नरेंद्र यादव का स्‍वागत करना पड़ा महंगा, पुलिस एसोसिएशन के उपाध्‍यक्ष सुबोध यादव निलंबित

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सुबोध यादवजैसी की आशंका जताई जा रही थी कि यूपी पुलिस ऐसोसिएशन के पदाधिकारियों की हर गतिविधि पर रखी जा रही है खुफिया विभाग की नजर। जी हां शंका बिल्कुल ही सच साबित हुई है। अपने संगठन के प्रदेश अध्यक्ष का स्वागत सत्कार करना पड़ गया है महंगा संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष सुबोध यादव को।

अपने गृह जिले इटावा संगठन को मजूबत करने के इरादे से आये प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र सिंह यादव का इटावा रेलवे स्टेशन पर स्वागत करना और प्रेसवार्ता करवाना संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष सुबोध यादव के लिये मुसीबत का सबब बन गया है। नरेंद्र यादव के स्वागत कर सजा अब किस पुलिस कर्मी के गले में पडे़गी यह तो कहा नहीं जा सकता है, लेकिन खुफिया विभाग ने स्वागत के दौरान की जो तस्वीरें राजधानी लखनऊ में बैठे आला अफसरों को भेजी है उसी आधार पर कार्रवाई की जायेगी। जैसा कि प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र सिंह यादव ने इटावा में ही पत्रकारों के सामने आशंका जताई थी कि उनके संगठन को बेईमान आईपीएस अफसर पंसद नहीं कर रहे हैं, इसी के चलते संगठन के विस्तार मे भी बाधा डाल रहे हैं और यह शंका उस समय पूरी तरह से सच साबित हो गई जब सुबोध यादव को निलंबित करने के संदर्भ में फोन किया गया।

सुबोध यादव की फिलहाल गोरखपुर जीआरपी लाइन मे तैनाती है, सुबोध यादव यूपी पुलिस वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्‍यक्ष हैं। इटावा मे अपने संगठन के प्रदेश अधयक्ष का स्वागत करने के एवज में उन्हें निलंबित किया गया है ऐसा सुबोध यादव का कहना है और यही कारण भी निलंबन के लिये एक बड़ा आधार माना जा रहा है।

यहां पर इस बात का जिक्र बेहद जरूरी हो जाता है कि अपने संगठन को ताकत देने के इरादे से पूरे राज्य भर के दौर पर निकले नरेंद्र की हर गतिविधि पर नजर रखने के लिये खुफिया पुलिस के एक नहीं दर्जन भर के करीब कर्मियों को आला अफसरों के इशारे पर लगाया गया। इटावा मे नरेंद्र किस से मिले, क्यों मिले, क्या किया इस बात को संकलित करके खुफिया विभाग ने अपने-अपने तरीके से आला अफसरों के पास जाहिर है भेजा होगा। यहां तक कि खुफिया विभाग के लोगों ने नरेंद्र के साथ आये ऐसोसिएशन के पदाधिकारियों की प्रेस वार्ता के दौरान फोटोग्राफी भी की है।

अब इस बात को और अधिक बल मिलता हुआ दिख रहा है कि नरेंद्र सिंह यादव ने पहले ही यह शंका जता दी थी कि उनके पदाधिकारियों को संगठन का विस्तार करने में आईपीएस अफसरों की ओर से रोडे़ लगाये जा रहे हैं और अगर आईपीएस अफसर कामयाब नहीं हो पा रहे हैं तो बिना किसी कारण बताए तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की प्रक्रिया अपनाये हुये हैं। इसी प्रकिया का सबसे बड़ा और ताजा नमूना देखने को मिला है सुबोध के निलंबन के रूप में।

सुबोध यादव ने रविवार को अपने खिलाफ अमल में लाई गई निलंबन की कार्रवाई के बारे में इटावा में जानकारी देते हुये बताया कि फरवरी 2010 मे थाना जीआरपी मथुरा जंक्शन से इटावा जीआरपी में पोस्टिंग की गई थी। साल 2011 के 15 जनवरी को यूपी पुलिस वेलफेयर ऐसोसिएशन के गठन की खबरें विभिन्न अखबारों में आना शुरू हो गई थी,  मुझे संगठन में प्रदेश उपाध्‍यक्ष का पद दिया गया। इसी बीच 20 जनवरी को अपर पुलिस महानिदेशक रेलवे एके जैन ने मेरा ईएल अवकाश, जो 30 दिनी स्वीकृत था, को भी बिना किसी पूर्व सूचना दिये बीच मे निरस्त कर जीआरपी गोरखपुर के लिये कार्यमुक्त कर दिया, लेकिन बाद में मिले सरकारी दस्तावेजों के आधार पर पता चला कि गोरखपुर के लिये तबादला कर दिया गया है, जब कि इस समय बीमारी के कारण मैंने ईएल अवकाश लेने के बाद घर पर रह कर उपचार करा रहा था।

सुबोध को मात्र 24 घंटे के भीतर ही गोरखपुर जा कर आमद कराने का आदेश दिया गया जब कि शासनादेश है कि एक सप्ताह का वक्त आमद के लिये मिलता है, ऐसे में सुबोध के खिलाफ आईपीएस अफसरों का उत्पीड़नात्मक रवैया यहीं से परीलक्षित हो गया था। 3 फरवरी को राजकीय रेलवे पुलिस गोरखपुर के एसपी अमिताभ यश की ओर से निलंबित कर दिया गया है। अमिताभ यश के पास मौजूदा दौर में लखनऊ राजकीय रेलवे पुलिस अधीक्षक का मूल चार्ज है, जब कि गोरखपुर अनुभाग का अतिरिक्त प्रभार है।

राजकीय रेलवे पुलिस गोरखपुर अनुभाग के एसपी अमिताभ यश की ओर से 22 मार्च को पत्र सख्यां एस-29/2011 सुबोध को गुण दोष पर विचार किये बिना तत्काल प्रभाव से बहाल कर दिया गया। अब 2 मार्च को एक बार फिर से सुबोध को निलंबित कर दिया गया है। इस निंलबन की खबर गोरखपुर जीआरपी लाइन के एक दीवान रामशीश यादव ने मोबाइल फोन के जरिये दी है, जिसमें कहा गया है कि अभिताभ यश की ओर से निलंबन की कार्रवाई अमल मे लाई गई है और आदेश प्रति दीवान ट्रेन के माध्यम से लेकर इटावा के लिये चल दिया है।

सुबोध को पुलिस सेवा मे 16 साल काम करते हुये हो गये हैं और अपने हक की बात कहना क्या बुरा है? सुबोध का आरोप है कि आईपीएस अफसरों की घोटालेबाजी को लेकर आरटीआई का इस्तेमाल करना और पुलिस संगठन में काम करना आईपीएस अफसरों को रास नहीं आ रहा है इसी लिये निलंबन जैसी कार्रवाई करके उत्पीड़न करने में लग गये हैं।

सुबोध का कहना है कि अपने खिलाफ की गई निलंबन की कार्रवाई को लेकर उच्च न्यायालय की शरण लेंगे ताकि आईपीएस अफसरों को बेनकाब किया जा सके। सुबोध का कहना है कि इस तरह के निलंबन से मेरे उपर कोई फर्क नहीं पडे़गा क्यों कि मैं 4 लाख पुलिस कर्मियों और उनके परिवार को हर हाल में इन भ्रष्ट बेईमान और तानाशाह आईपीएस अफसरों  से बचाने और इनको सबक सिखाने के लिये तैयार हूं।

संगठन के उपाध्यक्ष सुबोध यादव के निलंबन को लेकर प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र सिंह यादव का कहना है कि 2 अप्रैल को मेरा इटावा संगठन के विस्तार हेतु दौरा था। इसी दौरान इटावा रेलवे स्टेशन पर स्वागत सत्कार करना किस गुनाह की श्रेणी मे आता है, जो सुबोध यादव का निलंबन कर दिया गया है। नरेंद्र सिंह का कहना है कि मैं पहले ही शंका जता चुका हूं कि बेईमान आईपीएस अफसरों को यूपी पुलिस वेलफेयर एसोसिएशन नामक संगठन का गठन और विस्तार किसी भी सूरत मे पंसद नही आ रहा है, इसी वजह से इस तरह की दमनात्मक कार्यवाही अमल मे लाई जा रही है।

नरेंद्र सिंह का कहना है कि यह सब कार्रवाई स्पेशल डीजी बृजलाल और एडीजी रेलवे एके जैन के इशारे पर की जा रही है जब कि उच्च न्यायालय ने साफ निर्देशित कर रखा है कि यूपी पुलिस वेलफेयर एसोसिएशन के किसी  भी पदाधिकारी का उत्पीड़न किसी भी स्तर पर ना किया जाये, लेकिन यह सब कुछ करके बेईमान अफसर उच्च न्यायालय की अवहेलना करने मे लगे हुये हैं। जाहिर है ऐसे में यह अफसर कटघरे में खडे़ हो गये हैं।

लेखक दिनेश शाक्य सहारा समय उत्तर प्रदेश उत्तराखंड न्यूज चैनल के इटावा में रिपोर्टर हैं. उनसे संपर्क This e-mail address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it के जरिए किया जा सकता है.


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