ईडी अफसर राजेश्वर सिंह नाटक कर रहे हैं : सुबोध जैन

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: प्रवर्तन निदेशालय भ्रष्टाचार के आरोपी अफसरों को संरक्षण दे रहा है : राजेश्वर को ईडी में प्रतिनियुक्ति भी नियमों में छूट देकर दी गई : प्रवर्तन निदेशक अरुण माथुर और आईजी राजीव कृष्ण के आफिसों से फोन करके मुझे धमकाया जा रहा है : करप्शन के खिलाफ कंप्लेन करने वाले की नौकरी गई, जिसकी शिकायत की उसके अधिकार बढ़ गए :

यशवंत जी, मैंने 4 अक्टूबर को आपके पोर्टल पर प्रकाशित लेख पढ़ा। इसमें प्रवर्तन निदेशालय के सहायक निदेशक श्री राजेश्वर सिंह का साक्षात्कार था। श्री सिंह का कहना है कि मैंने उनके खिलाफ विभिन्न मंत्रालयों में दर्जनों शिकायतें कर रखी हैं, जिनका जवाब देते हुए वह परेशान हो चुके हैं। इसलिए वे 2जी मामले की जांच से हटना चाहते हैं। दरअसल यह एक ऐसा नाटक है जिसे श्री सिंह ने काफी सोच समझकर किया है। श्री सिंह का कहना है कि मैंने उनके खिलाफ न्यूज टेलीकास्ट कराने का प्रयास इसलिए किया था क्योंकि वह सहारा ग्रुप के खिलाफ कार्रवाई करने जा रहे थे। हालांकि हकीकत कुछ और ही है।

वास्तविकता यह है कि मैंने श्री सिंह के भ्रष्ट कारनामों की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय में सहारा ग्रुप में आने से पहले से कर रखी थी। मेरे पत्रकार मित्र इस बात से वाकिफ हैं कि मैं आरटीआई के क्षेत्र में करीब पांच वर्ष से कार्य कर रहा हूं। इसी माध्यम से मैंने श्री सिंह के कारनामों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए वित्त मंत्रालय में पांच आवेदन भी किए थे। लेकिन इन सभी आवेदनों को मंत्रालय के राजस्व विभाग ने प्रवर्तन निदेशालय को स्थानांतरित कर दिया। निदेशालय ने शेडयूल-2 का हवाला देकर कहा कि निदेशालय सूचना अधिकार कानून से बाहर है। अतः सूचना नही दी जा सकती। हालांकि हकीकत यह है कि भ्रष्टाचार के मामलों में मांगी गई जानकारी देने के लिए निदेशालय भी बाध्य है। मगर फिर भी सूचना इसलिए नहीं दी गई क्योंकि निदेशालय के कई बड़े अधिकारी श्री सिंह को संरक्षण दे रहे हैं।

हैरानी की बात है कि वित्त मंत्री ने न्यूजपेपर्स में बयान दिया था कि सुबोध जैन की शिकायतें काफी गम्भीर हैं, लिहाजा उनकी जांच कराई जा रही है। इतना ही नहीं, महामहिम राष्ट्पति, उप राष्ट्पति, प्रधानमंत्री, कानून मंत्री सहित कई मामनीय सांसदों ने मेरी शिकायतों को गंभीर मानते हुए वित्त मंत्रालय से जांच कराने के लिए पत्र लिखे हुए हैं। लेकिन मंत्रालय के राजस्व विभाग में तैनात कुछ अधिकारी इन शिकायतों को दबाकर बैठ गए। मैंने इस संबंध में उन अधिकारियों की भी शिकायतें की तो फाईल आगे बढी। लेकिन प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक श्री अरूण माथुर ने विभाग द्वारा कई बार लिखने के बाद भी उन पत्रों पर अपनी टिप्पणियां नहीं दी।

हैरानी की बात तो यह है कि उन्होंने श्री सिंह के खिलाफ गंभीर शिकायतें होने के बाद भी उन्हें सतर्कता शाखा का काम सौंप दिया। इतना ही नहीं, एक अन्य सहायक निदेशक श्री शरद चैधरी को निदशालय में समाहित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी। जबकि उनके खिलाफ भी भ्रष्टाचार के मामलों में जांच हो रही है। इससे साफ है कि निदेशालय भ्रष्टाचार के आरोपी अफसरों को संरक्षण दे रहा है। मैंने इस बात की शिकायत भी प्रधानमंत्री महोदय से की है।

श्री सिंह एक ओर तो खुद को बेदाग बता रहे हैं दूसरी और उनके जीजा और मेरठ जोन के पुलिस महानिरीक्षक श्री राजीव कृष्ण तथा प्रवर्तन निदेशक श्री अरूण माथुर के कार्यालय से फोन करके मुझे और मेरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी जा रही है। इसकी शिकायतें मैंने उत्तर पूर्वी दिल्ली के उस्मानपुर थाने के अलावा सीबीआई, गृह मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय तक में की हुई हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय एवं सीबीआई ने मेरी शिकायतों को पुलिस आयुक्त के पास कार्रवाई के लिए भेज दिया है। इससे साफ है कि श्री सिंह और उन्हें संरक्षण दे रहे सरकारी सेवा में कार्यारत कुछ गुंडे किस औछी हरकत पर उतर आए हैं।

श्री सिंह का यह कहना कि वह 2जी मामले की जांच नहीं कर पा रहे हैं। यह साफ करता है कि वह सरकारी प्रक्रिया से किस कदर भाग रहे हैं। कल को कोई और भी कह सकता है कि उसके खिलाफ चल रही जांच के कारण वह अपना काम नहीं कर पा रहा है तो क्या उस व्यक्ति के खिलाफ जांच बंद कर दी जाएगी? श्री सिंह ने पिछले दिनों माननीय सर्वोच्च न्यायालय में अर्जी लगाकर गुहार लगाई कि सुबोध जैन की शिकायतों के कारण उनके खिलाफ चल रही जांच बंद करने का आदेश दिया जाए। अजीब बात है कि श्री सिंह एक ओर तो खुद को बेदाग बता रहे हैं दूसरी ओर न्यायालय से यह आदेश पारित कराना चाहते हैं कि उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों में जांच न हो।

मेरा माननीय न्यायालय से अनुरोध है कि 2जी मामले की जांच के बाद श्री सिंह के खिलाफ अपनी निगरानी में समयबद्ध ढंग से जांच कराए। ताकि देश की जनता को पता लग सके कि भ्रष्टाचार के मामले में लिप्त अधिकारी 2जी की जांच कितनी ईमानदारी से कर रहा था। आपको यह जानकार भी हैरानी होगी कि श्री सिंह को प्रवर्तन निदेशालय में प्रतिनियुक्ति भी नियुक्ति नियमों में छूट देकर मिली थी। यह बात आरटीआई के माध्यम से खुद वित्त मंत्रालय ने प्रदान की है।

जहां तक जांच के कारण प्रभावित होने की बात है तो इस मामले में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का सबसे ज्यादा नुकसान मुझे हुआ है। सहारा ग्रुप ने मेरा साथ देने के स्थान पर मुझे नौकरी से निकाल दिया। क्या श्री सिंह के साथ भी ऐसा कुछ हुआ है? उन्हें तो और ज्यादा अधिकार मिल रहे हैं। भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद सतर्कता विभाग का जिम्मा मिलना तो यही बताता है कि अफसरों के कृपापात्र यहां कुछ भी कर सकते हैं। उनके भ्रष्ट कारनामों को देखने वाला कोई नहीं है।

सुबोध जैन

सुबोध जैन

स्वतंत्र पत्रकार

दिल्ली

संपर्क- This e-mail address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it

यह लिखित प्रतिक्रिया सुबोध जैन ने भड़ास4मीडिया पर प्रकाशित जिस खबर पर दी है, उसे पढ़ने के लिए इस शीर्षक पर क्लिक करें- सहारा की गुंडई से त्रस्त ईडी अफसर ने खुद को 2जी जांच से हटाने की मांग की


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