माल्या से लेकर सलमान व धोनी तक से सेक्स कराने को आतुर हैं और पुरुष कैटरीना से लेकर बिपाशा तक से संबंध बनाने को इच्छुक हैं, वहां अब पिता के साथ बेटा भी आंखें बंद कर कैटरीना के बारे में सोच रहा होता है और मां के साथ बेटी भी सल्लू के मसल्स के जरिए उसके शरीर के हर हिस्से का नाप-तौल कर रही होती हैं. तो अब वह दीवार टूट चुकी है जिसे हम श्रेष्ठ भारतीय सभ्यता और संस्कृति कहकर गर्वान्वित हुआ करते थे.

कम से कम शहरों में तो टूट ही गई है और देहातों में भी वर्जनाओं के सामूहिक विसर्जन का उत्सव जोरों पर चल रहा है. कंडोम कंपनी के सर्वे को पढ़िए, संभव है पहले ही पढ़ चुके होंगे, क्योंकि इसे ज्यादातर अखबारों, पत्रिकाओं और पोर्टलों ने प्रकाशित किया है, क्योंकि कंडोम का विज्ञापन बहुत रेवेन्यू देता है सभी को. इस खबर को पढ़ने के बाद ये जरूर सोचें कि इस खबर को कितने शातिर तरीके से प्लांट कराया गया है क्योंकि इस प्रायोजित खबर से कंडोम के बाजार में भरपूर उछाल आएगा और आपकी सुसुप्त इच्छाओं में हवाई जहाज वाले सेक्सी पंख लग जाएंगे.

खबर इस प्रकार है...

''मुंबई। कैटरीना कैफ का हॉट और सेक्सी अंदाज यदि बॉलीवुड में अपने जलवे बिखेर रहा है तो उनके एक्स ब्वॉयफ्रैंड सलमान खान के "किलर लुक" का भी क्रेज कम नहीं हुआ है। शायद यही कारण है कि देश के अधिकतर मर्द और औरतें इन दोनों स्टार्स के साथ सेक्स करने की ख्वाहिश रखते हैं। हाल ही में एक मशहूर कंडोम कंपनी ने एक सर्वे कराया जिसमें लोगों से पूछा गया था कि कि वह किस प्रसिद्ध हस्ती के साथ सेक्स करने की इच्छा रखते हैं तो अधिकतर मर्दो ने कैटरीना कैफ का नाम लिया जबकि महिलाओं की जुबां पर सलमान खान का नाम था। कंपनी ने भारत के सात शहरों में 18-45 आयु वर्ग के लोगों के बीच यह सर्वे किया। इनसे पूछा गया था कि खेल, राजनीति, ग्लैमर, बिजनेस से जुड़ी मशहूर हस्तियों में किसे अपना सेक्स पार्टनर बनाना चाहेंगे। ज्यादातर पुरूषों ने कैट को वोट दिया जबकि महिलाओं ने सलमान के साथ हमबिस्तर होने की इच्छा जताई। शादीशुदा होने के बावजूद भी ऎश्वर्या राय दूसरे पायदान पर हैं। बंगाला बाला बिपाशा बासु भी दूसरे नंबर पर रहीं। टेनिस सनसनी सानिया मिर्जा, दीपिका पादुकोण, सोनम कपूर, आईटम गर्ल राखी सावंत और बैडमिन्टन चैम्पियन सायना नेहवाल को भी वोट दिए गए हैं। सलमान पर मर मिटने वाली लड़कियों ने रणबीर कपूर को दूसरे नंबर पर रखा। किंग खान शाहरूख खान तीसरे और क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी चौथे नंबर पर रहे। इन अभिनेताओं के अलावा महिलाओं की रितिक रौशन, राहुल गांधी, इमरान हाशमी, सैफ अली खान और इमरान खान व युवराज सिंह को भी सेक्स पार्टनर बनाने की ख्वाहिश है। बॉक्सर विजेन्दर सिंह, शूटर अभिनव बिन्द्रा, क्रिकेटर विराट कोहली और जूनियर सिद्धार्थ माल्या भी इस सूची में है।''

पढ़ लिया आपने. कापी एडिटर ने अपने शब्दों व कापी के ज्ञान को उड़ेल कर रख दिया है इस खबर को लिखने में. चलिए, इस कापी के दूसरे पक्ष के बारे में कुछ और बात कर लेते हैं. बाजार गड़बड़ियां फैला रहा है मुनाफा कमाने के लिए, माल बेचने के लिए पर कुछ अच्छे काम भी अनजाने में कर दे रहा है. जैसे सेक्स को सर्वाधिक गोपनीय विषय से आम बातचीत का विषय बना रहा है. लेकिन बस इसकी दशा दिशा गड़बड़ है. सेक्स को सनसनी की तरह परोसना खराब है. जानवर और मनुष्य की जो बेसिक इंस्टिक्ट है, उसमें खाना-पीना व सेक्स भी शामिल है. जानवर सेक्स को लेकर संवेदनशील नहीं रहता, समय पर ही वे सेक्सातुर होते हैं. पर मनुष्य ने जो माहौल सृजित किया है उसमें अपने अतिरिक्त दिमागी बोध (एएमसी भी कह सकते हैं यानि एडिशनल माइंड कानशसनेस) के कारण हर पल सेक्सातुर रहता है, जहां अकेला हुआ कि सेक्सातुर हुआ. ये जो मनुष्य के पास एएमसी है, इसका इस्तेमाल सिर्फ सेक्स जगाने में होता रहता है, सेक्स से मुक्त होने में नहीं, यही कारण है कि कोई साधु बाबा अपने लिंग से कहीं पत्थर को तोड़कर काम से मुक्ति पाने का रास्ता तलाश रहे होते हैं तो कोई चोरी-छिपे अपनी शिष्याओं को कुंठित वासना का शिकार बना रहा होता है.

बाजार ने सेक्स को अल्टीमेट और चरम चीज बना दिया है, कुछ ऐसे जैसे इसी को खाओ, पिओ, पहनो, ओढ़ो और बिछाओ. वरना पिछड़े माने जाओगे. बेचारे युगल, आखिर दिन-रात, दिन-रात में कोई कितनी बार सेक्स कर सकता है. जिंदगी में और भी ग़म है सेक्स के सिवा. या सेक्स के अलावा बहुत सारे काम है दुनिया में. लेकिन बाजार राजी नहीं है. वह कह रहा है कि सेक्स से फुर्सत पाओ तो सेक्सी खाना खाओ, सेक्सी कपड़े पहने, सेक्सी नृत्य करो, सेक्सी पार्टीज में इंज्वाय करो, सेक्सी परफ्यूम लगाओ, सेक्सी बातें करो, सेक्सी मोबाइल खरीदो, सेक्सी चैट करो, सेक्सी सैर करो... मतलब सेक्स न हुआ आलू हुआ जिसे हर सब्जी, हर पकवान में शामिल कर लिया. अब जब सब कुछ सेक्सी हो रहा हो तो सेक्स पर बतियाने से शरम कैसा. सेक्स के आदि अंत की कथा का वर्णन अभिभावकों को अपने किशोर बेटों से कर देना चाहिए ताकि बेटा इस रहस्यमयी सेक्सी संसार के तिलिस्म में न बिला जाए. अगर ऐसा न करेंगे तो संभव है कि आप अकेले में कैटरीन के साथ सोए हों और उधर बेटा भी कैटरीना के कपड़े उतार रहा हो, और दोनों ही इस प्रक्रिया में कंडोम की दुकान पर पहुंच डिब्बी पाकेट में डाल अपनी-अपनी लोकल कैटरीनाओं की तलाश में लग जाएं. जय हो.

यशवंत सिंह

एडिटर

भड़ास4मीडिया


AddThis