सहारा समूह से भिड़े राजकेश्वर की बहन हैं मीनाक्षी!

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पिछले दिनों भड़ास4मीडिया पर एक खबर प्रकाशित हुई थी, ''एक आईपीएस को निपटाने में जुटा राष्ट्रीय सहारा अखबार'' शीर्षक से. इस खबर के प्रकाशित होने के बाद कुछ सुधी पाठकों ने महत्वपूर्ण जानकारियां और फीडबैक भड़ास4मीडिया को उपलब्ध कराया है. नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर मीडिया के एक दिग्गज ने बताया कि आईपीएस राजीव कृष्ण को को निशाना बनाकर सहारा समूह ने राजकेश्वर सिंह को परेशान करना शुरू किया है.

उस राजकेश्वर को जिसने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी कि सहारा वालों ने दो करोड़ रुपये लेकर काम न करने पर करियर व परिवार की इज्जत तबाह कर देने की धमकी दी थी. प्रवर्तन निदेशालय के उसी अधिकारी राजकेश्वर सिंह की सगी बहन हैं मीनाक्षी सिंह जो आईपीएस अफसर राजीव कृष्ण से ब्याही हैं. मीनाक्षी सिंह भी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट हैं. इसलिए राष्ट्रीय सहारा ने सीधे राजकेश्वर को निशाना न बनाकर उनकी बहन और जीजा को निशाना बनाया है जिससे एक तीर से दो निशाने सध जाएं.

खबर से ऐसा लग रहा है कि मानों राष्ट्रीय सहारा अखबार देश के सभी अनैतिक लोगों को सबक सिखा कर रहेगा, उनकी पोलखोल कर रहेगा, पर इस खबर के तह में जाने पर पता चल रहा है कि सहारा समूह वही कर रहा है जो बरसों से करता आ रहा है. जो अफसर या जज सूट न करे, मन मुताबिक न हो, उसे इतना परेशान करो, उसे इतना बेइज्जत करो, उस पर इतने आरोप लगाओ कि वह अलग थलग पड़ जाए या फिर शासन से दंडित हो जाए. पर प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी राजकेश्वर सिंह ने टूजी स्पेक्ट्रम मामले में और मनी लांडिंग की जांच को लेकर सहारा समूह की धमकियों व रिश्वत को नजरअंदाज किया तो उन्हें भी धमकी दी गई जिस कारण उन्हें सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगानी पड़ी.

राजकेश्वर ने बाकायदे उपेंद्र राय समेत दो पत्रकारों के नाम लिखकर दिए कि ये लोग उन्हें धमका रहे हैं और काम न करने पर करियर नष्ट करने व परिवार को तबाह करने की बात कह गए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने इस रिश्वत व धमकी के प्रकरण की जांच के आदेश सीबीआई को दिए हैं. पर सीबीआई जांच व सुप्रीम कोर्ट की निगरानी के बावजूद सहारा समूह ने अपने अखबार के जरिए राजकेश्वर सिंह के परिजनों को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया है. यहां यह कहने का आशय कतई नहीं है कि राजकेश्वर सिंह, मीनाक्षी सिंह और राजीव कृष्ण कोई दूध के धुले हैं. इनकी छवि को लेकर भी कई तरह की बातें पता चली हैं. लेकिन टूजी मामले में राजकेश्वर का सहारा के प्रलोभन व धमकियों में न आना बताता है कि सहारा समूह इनसे बेहद चिढ़ा हुआ है और अपनी चिढ़ को लंबे समय तक न छुपाकर आईपीएस को निशाना बनाने संबंधी खबर छापकर सार्वजनिक कर दिया है.


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