निशंक के पाप का घड़ा भरा, हर कोई विदाई गीत गा रहा

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निशंकदेहरादून सरगर्म है. निशंक की विदाई के गीत गाए जाने लगे हैं. खंडूरी के खास लोग खंडूरी को फिर से मुख्यमंत्री बनाए जाने के फैसले पर बधाई लेने लगे हैं. भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरने की तैयारी कर चुकी भाजपा को पहले अपने घर को साफ करना पड़ रहा है. इसी कारण पिछले महीने कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदुरप्पा को हटाने का फैसला भाजपा आलाकमान को लेना पड़ा.

और इस महीने उत्तराखंड का ताज निशंक से छीनने का फैसला हो गया है. यह निर्णय गुरुवार रात तीन घंटे तक चली भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक में लिया गया. उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल "निशंक" से इस्तीफा लेने के लिए उन्हें 10 सितम्बर को दिल्ली तलब किया गया है. विधानसभा चुनावों से सिर्फ 5 महीने पहले उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक का जाना तय हो गया है. गुरुवार को दिल्ली में बीजेपी की संसदीय बोर्ड की बैठक में निशंक को मुख्यमंत्री पद से हटाने पर सहमति बन गई पर बैठक में इस फैसले पर आखिरी मुहर नहीं लगी है इसलिए पार्टी ने इसकी औपचारिक घोषणा नहीं की है. यही वजह है कि पार्टी अभी खुलकर इस मुद्दे पर नहीं बोल रही है.

पूर्व केंद्रीय मंत्री बीसी खंडूरी के उत्तराखंड का नया मुख्यमंत्री बनने की प्रबल सम्भावना है. कर्नाटक में भ्रष्टाचार पर पार्टी की जैसी फजीहत हुई, उससे सबक लेते हुए भाजपा शीर्ष नेतृत्व एहतियातन कदम उठाकर घर दुरूस्त करने में जुट गया है. सूत्रों की मानें तो निशंक के लिए आंतरिक सर्वे के साथ भाजपा महासचिव धर्मेन्द्र प्रधान की रिपोर्ट घातक साबित हो रही है.  पार्टी आलाकमान काफी समय से उत्तराखण्ड में आंतरिक असंतोष और सरकार पर लग रहे भ्रष्टाचार से वाकिफ था, लेकिन शीर्ष नेतृत्व को लग रहा था कि बीच में मुख्यमंत्री बदलने से चुनाव में नुकसान हो सकता है, लेकिन भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान तेज करने के बाद पार्टी को महसूस हुआ कि निशंक को नहीं बदला गया तो पांच माह बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में यही भ्रष्टाचार पार्टी के लिए घातक साबित हो जाएगा. लिहाजा, मुख्यमंत्री की छुट्टी का मन बना लिया गया.

निशंक पर कई तरह के आरोप लगे हैं. हरिद्वार-ऋषिकेश के बीच स्टैडिया इण्डस्ट्री के भू-उपयोग बदलने का मामला है. इस इण्डस्ट्री को भाजपा सहप्रभारी डॉ. अनिल जैन की कम्पनी ने पुनर्रूद्धार के नाम पर ले लिया था. राज्य सरकार ने न केवल भू-उपयोग परिवर्तित किया, बल्कि 40 करोड़ रुपए की सरकारी फीस भी माफ कर दी. पुत्री आरूषि के एनजीओ में गड़बड़ी का मामला है. एनजीओ को आवंटित जमीन में आयुर्वेद मेडिकल कालेज खोला गया. कुम्भ मेले में अनियमितता को लेकर नियंत्रक लेखा महापरीक्षक की रिपोर्ट में भी अंगुली उठाई गई है.

भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरने में लगी बीजेपी को पिछले दो महीने में अपने दूसरे मुख्यमंत्री की बलि देनी पड़ रही है. येदुरप्पा के बाद सीएम निशंक की बलि लेगा भ्रष्टाचार. सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री निशंक के खराब प्रदर्शन और भ्रष्टाचार के आरोपों को देखते हुए उन्हें हटाने का फैसला ले लिया गया है. जानकारों की मानें तो बीजेपी तीन वजहों से ऐसा कर रही है. भ्रष्टाचार पर छवि सुधारना चाहती है. निशंक पर भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप लग चुके हैं. कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री येदुरप्पा पर भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद उन्हें हटाने के लिए लोकायुक्त की रिपोर्ट का इंतजार करने वाली बीजेपी की काफी किरकिरी हुई थी. इस बार बीजेपी कोई गलती नहीं करना चाहती. निशंक को हटाकर बीजेपी संदेश देना चाहती है कि वो भ्रष्टाचार पर कोई समझौता नहीं करेगी.

दूसरी वजह लालकृष्ण आडवाणी ने गुरुवार को जोरशोर से घोषणा की है कि वो भ्रष्टाचार के खिलाफ रथयात्रा निकालेंगे. पार्टी नहीं चाहती कि भ्रष्टाचार के आरोपों में लिप्त मुख्यमंत्री को गद्दी पर बने रहने देकर विपक्ष रथयात्रा की नीयत पर सवाल उठाए. तीसरी वजह खंडूरी की साफ छवि है. 70 की उम्र पार कर चुके खंडूरी पर बीजेपी ने अपना दांव लगाया है. इसकी वजह है खंडूरी की ईमानदार छवि. (खंडूरी का एक पुराना वीडियो इंटरव्यू देखने सुनने के लिए क्लिक करें- भड़ास4मीडिया के साथ खंडूरी की बातचीत) अगर खंडूरी कोई चमत्कार दिखा जाते हैं तो वो पार्टी के लिए बोनस होगा और खंडूरी के लिए पांच सालों तक मुख्यमंत्री का ताज.

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खंडूरी पहले भी मुख्यमंत्री रह चुके हैं लेकिन उनके काम के डिक्टेटरशिप तरीके की वजह से उन्हें कुछ वक्त के बाद ही हटाना पड़ा. राज्य में खंडूरी, निशंक और भगत सिंह कोश्यारी के नेतृत्व में पार्टी के भीतर तीन गुट बन चुके हैं. ऐसे में निशंक को हटा कर बीजेपी ये गुटबाजी भी खत्म करना चाहती है. 10 सितंबर को पीएम के साथ मुख्यमंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने निशंक दिल्ली आएंगे तब वो पार्टी अध्यक्ष गड़करी से मिलेंगे. इसके बाद ही उनको हटाने की औपचारिक ऐलान किया जा सकता है.

अगले साल उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और भाजपा इस बार वहां कोई गलती नहीं चाहती है. कर्नाटक में दो खेमों में बंटी भाजपा को उत्तराखंड में भी अपने सितारे गर्दिश में नजर आ रहे हैं इसलिए वो हर कदम बहुत फूंक-फूंक रख रही है. उत्तराखंड राज्य में लोग मौजूदा सीएम रमेश पोखरियाल निशंक से खुश नहीं हैं. उन्होंने जबसे कमान संभाली है तब से ही उनके ऊपर भ्रष्टाचार समेत कई आरोप लग चुके है. नई दिल्ली में भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिन गडकरी के आवास पर गुरुवार को करीब ढाई घंटे एक बैठक हुई जिसमें निशंक के नेतृत्व को लेकर बहस की गई. एक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक निशंक से लोग बहुत ज्यादा दुखी और परेशान हैं. इसलिए भाजपा अगले चुनावों तक निशंक को सीएम पद से हटाने का मन बना रही है.

इस विश्लेषण को तैयार करने में कई समाचार एजेंसियों और मीडिया माध्यमों की खबरों से इनपुट लिया गया है. भड़ास4मीडिया पर जल्द ही पढ़ेंगे- पत्रकारिता और पत्रकारों के लिए अभिशाप साबित हुए पत्रकार सीएम निशंक


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