जैसे मैं तुम्हारे रिवाल्वर को हाथ नहीं लगा सकता वैसे ही तुम मेरे कैमरे को नहीं छू सकते

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आरोपी हवलदार: फोटो खींचने पर हवलदार ने दी कैमरा तोड़ने की धमकी तो फोटोग्राफर ने दिया करारा जवाब : बुधवार की रात चंडीगढ़ में सेक्टर १९-२७ के लाइट प्वाइंट के पास कुछ पुलिसकर्मियों की कमांडोज के साथ बहस और लगभग हाथापाई की नौबत आ गई. इसे देखकर मान्यता प्राप्त छायाकार ने फोटो लेने के लिए जैसे ही कैमरा चालू किया, एक पुलिसकर्मी ने उसे ऐसा करने से रोका.

छायाकार ने फोटो ले लिया तो पुलिसकर्मी आपे से बाहर हो गया और उसने छायाकार को धमकाया कि तुम फोटो नहीं खींच सकते. फोटोग्राफर ने कहा कि क्यों, फोटो खींचना क्या कोई जुर्म है, वह अखबार का मान्यता प्राप्त फोटोग्राफर है और फोटो खींचना उसका काम है. उसके बाद उस पुलिसकर्मी ने फोटोग्राफर संजय पाहवा से हाथापाई की और उन्हें धक्का देने की कोशिश की. हवलदार स्तर के उस पुलिसकर्मी ने जब कैमरे को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया तो फोटोग्राफर ने कहा कि जिस तरह से कोई आपके हथियार (रिवाल्वर) को हाथ नहीं लगा सकता कि उसी तरह से आप भी मेरे कैमरे को हाथ नहीं लगा सकते. इस दौरान छह-सात पुलिसकर्मियों ने फोटोग्राफर पाहवा को घेर लिया. बाद में उन्हें समझाने-बुझाने का चंडीगढ़ पुलिस और कमांडोज के बीच गरमागरम बहस की तस्वीर लेने के कारण ही फोटोग्राफर पुलिस वालों के निशाने पर आ गयाप्रयास किया गया. पाहवा ने १०० नंबर फोन कर मामले की सूचना दी.

इस दौरान हवलदार मौके से निकल गया. पुलिस ने पाहवा के बताए हुलिए और पद के हिसाब से उसकी पहचान शुरू कर दी है. चौबीस घंटे बाद उसका कोई पता नहीं चला है, ऐसा पुलिस अधिकारियों का कहना है. पाहवा ने बदतमीजी करने वाले हवलदार को कैमरे में कैद कर लिया है लेकिन चंडीगढ़ पुलिस के आला अधिकारियों को अभी उसका पता नहीं चला है. गौरतलब है कि भारत-पाक मैच खत्म होने के बाद इसी रास्ते से वीवीआईपी लोगों को गुजरना था. यहां बहुत से अखबारों के पत्रकार और फोटोग्राफर थे. पाहवा ने एसएसपी नौनिहाल सिंह और एसपी एचएस दून से संपर्क करने का कई बार प्रयास किया लेकिन बातचीत नहीं हो सकी. संबंधित थाने के एसएचओ ने भरोसा दिलाया है कि जल्द ही हवलदार का पता लगा लिया जाएगा. गौरतलब है कि इससे पहले देशसेवक अखबार के क्राइम रिपोर्टर अमन लूना और दैनिक जागरण के बीडी पुजारी को भी पुलिसकर्मियों ने उनकी औकात दिखाने की कोशिश की.

चंडीगढ़ से महेंद्र सिंह राठौर की रिपोर्ट


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