मुआवजे के लिए लड़ रहा मनवीर तेवतिया अपराधी है!

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प्रशासन के लिए हर वह आदमी अपराधी होता है जो जनता की बात करे और जनता के पक्ष में बोले. कम से कम जनविरोधी शासन के साथ तो ऐसा ही होता है, और यही हाल उस जन विरोधी शासन के हुकुमबरदारों का भी होता है. कुछ ऐसा ही बयान मैंने कल टीवी में और आज अखबारों में मनवीर सिंह तेवतिया के बारे में देखा. मनवीर सिंह तेवतिया कौन हैं और क्या करते हैं, मैं ज्यादा नहीं जानती.

अब से कुछ दिनों पहले तक मैं उनका नाम भी नहीं जानती थी और शायद बाकी और लोग भी उनसे अनभिज्ञ ही रहे होंगे. पर पिछले दिनों जब अलीगढ में किसानों के द्वारा भूमि अधिग्रहण के खिलाफ मोर्चाबंदी की गयी थी और धरना-प्रदर्शन किया था उसमे तेवतिया का नाम बहुत तेजी से उभरा था. यह मालूम हुआ कि तेवतिया एक जाट नेता हैं, जो जनता की बात रख रहे हैं और किसानों को जमीन के लिए ऊँचे से ऊँचा दाम लेने को कह रहे हैं. जब बाकी सारे राजनैतिक दलों ने आनन-फानन में समझौते की बात कही थी तब तेवतिया ही थे जिन्होंने अंत तक जनता को और ज्यादा कीमत के लिए रोके रखा.

मैं समझती हूँ कि यह उचित भी है क्योंकि जहां शासन-प्रशासन कौडियों के मोल किसानों से जमीन खरीद कर उसे करोड़ों-अरबों में बेच रहा है और इस प्रक्रिया में जितना सरकार की जेब में जा रहा है, उससे अधिक सत्ता के तमाम दलालों की जेबों में जा रहा है. ऐसे में किसानों को अपनी जमीन का वाजिब हक मिलना ना सिर्फ न्यायोचित है बल्कि नितांत अनिवार्य भी. मैं यह भी मानती हूँ कि ऐसा नहीं कर के सरकारें आम जनता का पूरी तरह से गला घोंट रही हैं और अपने जनविरोधी चेहरे को ही उजागर कर रही है.

ऐसे में मनवीर तेवतिया का किसानों के साथ खड़ा होना और उसे अधिक कीमत के लिए कहना मेरी निगाह में एक बहुत ही वाजिब बात है और इसकी भूरी-भूरी प्रशंसा होनी चाहिए. लेकिन जाहिर है कि जो कोई सत्ता से अपनी नजदीकी बनाए रखना चाहेगा उसे तेवतिया और उसकी तरह का कोई भी आदमी अच्छा नहीं लगेगा जो जनता को कहे कि अपना हक मांगों और अपनी जमीन की पूरी कीमत लो. उसकी निगाह में तो तेवतिया एक गुंडा, एक अपराधी ही होगा जैसा कल उत्तर प्रदेश के डीजीपी करमवीर सिंह प्रेस वार्ता में लखनऊ में खुलेआम कह रहे थे.

डीजीपी की माने तो इस सारे संघर्ष के लिए मात्र एक आदमी जिम्मेदार है- मनवीर सिंह तेवतिया. उन्होंने यह भी घोषणा की कि तेवतिया को जल्दी ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा. उन्होंने एक और बड़ी मजेदार बात कही- 'नोएडा में हुए संघर्ष से भूमि के मुआवजे का कोई लेना-देना नहीं है.'  जितना अधिक डीजीपी और स्पेशल डीजीपी बृज लाल दो सिपाहियों की मौत से दुखी होंगे, उस से कम दुःख मुझे भी नहीं है. मैं यह बात पूरी तरह मानती हूँ कि ये सिपाही भी उसी माटी के लाल हैं और उसी जमीन से जुड़े हुए हैं जिसे सरकार के लोग दो पैसे में हड़प कर अपनी मुट्ठी गरम करने में लगे हैं. उनका घर भी यहीं आस-पास होगा और आज ये दोनों लोग इन सत्ता में बैठे लोलुप लोगों के कारण बेवजह मारे गए हैं. यानी कि करे कोई और भरे कोई. फिर उनकी मौत पर मुआवजा!

लेकिन इसके साथ हमें यह भी याद रखना पड़ेगा कि किसानों के हितों के संघर्ष को आपराधिक कृत्य समझने वाले से बड़ा अपराधी कोई नहीं होगा. तेवतिया भले कैसा भी आदमी हो या रहा हो, उसके अंदर चाहे जो बात हो पर सामने यह साफ़ दिख रहा है कि वह किसानों को भूमि के सही मुआवजे के लिए खुल कर संघर्ष कर रहा है. जाहिर है ऐसे में वह सत्ता पक्ष के तमाम लोगों के आँखों की किरकिरी तो माना ही जाएगा.

डीजीपी कहते हैं कि तेवतिया विगत कुछ दिनों से किसानों की भूमि अधिग्रहण एवं मुआवजा सम्बन्धी मांगों की आड़ में ग्राम भट्टा में ग्रामीणों को भ्रमित कर रहे थे और यह कि तेवतिया अपने राजनैतिक स्वार्थों के लिए कभी अलीगढ़, कभी आगरा तथा कभी गौतमबुद्ध नगर के किसानों को गुमराह करते रहते हैं. मैं कहती हूँ कि यदि यह बात सौ फीसदी सत्य हो तब भी इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि किसानों को मिला मुआवजा शून्यप्राय है और उन्हें अपनी जमीन के बदले कुछ भी नहीं मिल रहा है.

ऐसे में तेवतिया चाहे जिस भी अंदरूनी भावना से प्रेरित हों, पर किसान उनकी बात तो सुनेंगे ही क्योंकि कम से कम आज के समय तेवतिया उन किसानों के हित की बात तो कर रहे हैं और खुलेआम कर रहे हैं. ऐसे में तेवतिया स्वतः ही निहित स्वार्थों के लिए अपराधी और गुंडा हो गए क्योंकि वे कई सारे प्रभावशाली लोगों के हितों के बाधक जो ठहरे.

डॉ. नूतन ठाकुर

संपादक

पीपल'स फोरम, लखनऊ


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