बेलगाम यूपी पुलिस के खिलाफ मुखर हुए साहित्यकार एवं पत्रकार

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इलाहाबाद। साहित्यकार स्वर्गीय प्रो. रामकमल राय के घर गुरुवार की रात हुए पुलिसिया तांडव को शहर के बुद्धिजीवी पचा नहीं पा रहे है। शनिवार को 'डेली न्यूज ऐक्टिविस्ट'  से बात करते हुए साहित्यकारों ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की और इस घटना को शिक्षा, साहित्य व संस्कृति के शहर पर एक बदनुमा दाग करार दिया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग के पूर्व अध्यक्ष व आलोचक प्रो. राजेन्द्र कुमार ने कहा कि सरकार पुलिस का प्रयोग अपनी सुविधानुसार कर रही है। इसमें सही और गलत का कोई भेद नहीं है।

सरकार को जिस पर भी अपने खिलाफ होने का शक होता है उसकेखिलाफ पुलिस का इस्तेमाल करके प्रताडि़त करती है। स्व. रामकमल राय मेरे मित्रों में रहे हैं। पुलिस को कम से कम उनके साहित्यकार होने का तो लिहाज करना ही चाहिए। जहां मन में आये वहां दबिश देकर लोगों को परेशान करना असंवैधानिक है। आरोप या शक के बिना पर किसी के घर बिना वारंट आधी रात को तलाशी लेना गलत  है। उर्दू के प्रख्यात शायर जमीर अहसन ने इस घटना को पुलिस का हरामीपन करार देते हुए कहा कि खाकी वर्दी वालों को साहित्यकारों और लेखकों के साथ इज्जत से पेश आना चाहिए। कानून के रखवाले जब दूसरों के हाथों की कठपुतली बन जाएंगे तो आम आदमी का जीना दुश्वार हो जाएगा। साहित्यकार के परिजनों संग अपराधियों सरीखा व्यवहार जम्हुरियत के लिए शुभ संकेत नहीं है।

समकालीन जनमत के संपादक रामजी राय ने इस कार्रवाई को अवैध बताया और कहा कि घर का ताला तोडऩा तो सामान्य नागरिकता का उल्लंघन है। यह पुलिस की अनुशासनहीन कार्रवाई है। पुलिस कानून व नागरिक अधिकारों की संरक्षक होती है न कि सताने वाली। स्व. राम कमल राय मेरे मित्र रहे हैं। उनके बच्चे मेरे बच्चों केसमान हैं। ऐसे में उनके परिवार के साथ पुलिस द्वारा किये गए दुव्र्यहार से मुझे हार्दिक पीड़ा हुई है। उन्होंने कहा कि इस शासन व्यवस्था में नागरिकों का जीवन असुरक्षित है। इसके बारे में जनता को सोचना चाहिए। कवि और व्यंग्यकार यश मालवीय ने कहा कि यह घटना शर्मनाक होने के साथ साहित्य, कला व संस्कृति के खिलाफ गुंडाराज की दबिश है। पुलिस वालों को यह समझना चाहिए कि इलाहाबाद की पहचान व साख साहित्यकार व रंगकर्मी हैं न कि नौकरशाह और पुलिस। ऐसे में इस तरह की कार्रवाई से पहले सौ बार सोचना चाहिए। यह संस्कृति के शहर की असांस्कृतिक घटना है जिसको कतई माफ नहीं किया जा सकता है। स्व. रामकमल राय के घर बिना वारंट आधी रात को जिन लोगों ने महिलाओं से इस तरह की बदसलूकी की उनकी शिनाख्त कर, उनको दंडित किया जाना चाहिए।

पत्रकारों ने की निंदा

फतेहपुर :  पत्रकारों की विभिन्न समस्याओं एवं शासन द्वारा प्रदत्त सुविधाओं पर गहन समीक्षा करने के लिए जिला प्रेस क्लब की एक आपात बैठक में डेलीन्यूज के मालिक प्रोफेसर नितीश राय के पैत्रक आवास पर ढाये गये पुलिसिया कहर की घोर निंदा की गई और उप्र शासन से मांग की गई कि वह पत्रकारों की सुरक्षा का समुचित प्रबंध करे।

सत्ता की हनक से कलम की आवाज बंद करने का प्रयास

बस्ती। डेली न्यूज़ ऐक्टिविस्ट के चेयरमैन प्रोफेसर निशीथ राय और प्रख्यात साहित्यकार स्व. डॉ. रामकमल राय के इलाहाबाद स्थित पैतृक आवास पर किए गए पुलिसिया तांडव पर राजनेताओं, बुद्धिजीवियों और प्रतिष्ठित नागरिकों ने मुख्यमंत्री मायावती को तानाशाह शासक बताते हुए कहा कि बसपा सुप्रीमो सत्ता की हनक दिखाकर कलम के सच्चे सिपाही की आवाज को दबाना चाहती हैं। डुमरियागंज के कांग्रेस सांसद जगदंबिका पाल ने उक्त घटना की आलोचना करते हुए कहा है। कि उत्तर प्रदेश में पूरी तरह से जंगलराज कायम हो चुका है, प्रदेश की मुखिया सत्ता का दुरुपयोग कर रही है।

बसपा मुखिया ने जब प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी का घर फुंकवाने में कोई कसर नही छोड़ी थी तो पत्रकार और आमआवाम कैसे सुरक्षित रह सकते हैं। श्री पाल ने कहा कि डीएनए के चेयरमैन के आवास पर घटित हुई उक्त घटना लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर कुठाराघात है। उन्होंने घटना को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कुठाराघात बताया और जांच की मांग की है। सपा के हरैया विधायक एवं पूर्व मंत्री राज किशोर सिंह ने कटु निन्दा करते हुए कहा कि इस सरकार में  पत्रकार हो या आम आवाम, किसान हो या नौजवान कोई सुरक्षित नहीं है। प्रदेश की पुलिस अपराधिक गतिविधियों में लिप्त है। पुलिसिया तांडव की घोर भर्तस्ना करते हुए कहा कि जिन लोगों ने यह कृत्य किया है उनके विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। पीस पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व एमएलसी दयाराम चौधरी ने कहा कि पूरे प्रदेश की पुलिस निरंकुश हो चुकी है। कानून व्यवस्था चौपट हो चुकी है। सारे पुलिस अधिकारी लूट खसोट में व्यस्त हैं। बसपा सरकार बेलगाम हो चुकी है। किसी के घर में बिना सर्च वारंट के घुसना गैर कानूनी है। उन्होंने घटना की निंदा की है। भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष रुपम श्रीवास्तव ने कहा कि महिला मुख्यमंत्री केराज में पुलिस घर की महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार कर रही है। ऐसी सरकार को सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।

मीडिया को परेशान कर रही सरकार

संतकबीरनगर। उप्र की बसपा सरकार समय-समय पर अपनें विरोधियों को परेशान करने के लिए नई-नई चाल चलती है। जाहे किसी पार्टी का नेता हो या फिर मीडिया समाज। अभी एक पखवारें पूर्व आईबी 7 के प्रदेश प्रभारी शलभमणि त्रिपाठी को पुलिस का शिकार होना पड़ा था। इस मामले को लेकर पूरे प्रदेश के पत्रकारों ने जमकर विरोध किया। जिसका नतीजा रहा है कि मायावती ने आनन-फानन में मीडिया को महत्व देना श्ुारू कर दिया अभी एक पखवारा नहीं बीता डीएनए के चेयरमैन डा.निशीथ राय के पैतृक आवास पर मायावती के इशारे पर पुलिस ने जो नग्न तांडव किया उसका सभी दलों के नेताओं ने सर्वदलीय निन्दा की है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व सासंद केसी पांडेय ने मायावती सरकार पर उत्पीडऩ पर आरोप लगाते हुए कहा कि जिस तरह से डेलीन्यूज ऐक्टिविस्ट ने बसपा सरकार द्वारा किये गये कारनामों को सार्वजनिक करने में अपनी भूमिका अदा करता है उसी का परिणाम है कि चैयरमैन के आवास पर  इस तरह का तांडव किया गया। सपा विधायक अब्दुल कलाम ने बसपा सरकार के आलोचना करते हुए कहा कि उ.प्रदेश की मुख्यमंत्री खबरो के उजागर होने से घबरा गयी है और अनावश्यक मीडिया को परेशान करने का कार्य कर रही है। प्रो.डा.निशीथ राय की घर पर पुलिस ने जो तांडव किया है उसका सपा घोर विरोध करेगी और जरूरत पडऩे पर सडक़ पर उतरेगी। संतकबीरनगर के भाजपा के पूर्व लोक सभा प्रत्याशी शरद त्रिपाठी ने कहा कि सच्चाई उजागर होने से मुख्यमंत्री का मानसिक संतुलन बिगड़ चुका है इसलिए वह प्रो.डा.निशीथ राय के घर पर अनावश्यक पुलिस द्वारा तांडव किया गया।

वहीं खलीलाबाद के पूर्व ब्लाक प्रमुख एवं भाजपा नेता दिग्विजय नारायण उर्फ जय चौबे ने बसपा सरकार की इस रवैये का निन्दा करते हुए कहा कि पत्रकारिता के क्षेत्र में डा.निशीथ राय ने जो पहचान बनाई है उसे बसपा सरकार दबा नहीं सकती। वहीं मेंहदावल विधान सभा क्षेत्र के सपा प्रत्याशी जयराम पाण्डेय ने बसपा सरकार के दमनकारी नीतियों की निन्दा करते हुए कहा कि कलम के सिपाहियो पर जिस तरह से बसपा सरकार जुल्म ढ़हा रही है उससे यह साबित होता है कि बसपा मुखिया अपनी धैर्य खो चुकी है।

लोकतंत्र का चौथा स्तंभ भी नहीं सुरक्षित

सुलतानपुर। हत्या, लूट, बलात्कार, राहजनी, अराजकता, माफियागीरी यह सभी आपराधिक वारदातों को अगर अंजाम देना है तो बसपा शासन काल में रहने की मिन्नते करते रहें। वरना किसी अन्य शासनकाल में तो इस प्रकार खुली छूट मिलने से रही। यह बातें इसी तरह दावे के साथ नहीं कही जा रही बल्कि वर्तमान सरकार के पांच साल के कार्यकाल में कुछ महीने शेष रहने के बीच गुजरे कार्यकाल के आपराधिक मामले इस बात को कहने पर मजबूर करते हैं। इस शासनकाल में हद तो यह हो गई है कि अब समाज का चौथा स्तम्भ कहे जाने वाले भी सुरक्षित नहीं। वह बीते शुक्रवार को डेली न्यूज़ ऐक्टिविस्ट के चेयरमैन के पैतृक आवास पर हुए पुलिसिया तांडव का मामला हो या राजधानी लखनऊ में पखवारे भर पहले इलेक्ट्रानिक चैनल के ब्यूरो प्रमुख पर पुलिस द्वारा पहुंचाई गई यातनाओं का मामला रहा हो। इन दोनों ही प्रकरणों ने सरकार से लेकर नौकरशाहों की कलई तक खोल कर रख दिया है। बताते चलें की शुक्रवार को डीएनए के चेयरमैन के पैतृक आवास पर हुए पुलिसिया तांडव प्रकरण पर जिले के विरोधी दलों ने सरकार के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की।

चेयरमैन के घर पर पुलिसिया तांडाव पर विभिन्न पार्टियों के नेताओं की राय : इसमें कोई शक नहीं कि वर्तमान समय में जो हालात चल रहे हैं उसमें समाचार पत्र के माध्यम से पारदर्शिता के साथ खबरे छापने का श्रेय डेली न्यूज़ ऐक्टिविस्ट समाचार पत्र को है। ऐसे सम्मानित समाचार पत्र के चेयरमैन के पैतृक आवास पर पुलिसिया तांडाव बरपा कर परिवार वालों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार बरता जाना बेहद निंदनीय है। उक्त बातें कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष मकसूद आलम ने कहते हुए अपने अगले क्रम में कहा कि इस घटना के बाद साफ  हो चला है कि सरकार हर मामलों पर घिर गई है और बसपा मुखिया खिसयाई बिल्ली की तरह खम्भा नोचने की कहवात को चरितार्थ करती नजर आ रही हैं।

बसपा सरकार में लोकतंत्र से लेकर हर तंत्र हो रहा विघटित - ओमप्रकाश पाण्डेय (पूर्व मंत्री) : वह अखबार के चेयरमैन के घर पुलिसिया तांडव का मामला हो या किसी पत्रकार पर पुलिसिया कहर बरपाये जाने का प्रकरण। हर एक कलमकार समाज के चौथे स्तम्भ का एक सोत्र है। पूर्व मंत्री एवं भाजपा नेता ओमप्रकाश पाण्डेय ने बड़ी बेबाकी से डेलीन्यूज के चेयरमैन के पैतृक आवास पर पुलिसिया जुल्म की कहानी पर बोलते हुए कहा कि यह बहुत दु:खद घटना है। इससे लोकतन्त्र से लेकर देश के सभी तंत्र विघटित हो गए हैं। जब समाज के संभ्रान्त इस सरकार में अपनी इज्जत को बचा नहीं पा रहे तो आम आदमी की बात करना बेईमानी होगा। बसपा सरकार तानाशाही का प्रयायवाची बन गयी है। राज्य में लोकतांत्रिक संस्थाओं से लेकर मीडिया कर्मियों तक पर दमन का डंडा चलाया जा रहा है।

शुक्रवार को डेलीन्यूज के चेयरमैन निशीथ राय के घर पर जो पुलिसिया तांडव का नंगा नाच नौकरशाहों के इशारों पर रचा गया उससे सरकारी कारिन्दों के निरंकुश होने का प्रमाण मिलता है। सरकार के मंत्रियों से लेकर मातहतों के नजदीक लोकतंत्र का कोई भी सम्मान नही है। राज्य की जनता सकरार की इस निरंकुशता का जवाब आने वाले चुनाव में बसपा को अवश्य देगी। जिस देश में इन्दिरा गांधी की दबंगई नहीं चलीं उस देश में मायावती की तानाशाही कब तक चलेगी। कभी न कभी तो इस तानाशाही का अंत हो ही जायगा। उक्त बातें समाजवादी पार्टी के सुलतानपुर विधायक अनूप संडा ने डीएन से बातचीत में कहीं।

उत्पीडऩ बंद न हुआ तो उतरेंगे सडक़ों पर

महराजगंज। जर्नलिस्ट प्रेस क्लब महराजगंज के तत्वाधान में बैठक आहुत की गयी जिसमें 'डेली न्यूज एक्टिविस्ट'  समाचार पत्र के चेयरमैन के पैतृक आवास पर विगत दिनो रात 11 बजे वर्दीधारियों ने जो नंगा नाच किया उसके विरोध में पत्रकारों ने बैठक कर निन्दा करते हुए नाराजगी जतायी है। बैठक की अध्यक्षता कर रहे जर्नलिस्ट प्रेस क्लब महराजगंज के अध्यक्ष अजय कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि प्रदेश सरकार के इशारे पर संविधान के चौथे स्तंभ कहे जाने वाले पत्रकारों पर इस वर्ष दूसरा हमला हुआ है जिसकी जर्नलिस्ट प्रेस क्लब महराजगंज जनपद के पत्रकारों के साथ घोर निंदा करती है।

साथ ही आगाह करते हुए पुलिस प्रशासन को यह चेतावनी देना चाहती है कि सरकार के सह पर अपना तांडव बंद करे नहीं तो क्लब आंदोलन करने के लिए बाध्य हो जाएगा।  सपा नेता विदेश कन्नौजिया ने निंदा करते हुए कहा कि सरकार की शह पर पुलिस वालों ने तांडव शुरू कर दिया है और यहां तक कि वरिष्ठ पत्रकार/चेयरमैन व साहित्यकार के आवास पर पुलिस लाव लश्कर के साथ पहुंचकर बिना कारण बताए तांडव शुरू कर दिया सवाल यह उठता है कि बिना सह के एैसा कार्य पुलिस क्यों करेगी? इसके कारण प्रदेश सरकार की छवि तो धूमिल हो ही रही है साथ ही अब पत्रकारों को दुश्मन बनाकर अपने को गर्त में जाने का रास्ता साफ  कर दी है।  भाजपा जिला अध्यक्ष समीर त्रिपाठी ने कहा कि   भ्रष्टाचारियों की आग में आज पूरा प्रदेश जल रहा है जिसकी जिम्मेदार प्रदेश सरकार है। है। एैसे में इस सरकार को सत्ता में बने रहने का कोई हक नहीं है।

साहित्यकार के आवास पर हुई घटना दुर्भाग्यपूर्ण

श्रावस्ती। डीएनए के चेयरमैन डॉ. निशीथ राय व प्रख्यात साहित्यकार स्व. डॉ. राम कमल राय के इलाहाबाद स्थित पैतृक आवास पर पुलिस द्वारा किए गए तांडव से जिले के आम बुद्धजीवी वर्ग की भावनाएं आहत हैं। इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि क्या सच्चाई को उजागर करना गलत है? या एक साहित्यकार के घर आधी रात को पुलिस द्वारा किया गया अमानवीय व्यवहार उचित है? यह एक सामन्तशाही हुकूमत या पुलिसिया तांडव नहीं तो और क्या है? इस तरह के अनेक सवाल खड़ा करते हुए जहां लोगों में प्रदेश की बसपा सरकार के प्रति आक्रोश देखने को मिल रहा है। वहीं विपक्षी दल के नेता इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण मानते हुए सूबे की बसपा सरकार को हिटलरशाही शासन का परिचायक भी बता रहे हैं।

जनपद मुख्यालय भिनगा के निवासी प्रमुख समाज सेवी व राष्ट्रपति से सम्मानित किए जा चुके परशुराम त्रिपाठी इलाहाबाद में हुई एक साहित्यकार के घर इस तरह की पुलिसिया कार्यशैली से काफी आहत हैं और इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए प्रतिशोध की भावना में की गई घटना बता रहे हैं। राजा बीरेन्द्र कान्त सिंह महाविद्यालय भिनगा के प्राचार्य डॉ. एपी सिंह श्री अलक्षेन्द्र इंटर कॉलेज भिनगा के प्राचार्य महेन्द्र प्रसाद भारती पूर्व प्राचार्य शत्रुघ्न प्रसाद शुक्ल, कवि गया प्रसाद मिश्र मधुकर मौलाना गुल मोहम्मद, कसोंधन समाज के अध्यक्ष हरीमोहन गुप्ता सहित अन्य बुद्धजीवी वर्ग ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि तेजी से सच्चाई और निर्भीकता के साथ खबरें प्रकाशित करने वाले डेली न्यूज़ ऐक्टिविस्ट के चेयरमैन डॉ. निशीथ राय के पैतृक आवास इलाहाबाद पर हुई घटना प्रतिशोध की भावना से ग्रसित है।

भाजपा प्रदेश परिषद के सदस्य राम फेरन पांडेय भाजपा के जिलाध्यक्ष जगदम्बिका प्रसाद वर्मा पूर्व अध्यक्ष विनोद शुक्ल, नगर अध्यक्ष एमआर जायसवाल रणवीर सिंह उदय प्रताप नरायन सिंह सहित अन्य भाजपा नेताओं ने इलाहाबाद में एक साहित्यकार के आवास पर पुलिस तांडव के प्रति आक्रोश जताया है और कहा है कि यह घटना सच्चाई व निर्भीकता के साथ खबरों को प्रकाशित कर रहे अखबार डीएनए को दबाने का माया सरकार का असफल प्रयास है। इलाहाबाद में डीएनए के चेयरमैन डॉ. निशीथ राय के पैतृक आवास पर पुलिस द्वारा किए गए अमानवीय व्यवहार पर पूर्व एमएलसी व सपा से श्रावस्ती विधान सभा क्षेत्र के प्रत्याशी मो. रमजान तथा सपा के जिलाध्यक्ष महमूद आलम नईमी एवं जिला महा सचिव सपा जीतेन्द्र यादव सहित अन्य सपा नेताओं में आक्रोश देखने को मिल रहा है सपा नेता मो. रमजान ने कहा कि तेजी से प्रदेश के बसपा सरकार की जन विरोधी नीतियों को उजागर करने वाले डीएनए के चेयरमैन के पैतृक आवास पर हुई घटना सच्चाई को दबाने का एक असफल प्रयास है। आज पूरे प्रदेश में माफियाओं का बोल बाला है। सपा के जिलाध्यक्ष महमूद आलम नईमी ने कहा कि निष्पक्षता के साथ सच्चाई को उजागर कर रहे डीएनए से प्रदेश की बसपा सरकार बौखला गई है। इस तरह की घटना हिटलरशाही शासन का परिचायक है। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष कुवर सिंह, जिला उपाध्यक्ष इकबाल अहमद मीडिया प्रभारी सदाशिव पांडेय ने पुलिस के इस कार्यशैली की निन्दा की है।

दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग

श्रावस्ती। इलाहाबाद में डीएनए के चेयरमैन डा. निशीथ राय के पैतृक आवास पर रात में पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई पर पत्रकारों ने आक्रोश प्रकट किया है और कहा है कि यह समाज के चौथे स्तम्भ के साथ पुलिस द्वारा किया गया अमानवीय व्यवहार है। यह घटना निन्दनीय है इसकी निष्पक्षता के साथ जांच कराए जाने की जिले के पत्रकारों ने मांग की है और कहा है कि दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। इलाहाबाद में साहित्यकार डॉ. राम कमल राय के आवास पर रात में पुलिस द्वारा तलाशी के नाम पर अमानवीय व्यवहार की जिले के पत्रकार विजय द्विवेदी, एनबी अस्थाना, विभाकर शुक्ल, मदन मोहन सिंह अजय आर्य, आशुतोष द्विवेदी, सतीश मौर्या उमेश गुप्ता, समरजीत सिंह पंवार, संजय रस्तोगी सहित अन्य पत्रकारों ने निन्दा की है। साभार : डीएनए


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