एक एसपी ने होमगार्डों को बना डाला सफाई कर्मचारी

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कहावत है धोबी का कुछ उखाड़ नहीं पाये और गधे का कान उमेठ दिया। जी हां, बिल्कुल ऐसा ही हो रहा है इस समय उत्तर प्रदेश के पुलिस अमले में। इस कहावत का यहां पर कोई मतलब नहीं है लेकिन इसी कहावत के जरिये पुलिस अमले के सबसे निचले साथी होमगार्ड का दर्द उकेरने की कोशिश की जा रही है। जहां पर आला पुलिस अफसरान ऐसे ऐसे फरमान सुना कर के अपने मातहतों से ऐसे काम ले रहे हैं जो उनके तो हैं ही नहीं, खुद आदेश देने वाले आला अफसरान भी किसी भी सूरत में नहीं करेंगे।

पुलिस एक ऐसा नाम है जिसे अमला कहा जाता है पुलिस अमले में हर कोई कर्मी अपने आप में अहम माना जाता है लेकिन ना जाने क्यों विभाग के आला अफसरान हमेशा से छोटे कर्मियों का किसी ना किसी बाबत उत्पीड़न करते ही रहते हैं, चाहे अपने अधीनस्थों को सरेआम जलील करके या फिर उनका काम ना होते हुये भी उनसे वो काम कराना, जो उनकी सेवा नियमावली में आता भी ना हो।

पुलिस के साथ सुरक्षा में कंधे से कंधा मिलाकर कार्य के लिए तैनात किए जाने वाले होमगार्डों की कितनी खराब हालत हो सकती है? जरा सोचिए!  एक पुलिस अधिकारी के यहां उनसे घर के पोछा होमगार्ड लगवाने से लेकर टायलेट तक साफ कराने का कार्य लिया जा रहा है। यह कार्य करना उनके लिए किस तरह अपमानजनक होता है इसका वह बयान भी नहीं कर पा रहे हैं।

यह काम असल में एक सफाई कर्मी का है, लेकिन जिस होमगार्ड को पुलिस अफसर की सुरक्षा में तैनात किया जाता है वो अफसर उन होमगार्डों से अपने सरकारी आवास पर करवाता है फर्श की सफाई। इतना ही नहीं फर्श की सफाई तक तो कुछ ठीक भी कह सकते हैं लेकिन फिर अफसर का आदेश हुआ कि उसका शौचालय होमगार्ड ही साफ करेंगे, मजबूरी मे डयूटी पर तैनात होमगार्ड और क्या करते करने लगे शौचालय साफ लेकिन भला हो दैनिक जागरण अखबार के फोटोग्राफर का, उसने होमगार्डों को फर्श और शौचालय साफ करते हुये कर लिया है कैमरे में कैद।

बतौर सुरक्षा गार्ड तैनात किये गये होमगार्डो से सफाई कर्मचारियों का काम लेने वाले यह अफसर हैं मेरठ के एसपी क्राइम शफीक अहमद। मंगलवार दोपहर उनके सरकारी आवास पर जो नजारा था, वह किसी को भी झकझोर देने वाला था। हाथों में वाइपर और पोछा लिए तीन होमगार्ड घर के बाहर का फर्श साफ करने में जुटे थे। जैसे ही कैमरे की फ्लैश चमकी वह सकपकाए। कार्य में लगे होमगार्ड कुछ कहते, उनके फोटो कैमरे में कैद हो चुके थे।

इस बीच दो होमगार्ड एसपी साहब का शौचालय साफ करने में लगे थे। उन्होंने भी कैमरा देखा तो शर्म के मारे अपना मुंह दूसरी ओर कर लिया। सफाईकर्मी की तरह से काम कर रहे होमगार्डो के नाम है रामपाल सिंह गुर्जर, सुधीर जाटव, बाल किशोर जाटव, अनिल जाटव, अनिल कुमार शर्मा, नासिर अली। होमगार्ड से बतौर सफाईकर्मी काम लेने के मामले मे एडीजी एनसीआर गुरूबचनलाल का कहना है कि मुझे इसकी जानकारी अभी नहीं है। फिर भी अगर ऐसा है तो यह मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है। पहले तो सवाल यही है कि आखिर होमगार्ड एसपी के आवास पर क्या कर रहे थे। इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी। आरोपी को किसी भी स्तर पर बख्शा नहीं जाएगा।

डीआईजी जेएन सिंह का कहना है कि मामला बेहद गंभीर है। होमगार्डों से बेगार नहीं करायी जा सकती। जिला होमगार्ड कमांडेंट संजय कुमार का कहना है कि होमगार्ड बटालियन का गठन पुलिस के साथ कंधा से कंधा मिलाकर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए किया गया था। अगर ऐसा हुआ सुबोध यादवहै, तो यह बेहद दुखद है। होमगार्डों से केवल शासकीय कार्य ही लिए जाने चाहिए। इस मामले में जांच कराई जाएगी। उधर जिन एसपी क्राइम के आवास पर होमगार्डो से सफाई कराने का मामला सामने आया है वो किसी भी हालत मे कैमरे या फोन लाइन पर अपनी सफाई देने के लिये सामने नहीं आये हैं,  इससे यही माना जा सकता है कि तस्वीरें जो कुछ कह रही हैं वो सच है, लेकिन नौकरी जाने के डर के मारे पीडि़त होमगार्डों की ओर से अभी कोई शिकायत लिखित तौर पर नहीं की गई है।

पूरे के पूरे मामले के सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस वेलफेयर ऐसोसिएशन के उपाध्‍यक्ष और प्रवक्ता सुबोध यादव ने बेहद गंभीर मामला करार देते हुये तत्काल प्रभाव से ऐसे अफसर के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई अमल मे लाने की बात कही है। उनका कहना है कि यह मामला ऐसे हिटलर अफसर की मानसिकता को उजागर करता है। सुबोध का कहना है कि वे इस मामले को लेकर मानवाधिकार आयोग में शिकायत करेंगे और संगठन हर हाल में अपने पीडित होमगार्ड जवानों की मदद के लिये दिनेशतैयार है।

लेखक दिनेश शाक्य सहारा समय उत्तर प्रदेश उत्तराखंड न्यूज चैनल में इटावा के रिर्पोटर हैं।


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