पुलिसकर्मियों के साथ भेदभाव के खिलाफ डीजीपी को ज्ञापन सौंपा

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: ज्ञापन : पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश, लखनऊ, द्वारा- प्रदेश अध्यक्ष- यूपी पुलिस वेलफेयर एसोसिएशन. 1. अराजपत्रित पुलिस कर्मचारियों की पीपीएस, आईपीएस अधिकारियों की तरह गृह जनपद के बार्डर में नियुक्ति की जाय अन्यथा इनको भी तत्काल बार्डर से हटाया जाय, अगर इनके साथ यह नियम नहीं लागू किया जाता है तो अराजपत्रित कर्मियों को भी वार्डर पर नियुक्त किया जाय, एवं किये गये स्थानान्तरण निरस्त किये जायें।

2. शासनादेश संख्या 600/8-1-86/ दिनांक 11 जुलाई 1986 को महामहिम राज्यपाल महोदय उत्तर प्रदेश ने आंशिक रूप से संशोधन करते हुये शासनादेश संख्या-1 छ प-1-1995 दिनांक 25.03.1995 में संशोधित कर दिया था जिसमें महामहिम राज्यपाल महोदय ने हेड कान्सटेबिल तथा कान्सटेबिल को अपने गृह जनपद में तथा गृह जनपद के समीपवर्ती थानों में तैनात किया जाये को आदेश दिया था जो कि श्रीमान् पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश (तत्कालीन) श्री विक्रम सिंह के दिनांक 27.05.2009 के आदेश से स्पष्ट है।

महामहिम राज्यपाल महोदय के शासनादेश दिनांक 27.05.2009 के आदेश से स्पष्ट है कि महामहिम राज्यपाल महोदय के शासनादेश दिनांक 25.03.1995 का अनुपालन करते हुये पुलिस रेगुलेशन के पैरा-520 में भी संशोधित कर दिया गया है जिसमें स्पष्ट रूप से अंकित है कि कान्स्टेबिल/हेड कान्स्टेबिल का स्थानान्तरण नजदीक से नजदीक किया जाय। 14 वर्षों बाद श्री राजेन्द्र प्रसाद मिश्र विषेश सचिव उत्तर प्रदेश शासन ने अपने आदेश सं 0-3323/6-पु-1-09-71/92 दिनांक-अक्टूबर 2009 में 25.03.1995 के माननीय राज्यपाल महोदय के आदेश को प्रमाणिकता एवं वैधता को संदेहजनक दर्शाते हुए शासनादेश सं. दिनांक 11 जुलाई 1986 को वर्तमान में प्रभावी होने का आदेश किया है एवं अभिलिखित पत्र दिनांक 25.03.1995 को प्रमाणिकता एवं वैधता की जॉच कराने का आदेश पारित किया है।

जब तक महामहिम राज्यपाल महोदय उत्तर प्रदेश के आंशिक संशोधत आदेश को प्रमाणिकता एवं वैधता की जांच से उपरोक्त शासनादेश गलत साबित न हो तब महामहिम राज्यपाल महोदय उ0प्र0 के दिनांक 25.03.1995 के संशोधित आदेश का पालन करते हुए बार्डर जनपदों से किये गये कर्मचारियों के स्थानान्तरण रद्द किये जाये।

3. पुलिस कर्मियों के विरूद्ध की जाने वाली विभागीय कार्यवाहियों में (14-1) नैसर्गिक न्याय के सिद्धान्तों का पालन करते हुए ही विभागीय कार्यवाही की जाय। अधिकारियों द्वारा मनमानीपूर्ण तरीके से कार्यवाही न की जाय। साक्ष्य के आधार पर कार्यवाही की जाय। झूठे साक्ष्य एकत्र कर कार्यवाही न की जाय। दण्ड अपराध के अनुसार दिया जाय व मनमाने तरीके से दण्डित न किया जाय।

4. अनुशासन के नाम पर पुलिस कर्मियों पर किये जा रहे शोषण, अत्याचार एवं भृष्टाचार पर रोक लगायी जाय।

5. पुलिसकर्मियों पर स्थानान्तरण रणनीति एक निर्धारित अवधि को लागू है। उक्त रीति में संशोधन किया जाय कि कर्मचारियों के बच्चों को शिक्षा, दीक्षा का ध्यान देते हुए ही स्थानान्तरण किया जाय। उदाहरण स्वरूप किसी कर्मचारी का बच्चा कक्षा-9 पास का छात्र है उसका स्थानान्तरण उपरान्त उक्त बच्चें दाखिला अन्य जनपद में कक्षा-10 में नहीं हो पाता व उक्त बच्चे का भविष्य खराब होता है। उक्त का ध्यान रखते हुये स्थानान्तरण नीति में कर्मचारी का मत मांगा जाय या शिक्षा नीति में परिवर्तन कराया जाय जिससे कर्मचारियों के बच्चों का भविष्य बर्बाद होने से बच सके।

6. उत्तर प्रदेश शासन गृह (पुलिस)अनुभाग-1 आदेश सं.-सु.आ.-91(1) /6-पु0-1-2010 दिनांक 28 जून, 2010 ने अपने दिनांक 28 जून 2010 को स्थिति स्पष्ट की है कि उत्तर प्रदेश पुलिस संगठन में नियुक्त अराजपत्रित अधिकारियों/कर्मचारियों को माह द्वितीय शनिवार, रविवार व अन्य राजपत्रित अवकाश का उपभोग न कर पाने के एवज में प्रतयेक वर्ष में एक माह का अतिरिक्त वेतन दिये जाने हेतु शासनादेशानुसार मानक निर्धारित किया गया है जबकि एक वर्ष में 52 रविवार, 12 द्वितीय शनिवार एवं 42 राजपत्रित अवकाश कुल 106 दिन का अवकाश पड़ता है। जिसमें केवल 30 दिवस का अतिरिक्त वेतन दिया जाता है। प्रतिवर्ष 76 दिन अराजपत्रित पुलिस, पी0ए0सी0 कर्मियों से बेगार ली जाती है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 23 के तहत किसी भी व्यक्ति से बेगार नहीं करायी जा सकती है।

अतः अराजपत्रित कर्मियों को वर्ष में पड़ने वाले 106 दिन के अवकाश पर काम करने का अतिरिक्त वेतन दिया जाय या 106 दिन अवकाश का उपभोग करने दिया जाय।

अराजपत्रित पुलिस/पी0ए0सी0 के कर्मचारियों को यदि सरकारी आवास नहीं दिया जाता है तो हाउस रेन्ट (किराया) दिया जाय।

दिनांक- 20.05.2011        
नरेन्द्र सिंह यादव
प्रदेश अध्यक्ष
यूपी पुलिस वेलफेयर एसोसिएशन
द्वारा कल्याण संस्थान, उत्तर प्रदेश


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