नाबालिग लड़की को भगाने का आरोपी भी बना दिया गया सरकारी वकील

E-mail Print PDF

: पश्चिम बंगाल में दर्ज है मुकदमा : गड़बडिय़ों पर समाज कल्याण मंत्री ने भी लिखा था पत्र : लखनऊ। आरोप नाबलिग लड़की भगाने का। मुकदमा चल रहा है कि दूसरे राज्य में। पश्चिम बंगाल के थाना रानीगंज में दर्ज है एफआईआर। यह शख्स हैं मिर्जापुर के मोहनलाल दुबे जिनकी नियुक्ति जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) के पद पर की गई है। मुकदमा पश्चिम बंगाल में और अरेस्ट स्टे करवाया इलाहाबाद हाईकोर्ट से।

बाद में उस रिट को खारिज कर दिया गया और स्टे खत्म हो गया। उस मुकदमे में मोहन लाल दुबे फरार बताए जाते हैं, फिर भी नवीनीकरण कर दिया गया। पूरे प्रदेश में वकीलों के नवीनीकरण पर बसपा सरकार के समाज कल्याण मंत्री इंद्रजीत सरोज ने प्रमुख सचिव न्याय को एक पत्र लिखा था। उस पत्र में कहा था कि मुख्यमंत्री प्रदेश के शासकीय अधिवक्ताओं को हटाने का कार्य कर रही हैं जबकि जिलाधिकारी पुराने सरकारी वकीलों के नवीनीकरण की संस्तुति कर रहे हैं। जो शासनादेश के खिलाफ है।

सरकारी वकीलों की फेहरिस्त में मिर्जापुर के मोहनलाल दुबे के खिलाफ पश्चिम बंगाल के थाना रानीगंज में (मुकदमा अपराध संख्या-1/86) आईपीसी की धारा-363, 366, 368 और 120 बी के तहत मुकदमा दर्ज है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक इस केस में मोहनलाल दुबे ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से अरेस्ट स्टे करवा लिया था। बाद में रिट खारिज हो गई और स्टे खत्म हो चुका है। उनके खिलाफ कोर्ट में रिट लम्बित है। जिसमें सरकार का शपथ पत्र भी आ चुका है, जिसमें सरकार की ओर से उक्त आपराधिक वाद के लम्बित होने के सम्बंध में कोई टिप्पणी नहीं की गई है। रिट लम्बित रहते हुए भी मोहनलाल दुबे का नवीनीकरण कर दिया गया।

वहीं प्रतापगढ़ में एक वकील की नियुक्ति पर बसपा के जोनल कोऑर्डिनेटर की शिकायत पर प्रदेश सरकार के समाज कल्याण मंत्री इंद्रजीत सरोज ने एक पत्र प्रमुख सचिव न्याय व विधि परामर्श (एलआर) को लिखा था जिसमें उन्होंने कहा था किमुख्यमंत्री प्रदेश के शासकीय अधिवक्ताओं को हटाने का काम कर रही हैं लेकिन जिलाधिकारी पुराने सरकारी वकीलों के नवीनीकरण की संस्तुति कर रहे हैं जो कि शासनादेश के खिलाफ है। उस पत्र में यह भी कहा गया है कि सपा शासनकाल में हुई नियुक्ति का ही नवीनीकरण चुपके से कर दिया गया है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकारी वकीलों के नवीनीकरण व नियुक्तियों में गड़बडिय़ां किस स्तर पर की गई हैं।

प्रदेश सरकार के एक मंत्री को जब यह लिखने के लिए मजबूर होना पड़ा कि डीएम पुराने वकीलों का नवीनीकरण कर रहे हैं। सवाल यह नहीं कि नवीनीकरण नहीं होना चाहिए। सवाल यह है कि ऐसे लोगों का नवीनीकरण क्यों जिनके खिलाफ मुकदमा दर्ज है और अभी लम्बित है। आखिर ऐसे लोगों के नवीनीकरण के पीछे किसका खौफ है? किसने दबाव डाला? ऐसी गड़बडिय़ों में इन सवालों का जवाब मांगा जाएगा।

लखनऊ और इलाहाबाद से प्रकाशित हिंदी दैनिक डेली न्यूज एक्टिविस्ट में प्रकाशित सुनीत श्रीवास्तव की रिपोर्ट


AddThis