यूपी के अफसरों की खुली पोल, एक फोन पर हराम की रकम हाजिर

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: दो ठगों ने दर्जनों अफसरों को चूना लगाया : ग्‍वालियर के डीएम ने भी दिए दो लाख रुपये : यूपी में यह एसटीएफ की अक्‍लमंदी है, अफसरों की औकात या फिर अफसरशाही में उगाही की प्रवृत्ति का भंडाफोड़। जो भी हो, मगर गुरुवार की एक घटना ने बता दिया है कि यूपी के अफसरों को टुच्‍चे किस्‍म के धोखेबाज ब्लैकमेल कर सकते हैं।

यूपी एसटीएफ ने आज एक जांच के बाद रांची से दो ठगों को गिरफ्तार करने का दावा किया है। इन पर आरोप है कि इन लोगों ने यूपी के बड़े अफसरों से भारी रकम ऐंठी है। पटना की बेउर जेल से संचालित हो रहे इस रैकेट में तो ग्‍वालियर के डीएम भी फंस गये और मुख्‍य निर्वाचन आयुक्‍त के नाम पर दो लाख रूपये अदा कर दिये। बहरहाल, एसटीएफ इन लोगों को अब लखनऊ लाकर गोंडा की अदालत में पेश करेगी। लेकिन इस बात का सरकारी तौर पर कोई भी खुलासा नहीं किया जा रहा है कि आखिर यह रकम इन अफसरों के पास आयी कहां से।

बड़ा मजेदार किस्‍सा है यह, जो यूपी के अफसरों की हालत का खुलासा कर देता है। इस घटना ने साबित कर दिया है कि यूपी के अफसरों को कोई, कहीं, कभी भी और कितना भी बेवकूफ साबित कर सकता है। बस एक फोन घुमाइये, अफसर से कहिये कि आप फलां मंत्री, नेता, विधायक या कोई कमिश्‍नर बोल रहे हैं और मेरे एकाउंट में इतना पैसा जमा करा दो। पूरी तरह यकीन रखिये कि आपके फोन काटते ही यह अफसर आनन-फानन मांगी गयी रकम दिये गये एकाउंट नम्‍बर पर फौरन जमा करा देंगे। रकम चाहे जितनी हो, इन अफसरों के लिए यह समस्‍या होती ही नहीं। अब यह सवाल पूछना निरर्थक है कि इन अफसरों के पास इतनी मोटी रकम आती कहां से है, जिसे एक साथ गिन तक पाना आम आदमी के लिए मुमकिन नहीं होता।

तो हुआ यह कि, जैसा कि यूपी की एसटीएफ बताती है, बीती 27 जुलाई को राजधानी लखनऊ के करीब वाले जिले गोंडा की मनकापुर तहसील के एसडीएम के सरकारी मोबाइल फोन पर काल आयी। सुबह आयी इस काल में फोन करने वाले ने खुद को डिवीजन कमिश्‍नर बताते हुए एसडीएम को स्‍टेट बैंक का एक एकाउंट नम्‍बर देते हुए कहा कि उसके खाते में चालीस हजार रूपये जमा कर दो। फोन सुनते ही एसडीएम ने बिना किसी पूछतांछ के अपने तहसीलदार की मार्फत उस एकाउंट में पूरा पैसा जमा करा दिया। खबर है कि इस अफसर ने उक्‍त कॉलर से यह भी कहा कि सर अगर और जरूरत पड़े तो तत्‍काल आदेश दीजिएगा।

खबरों के अनुसार इसी दौरान गोंडा की ही तरबगंज तहसील के एसडीएम के फोन पर भी ऐसी ही काल आयी और इस अफसर ने भी बिना किसी पूछतांछ के अपने इस सर के दिये गये एकाउंट नम्‍बर पर पूरी रकम जमा करा दी। उधर बदायूं जिले की बिल्‍सी तहसील के एसडीएम से भी फोन पर ऐसी ही रकम की मांग की गयी जो फौरन पूरी हो गयी। बताते हैं कि ऐसी दर्जनों घटनाएं हुईं और भारी-भरकम रकम उस एकाउंट में जमा की गयी। लेकिन इसी बीच शायद मनकापुर के एसडीएम ने अपने दोस्‍तों से बात की, तो उन्‍होंने भी अपने साथ हुई वारदात का जिक्र कर दिया।

इसके बाद तो यह बात पूरी ब्‍यूरोक्रेसी तक पहुंच गयी, और हंगामा खड़ा हो गया। लेकिन बाद में कई अफसरों ने जांच-पड़ताल के लफड़े में पड़ने के बजाय मामले को भूल जाने में ही अपनी भलाई समझी। मगर अब तक मनकापुर में एसडीएम की खासी खिल्‍ली उड़ चुकी थी, कारण यह कि उस तहसीलदार ने ही एसडीएम से रकम न मिलने पर हंगामा शुरू कर दिया था। हार कर मनकापुर थाने में इस वारदात की रिपोर्ट दर्ज करा दी गयी। इस एफआईआर के बाद बिल्‍सी में भी एसडीएम ने रिपोर्ट दर्ज करा दी। जांच का काम एसटीएफ को सौंपा गया तो पता चला कि यह खाता केरल के येदुक्‍की जिले में एसबीआई का है।

पता चला कि इस खाते में पिछले कई महीनों के दौरान देश के अलग-अलग हिस्‍सों से भारी रकम जमा की गयी, लेकिन रकम की निकासी केवल बिहार से ही हुई। मामले की जांच कर रहे पुलिस उपाधीक्षक डॉक्‍टर अरविंद चतुर्वेदी और दुर्गेश कुमार ने छानबीन में पाया कि जिस फोन से इन अफसरों को फोन किया गया, उसी नम्‍बर से यूपी के अनेक सरकारी अफसरों के नम्‍बरों पर भी कॉल की गयी थी। देश के दूसरे हिस्‍सों में भी कई सरकारी अफसरों ने फोन करने वाले इस -सर- के आदेश का पूरी निष्‍ठा के साथ पालन किया। ग्‍वालियर के जिला निर्वाचन अधिकारी जो जिलाधिकारी होता है, ने तो अपने नम्‍बर पर फोन करने वाले देश के मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त के निर्देश का पालन किया और उस एकाउंट में दो लाख रूपये जमा कराये।

यूपी एसटीएफ की जांच के बाद मामला खुलने पर उसने थाना यूनिवर्सिटी रोड पर मुकदमा दर्ज कराया। जांच अधिकारियों ने पाया कि मांगी गयी रकम जमा कराने के लिए इन माननीय अफसर-ठगों ने कई-कई बैंकों में अपने खाते खुलवा रखे थे। हैरतनाक बात यह कि मई-11 से पटना की बेउर जेल में बंद रंजन मिश्रा नामक व्‍यक्ति ने ज्‍यादातर फोन किये थे। रंजन को पटना के डीएम के नाम पर पैसा मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

एसटीएफ की पूछताछ में अब तक जितने अफसरों के साथ ऐसी धोखाधड़ी हुई है, उनमें यूपी के कई जिलों के नगर मैजिस्‍ट्रेट और एसडीएम स्‍तर के अधिकारी हैं। पकड़े गये लोगों में हजारी बाग के इचाक थाने के तिलरा गांव का विवेक कुमार, हालपता 16- टिस्‍को कालोनी, ड्राइर्स हट वेस्‍ट बोकारो, थाना घाटोटांड मांडू, रामगढ़, झारखंड और अमर नाथ, निवासी बिहार शरीफ, हालपता पोकर चूना भट्टी, गली नम्‍बर-1, थाना पोकर रांची झारखंड है। कुछ भी हो, इस ठगी की श्रंखला ने इतना तो तय कर ही दिया है कि यूपी के अफसरों के पास बेहिसाब पैसा है और अक्‍ल धेला भर भी नहीं। अब इस सवाल का कोई अर्थ नहीं रहा जाता कि इतनी बड़ी रकम इन अफसरों के पास आती कहां से है।

लखनऊ से वरिष्ठ पत्रकार कुमार सौवीर की रिपोर्टकुमार सौवीर

((कुमार सौवीर यूपी के बेबाक और ईमानदार पत्रकारों में शुमार किए जाते हैं. दैनिक जागरण, दैनिक हिंदुस्तान समेत कई अखबारों में वरिष्ठ पदों पर रहे हैं. महुआ न्यूज के यूपी हेड रह चुके हैं. इन दिनों आजाद पत्रकार के बतौर सक्रिय हैं. उनसे संपर्क This e-mail address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it के जरिए किया जा सकता है.))


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