बर्खास्त सिपाही सुबोध यादव ने अन्ना के मंच से लिया दो आईपीएस अफसरों का नाम

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श्रीकांत सौरभबुधवार की शाम आठ बजे अन्ना हजारे के आंदोलन की जानकारी के लिए जैसे ही टीवी आन किया, स्टार न्यूज पर एक खबर को देख नजरें बरबस ही उस पर ठहर गई. "अमिताभ ठाकुर यूपी के सबसे ईमानदार आईपीएस अधिकारियों में, जबकि स्पेशल डीजी बृजलाल उतने ही भ्रष्ट." रामलीला मैदान के मंच से यूपी के बर्खास्त सिपाही सुबोध यादव के इस बयान को सुन हजारों की भीड़ तालियां पीट रही थी.

टीवी पर इस खबर को बार-बार फ्लैश किया जा रहा था. इस खबर को देख-सुन यकायक जेहन में यही खयाल उभरा कि अरे, ये तो वही अपने भड़ास वाले अमिताभ ठाकुर (फिलहाल अमिताभ) की चर्चा यहां हो रही है!  सिपाही सुबोध यादव की दास्तान भी कम रोमांचक नहीं है. इन्होंने यूपी पुलिस में अपने 17 साल के कार्यकाल में नौ घोटालों को उजागर किया और नौ बार निलंबित भी हुए हैं. यानि जब-जब भ्रष्टाचार का पर्दाफाश किया, तब-तब बर्खास्त हुए. सुबोध का यह बयान यूपी सरकार की निरंकुशता को बतलाता है कि कैसे वहां गुंडा तंत्र हावी है. वहीं ईमानदार सरकारी सेवकों को किस कदर चुन-चुनकर परेशान किया जा रहा है.

जहां तक अमिताभ की बात है तो मैंने उन्हें भड़ास की बदौलत ही जाना कि वह मेरठ में अपराध अनुसंधान विभाग में एसपी होने के साथ ही उम्दा लेखक भी हैँ. करीब तीन महीने से मैं भड़ास का नियमित पाठक हूं. कुछ दिनों पहले अमिताभ जी द्धारा अपने लंदन प्रवास के दौरान भड़ास पर भेजी गई रिपोर्ट पढ़ पहली बार उनसे रूबरू हुआ. हालांकि उनके व उनकी पत्नी नूतन ठाकुर के आलेखों पर भड़ास के कुछ पाठक नकारात्मक कमेंट भेज कई तरह के आरोप लगाते रहे हैं. मसलन भड़ास के एडिटर यशवंत जी अमिताभ की ऊंची हैसियत व उनसे नजदीकी के कारण उनके किसी भी आलेख को कुछ ज्यादा ही तरजीह देते हैं. उनकी पत्रकार व समाजसेवी पत्नी नूतन ठाकुर पति के आईपीएस पद का दिखावा करती है. वगैरह-वगैरह.

कहना चाहूंगा कि ये बेबुनियाद आरोप मुझे नागावार गुजरे. अपने खोजी स्वभाव की वजह से मैंने पूर्व में भड़ास पर प्रकाशित अमिताभ के लगभग तमाम आलेखों को पढ़ डाला. इसके बाद अमिताभ के बारे जो नई जानकारी मुझे मिली उसे आपसे शेयर करना चाहूंगा. यह कि अमिताभ ठाकुर मेरे (मोतिहारी) बगल के जिले मुजफ्फरपुर से आते हैं. आईपीएस की नौकरी करते हुए इनके जीवन का अधिकांश हिस्सा यूपी में ही बीता है. तत्कालीन सरकार में अपनी ईमानदारी व अड़ियल रवैये की वजह से राजनेताओं की आंखों की किरकिरी भी बने.

इस कारण इन्होंने अपने करियर में कई उतार-चढ़ाव झेले. लेकिन 'सत्यमेव जयते' की तर्ज पर इन्होंने कभी हार नहीं मानी. फिलहाल मेरठ के अपराध अनुसंधान शाखा में बतौर एसपी कार्यरत हैँ. इतनी पत्नी नूतन ठाकुर भी पत्रकार व समाजसेवी हैं. अमिताभ ने आईआईएम, लखनऊ से प्रबंधन भी किया है. भूमिहार जाति से आने के बावजूद इन्होंने कानूनी तौर पर जातिसूचक टाइटल 'ठाकुर' हटा दिया. बिजनौर में जब एसपी थे तो वहां विस चुनाव के दौरान इन्होंने सता पक्ष से पंगा लेते हुए निष्पक्षता से चुनाव कराया जिससे दो दबंग विधायक चुनाव हार गए. इसको लेकर चुनाव बाद जब अमिताभ का तबादला कर दिया गया तब बिजनौर की जनता ने उनके समर्थन मे काफी बवाल मचाया था.

यह तो अमिताभ के पुलिसिया करियर की महज बानगी भर है. और भी रोचक किस्से है जिनका जिक्र इस छोटे आलेख में करना मुमकिन नहीं है. और, आज की शाम दिल्ली के ऐतिहासिक लालकिला स्थित रामलीला मैदान में अन्ना के लिए बने मंच से सुबोध ने हजारों की भीड़ के बीच जो बयान दिया, इससे यह साबित होता है कि अमिताभ वास्तव में यूपी के ईमानदार पुलिस अधिकारियों की श्रेणी में आते हैं. यह हमारे लिए गर्व की बात है. इसी प्रकार से सच को खुलकर बताया जाना चाहिए ताकि देश में बेईमानों को अलग-थलग करने और ईमानदारों को प्रोत्साहित करने का अभियान तेज हो सके.

श्रीकांत सौरभ

पत्रकार
पूर्वी चम्पारण
संपर्क : 9473361087 और This e-mail address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it


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