पत्रकार के हमलावर अफसर को सरकार ने प्राइज पोस्टिंग से नवाजा

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: बीपी अशोक को बनाया गया मेरठ का एएसपी सिटी : इंडियन ब्राडकास्‍टर्स एसोसियेशन ने पाया था दोषी : मुख्‍यमंत्री मायावती के खासमखास है बीपी अशोक : न जांच, न आरोप पत्र, हफ्ता भर पहले किया बहाल : लखनऊ में इलेक्‍ट्रानिक पत्रकारों पर बर्बर हमला करने वाले लखनऊ के निलम्बित अपर पुलिस अधीक्षक बीपी अशोक को प्रदेश सरकार ने उनकी करतूतों पर उसे क्‍लीनचिट दे दी।

इतना ही नहीं, अशोक के वीरतापूर्ण कारनामों के लिए उसे प्राइज पोस्टिंग से नवाजा भी गया है। अशोक को अब सरकारी तौर पर भी बेहद संवेदनशील माने जाने वाले मेरठ में शहर की कानून-व्‍यवस्‍था सम्‍भालने का उपहार मिला है। अब यह सवाल दीगर है कि अशोक अपनी इस प्राइज पोस्टिंग में क्‍या गुल खिलाते हैं, लेकिन सरकार के इस फैसले से जहां बेलगाम माने जाने वाले सरकारी अफसरों को इस तरह से पुरस्‍कृत किया गया है, इसे लेकर लखनऊ और मेरठ समेत प्रदेश भर के पत्रकारों में जबर्दस्‍त आक्रोश व्‍याप्‍त है। कहने की जरूरत नहीं कि बीपी अशोक को मुख्‍यमंत्री मायावती का खासमखास माना जाता है। गौरतलब बात यह है कि इंडियन ब्राडकास्‍टर्स एसोसियेशन के एक जांच दल ने अशोक और अनूप को इस जघन्‍य वारदात के लिए पूरी तरह दोषी पाते हुए सरकार से इन अफसरों पर कड़ी कार्रवाई करने की सिफारिश भी की थी। जांच दल के अध्‍यक्ष थे साधना टीवी के संपादक एनके सिंह।

ज्ञातव्‍य है कि करीब एक महीना पहले ही लखनऊ में आईबीएन-7 के राज्‍य ब्‍यूरो प्रभारी शलभमणि त्रिपाठी और उनके सहयोगी वरिष्‍ठ पत्रकार मनोजराजन त्रिपाठी समेत ब्‍यूरो में काम करने वाले दूसरे सहयोगियों को सरेशाम न केवल अशोक ने अपने सहयोगी सीओ अनूप कुमार और सिपाहियों के साथ हजरतगंज इलाके में सड़क पर घसीटते हुए बुरी तरह पीटा, फिर उन दोनों पत्रकारों को घसीट पर अपनी जिप्‍सी में लाद कर हजरतगंज कोतवाली ले जाने लगे। यह पत्रकार अपने साथ हुए हादसे की सूचना अपने सहयोगियों को न दे सकें, इसके लिए इनके मोबाइल फोन तक छीन लिए गये। हालांकि इसीबीच  मौका देखकर मनोज राजन जिप्‍सी से कूद कर भागे और पीछा करने वाले पुलिसकर्मियों से किसी तरह अपनी जान बचाते हुए भागे, पत्रकारों को इस घटना की सूचना दी।

उधर शलभ को कोतवाली में भी पीटा गया और उन्‍हें झूठे मामले में फंसाने की तैयारियां भी शुरू कर दी गयीं। लेकिन मनोज राजन के प्रयास रंग लाये और देखते ही देखते सैकड़ों पत्रकारों का हुजूम कोतवाली में पहुंच गया। पत्रकारों की बढ़ती भीड़ देखकर शलभ को पुलिसवालों ने छोड़ दिया, लेकिन इस घटना से बुरी तरह आहत पत्रकारों ने देर रात मुख्‍यमंत्री आवास का घेराव कर लिया। बाद में वहां पहुंचे मुख्‍यमंत्री मायावती के सचिव नवनीत सहगल और सूचना‍ विभाग के ओएसडी दिवाकर त्रिपाठी ने पहले तो पत्रकारों को समझाने-बुझाने की कोशिशें कीं, लेकिन पत्रकारों के आक्रोश को देखते हुए एएसपी बीपी अशोक और सीओ अनूप कुमार को निलम्बित करने का आदेश जारी कर दिया गया। इसके बाद ही पत्रकारों ने धरना खत्‍म किया।

लेकिन इसके आगे की दास्‍तान और भी शर्मनाक रही। अशोक और अनूप को इस बीच न तो कोई चार्जशीट दी गयी और न ही कोई सवाल-जवाब हुआ। बस अभी एक हफ्ता पहले इन दोनों अफसरों को अचानक ही आरोपों से मुक्‍त करते हुए उन्‍हें बहाल कर दिया गया। हैरत तो आज तब हुई जब देर शाम सरकार की ओर से जारी एक आदेश में बारह पुलिस अफसरों के तबादले के आदेश में बीपी अशोक का नाम भी शामिल दिखा। इस आदेश में अशोक को मेरठ का अपर पुलिस अधीक्षक बनाये जाने का फैसला किया गया है। अब देखना है कि अशोक मेरठ में अपने उसी उद्दंडता को जारी रखते हैं, या फिर उनके रवैये में कोई फर्क भी आता है। बहरहाल, सरकार के इस फैसले को लेकर प्रत्रकारों में भारी रोष है। खासतौर पर तब जब इंडियन ब्राडकास्‍टर्स एसोसियेशन इस मामले में अपनी जांच रिपोर्ट में बीपी अशोक और अनूप कुमार को पूरी तरह जिम्‍मेदार बताया है।


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