हिस्ट्रीशीटर है झांसी का एक सरकारी वकील

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लखनऊ : डीएम और एसएसपी की रिपोर्ट से हुआ खुलासा : झांसी में सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) के पद पर एक ऐसे वकील की नियुक्ति की गई जिसकी बकायदा हिस्ट्रीशीट है। नूर अहमद मंसूरी नाम के इस शख्स के बारे में जिला मजिस्ट्रेट झांसी की रिपोर्ट कहती है-‘नूर अहमद एक आपराधिक प्रवृत्ति का है जिसके विरुद्ध मारपीट, हत्या, बलवा, धोखाधड़ी, डकैती करने जैसे संगीन अपराध दर्ज हैं। इतनी अधिक संख्या में उपर्युक्त व्यक्ति के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट बिना कारण दर्ज हो पाना संभव नहीं है।’

डीएम अमृत अभिजात की यह रिपोर्ट उस दौर की है जब नूर आलम ने शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। एक डीएम, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट के बावजूद प्रदेश सरकार ने नूर अहमद को सरकारी वकील नियुक्त कर दिया। यह बात दीगर है कि कई मामलो में नूर अहमद अवमुक्त हो चुके हैं। प्रदेश भर में नियुक्त किए गए सरकारी वकीलों में से कई अपराधी प्रवृत्ति के हैं। झांसी में नियुक्त किए गए नूर अहमद मंसूरी की तो बकायदा हिस्ट्रीशीट है। 9 मार्च 2007 को जिला मजिस्ट्रेट झांसी (प्रपत्र संख्या-1411/20-शस्त्र अनुभाग 2006-2007) की रिपोर्ट में कहा गया कि एक व्यक्ति ने प्रार्थना पत्र देकर कहा था कि नूर अहमद मंसूरी का पूरा परिवार आपराधिक एवं हिस्ट्रीशीटर है। अपराध छिपाकर शस्त्र लाइसेंस लेना चाहते हैं।

जिला मजिस्ट्रेट झांसी ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से रिपोर्ट मांगी। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि नूर अहमद मंसूरी जिसकी हिस्ट्रीशीट संख्या 5 ब है। उसके खिलाफ 13 अभियोग पंजीकृत हुए हैं। जांच से आवेदक के दुराचारी होने एवं आपराधिक पृष्ठभूमि की पुष्टि हुई है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की यह आख्या उनके पत्र संख्या (रीडर-शस्त्र/96 दिनांक 27 जुलाई 96) द्वारा भेजी गई थी। इसके बाद नूर अहमद मंसूरी को शस्त्र का अनुज्ञा पत्र जारी करना रोक दिया गया तथा पत्रावली बंद कर दी गई।

यही नहीं नूर अहमद मंसूरी ने यह प्रार्थना पत्र दिया कि उसके प्रति कोई भी आपराधिक प्रकरण लम्बित नहीं है और न ही उसे किसी अभियोग में दंडित किया गया है। एसएसपी झांसी की रिपोर्ट में साफ है किनूर अहमद मंसूरी के खिलाफ 17 पुलिस द्वारा हस्तक्षेपनीय एवं 22 पुलिस द्वारा अहस्तेक्षपनीय अपराध दर्ज किए गए हैं। इसी रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने कहा कि नूर अहमद की आम शोहरत अच्छी नहीं है। उस पर यूपी गुंडा नियंत्रण की धारा-3 के तहत कार्रवाई की गई है। नूर अहमद द्वारा पूर्व में सही तथ्यों को छिपाकर मिथ्या प्रत्यावेदन प्रस्तुत कर शस्त्र अनुज्ञा पत्र जारी करने का आदेश 22 जून 1996 को कराया गया है।

इन रिपोर्टों के बाद 12 नवम्बर 2010 को कोतवाली नगर झांसी में नूर अहमद मंसूरी समेत चार लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा-395 के तहत मामला दर्ज किया गया था। रिपोर्ट दर्ज कराई थी श्रीमती सरोज ने। यह बात दीगर है कि नूर अहमद कई मामलों में अवमुक्त हो चुके हैं लेकिन अभी कई मुकदमे लम्बित हैं। एक ऐसे शख्स जिसकी हिस्ट्रीशीट है, को सरकारी वकील नियुक्त कर देने से यह साफ है कि प्रदेश सरकार ने वकीलों की नियुक्ति में किस स्तर तक लापरवाही बरती है। वकील को नियुक्त करने से पहले उसके आचरण की जानकारी तक नहीं ली गई, नतीजा अपराधी प्रवृत्ति के लोग भी सरकारी वकील बन गए।

सुनीत श्रीवास्तव की यह रिपोर्ट लखनऊ-इलाहाबाद से प्रकाशित होने वाले अखबार डेली न्‍यूज एक्टिविस्‍ट में प्रकाशित हो चुका है. वहीं से साभार लेकर प्रकाशित किया जा रहा है.


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