मुख्यमंत्री निशंक को पत्रकार उमेश कुमार ने दी चुनौती

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umesh kumarनिशंक: जितना परेशान करना हो कर लो, पर एक आंधी आएगी और तेरा सब कुछ उड़ा ले जाएगी : उत्तराखंड की भ्रष्ट सरकार जवाब दे कि क्या भ्रष्टाचार का खुलासा करना अपराध. अगर है तो मैंने ये अपराध किया है. अगर मैंने स्टिंग करके उत्तराखंड राज्य की 56 हाइड्रो परियोजनाओं को लूटने से बचाया है तो यही काम मेरा दोष व मेरा अपराध बना दिया गया है.

मेरे स्टिंग करने और स्टोरी करने के बाद इस राज्य की अरबों रुपये की ऋषिकेश स्थित जमीन बिल्डरों के पास जाने से बची, ये मेरा दोष है. बिना पालिसी के काशीपुर स्थित श्रावंथी गैस प्लांट का आवंटन करने का खुलासा करना मेरा अपराध है. श्रावंथी मामले में मैंने हाई कोर्ट में पीआईएल डाली जिस पर सरकार को नोटिस जारी हुए. ये भी मेरा अपराध है. आस्था के प्रतीक महाकुम्भ में हुए महाघोटालों का पर्दाफाश करना मेरा जुर्म है. सीएजी की रिपोर्ट पर हाईकोर्ट में पीआईएल डालकर उस पर निर्णय करा देना मेरा दोष है. अगर ये सब करना अपराध है तो मैंने किया है.

एक बात उत्तराखंड की सरकार जान ले. मेरे खिलाफ एक दर्ज़न मुक़दमे, मेरी संपत्ति सील करने या कुर्क करने से मेरा हौंसला पस्त नहीं होने वाला. उत्तराखंड की मीडिया और जनता दोनों से एक बात कहना चाहूंगा, बताना चाहूंगा कि मैं अपनी संपत्ति या अपने परिवार की लड़ाई नहीं लड़ रहा हूँ. मैं राज्य के संसाधनों की महालूट के खिलाफ थोड़ा सक्रिय हुआ तो यही मेरा अपराध बन गया और मुझे तरह तरह से प्रताड़ित किया जा रहा है, फंसाया जा रहा है, बदनाम किया जा रहा है. क्या गलती की मैंने अगर उत्तराखंड का 20000 करोड़ रुपये लूटकर राज्य से बहार जाने से बचाया. क्या वो शराब माफिया जिसको इन्होंने 25 हाइड्रो प्रोजेक्ट दिए थे, इस राज्य का भला करता या वो बिल्डर इस राज्य का भला करता जिसको सरकारी अरबों की जमीन दे डाली थी.

निशंक सरकार को शर्म क्यों नहीं आती किसी परिवार के बुजुर्ग, 4 साल के बच्चे और पत्नी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कराते. क्या दोष है मेरी पत्नी का जिसके खिलाफ उत्तराखंड के कई थानों में अलग-अलग एससीएसटी, ४२०, ४६७, १२० बी, ३८४, ५०४ जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमें दर्ज किये गए. क्या अपराध है मेरे चार साल के बेटे का जो अपने जीवन के स्कूल की पहली परीक्षा देने से वंचित कर दिया गया. क्या अपराध है मेरे 26 साल के भांजे का जिसके खिलाफ गंभीर धाराओं में मुक़दमे दर्ज किये गए. मैं 4 सितम्बर से लेकर 17 सितम्बर तक चीन में था. ये मैं नहीं कह रहा, मेरा पासपोर्ट कहता है. तो 8 सितम्बर को मेरे और मेरी पत्नी के खिलाफ एससीएसटी में मुकदमा दर्ज हो गया.

हरिद्वार के लक्सर थाने में मेरे और मेरी पत्नी के खिलाफ एक इरशाद नमक गुमनाम व्यक्ति की शिकायत पर गंभीर धाराओं में मुकदमा कर दिया गया. जबकि ऐसे किसी नाम के व्यक्ति का कोई अता पता नहीं है. सबसे बड़ी विडंबना ये है कि पुलिस ने उसमें चार्जशीट भी दाखिल कर दी. इस चार्जशीट को हाईकोर्ट ने स्टे कर दिया. उत्तराखंड सरकार के सरकारी विभाग एमडीडीए मेरे और मेरे भांजे के खिलाफ एक मुकदमा जो दो अन्य भाइयों का था और सीजीएम कोर्ट द्वारा दोनों भाइयो को बरी कर दिया गया था, उस मामले में फ्रेश मुकदमा दर्ज करा डाला जबकि कानून है कि अगर एक मुकदमा किसी भी कोर्ट द्वारा निर्णित हो जाता है तो उसके बिहाफ पर फ्रेश मुकदमा दर्ज नहीं हो सकता. सिर्फ मुकदमा ही दर्ज नहीं हुआ, उसमें चार्जशीट भी पुलिस ने दाखिल कर डाली.

जिस दिन मैंने काशीपुर के श्रावंथी गैस घोटाले का खुलासा किया उसी दिन मुझ पर मेरी पत्नी पर और मेरे दो रिपोर्टर पर जिला सूचना अधिकारी द्वारा ३८४, ५०६ यानी एक्सटारशन व जान से मारने की धमकी का मुकदमा करा डाला गया. ये कहते हुए कि हमने विज्ञापन माँगा और ना देने पर कहा कि काशीपुर के गैस प्लांट की झूठी खबर चला देंगे. अगर काशीपुर का खुलासा झूठा होता तो मेरी पीआईएल पर उत्तराखंड सरकार, गिल, कस्टम, पर्यावरण मंत्रालय को हाई कोर्ट ने नोटिस कैसे जारी कर दिया. निशंक जी, होश में आइये. ये सत्ता कभी किसी के साथ नहीं गयी है. ऐसी आंधी आएगी कि सब धुल में मिल जायेगा. एक महतवपूर्ण बात और. आपके इन जुल्मों सितम से मैं ख़त्म होने वाला नहीं हूँ. 5 महीने बाद चुनाव है. आपको आपकी हसियत का एहसास हो जायेगा. आपकी क्या हालत होगी, ये आप सोच भी नहीं सकते. और उन दलाल पत्रकारों को भी मेरी नसीहत है कि होश में आ जाओ, शर्म करो. कल को ये सब तुम्हारे साथ भी हो सकता है. मैं तो झेल जाऊँगा, तुम नहीं झेल पाओगे.

मैं उत्तराखंड के उन सभी पत्रकारों को धन्यवाद देना चाहता हूँ जो आज मेरे साथ खड़े हैं. मैं उनका नाम नहीं लूँगा वर्ना ये निशंक सरकार उनके भी पीछे लग जाएगी. मैं सब जानता हूँ कि दलाल क्या कर रहा है. एक बार इससे निपट लूँ तो तुम्हारे भी सारे काले कारनामों की पोल खोलूंगा. रही उत्तराखंड में रहने-छोड़ने की बात तो मैं ये उत्तराखंड छोड़ने वाला नहीं हूँ, सरकार और अधिकारी कान खोलकर सुन लें.  मेरे इरादों, मेरी क्षमताओं, मेरे धैर्य के चाहे जितने इम्तहान ले ले  ये जालिम सरकार. ये दलाल पत्रकार. ये भ्रष्ट अफसर. पर जब दौर बदलेगा तो दिन बदलते देर न लगेंगे. फिलहाल तो इन भ्रष्टाचारियों के लिए इतना ही कहूंगा कि हे ईश्वर, इन्हें माफ कर. ये नहीं जानते ये क्या कर रहे हैं.

उमेश कुमार

चेयरमैन और संस्थापक

एनएनआई

देहरादून


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