jusitce for मां : वीएन राय ने दिया समर्थन

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महिलाओं को बंधक बनाए जाने से संबंधित खबर व तस्वीर


: लखनऊ में आज शाम को यूपी के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष उठेगा मुद्दा : आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने मानवाधिकार हनन पर चिंता जताई : घटनाक्रम के बारे में जानकारी मिलने पर देश भर के पत्रकार स्तब्ध : चार महिलाओं को बंधक बनाकर पूरी रात और अगले दिन दोपहर तक गाजीपुर जिले के नंदगंज थाने में रखने के मामले ने तूल पकड़ लिया है. जिसे भी इस प्रकरण के बारे में पता चल रहा है कि वह सब पढ़ने-जानने के बाद स्तब्ध हो रहा है. देश भर से फोन और मेल भड़ास4मीडिया टीम के पास आने का सिलसिला जारी है.

इस बीच पूर्व आईपीएस अधिकारी और जनपक्षधर पुलिसिंग के हिमायती वीएन राय ने भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत सिंह को फोन कर पुलिस द्वारा मां को बंधक बनाने व दुर्व्यवहार किए जाने की घटना पर चिंता जताई. उन्होंने इस मसले को उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) करमवीर सिंह के समक्ष पेश करने का आश्वासन दिया. साथ ही संबंधित मेल को अपने अन्य साथी, कनिष्ठ व वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक पहुंचाने की बात कही.

इन दिनों महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के कुलपति के रूप में कार्य कर रहे वीएन राय ने कहा कि महिलाओं और बच्चों के प्रति पुलिस का असंवेदनशील रवैया दुर्भाग्यपूर्ण है. इस मामले के दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए. एक अन्य आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने लखनऊ से फोन कर कहा कि सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट ने कई बार पुलिस को निर्देशित किया है कि वह महिलाओं व बच्चों के प्रति सुलूक करने के मामले में संवेदनशील रहे और गाइडलाइन्स व कानून का पालन करे लेकिन इस घटना के प्रमाणों, तस्वीरों, वीडियो से जाहिर है कि गाजीपुर पुलिस ने गलत काम किया है. इस प्रकरण से सबक लेकर एक ऐसा सिस्टम डेवलप करना चाहिए जिससे किसी भी आम-खास व्यक्ति के परिवार की महिलाओं व बच्चों से गलत व्यवहार नहीं किया जाए. अमिताभ ठाकुर ने भी जांच कराकर दोषी मिलने वाले पुलिस वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.

उधर, देश के कई आरटीआई एक्टिविस्टों ने इस मसले से संबंधित जानकारियां आरटीआई दायर कर मंगाने का ऐलान किया है. भड़ास4मीडिया के पास आए कई मेल में कहा गया है कि यूपी पुलिस का व्यवहार काफी दिनों से जनविरोधी हो गया है और अगर एक पत्रकार के परिवार के साथ ऐसा सुलूक किया जा रहा है तो आम लोगों व उनके घरवालों का क्या हाल होगा.

इस बीच, लखनऊ से सूचना है कि कई पत्रकार संगठन, ब्यूरो चीफ व सीनियर जर्नलिस्ट इस मसले को आज गृह सचिव और कानून व्यवस्था के लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के समक्ष उठाएंगे. इन अफसरों की प्रतिदिन शाम को नियमित प्रेस ब्रीफिंग होती है. इस ब्रीफिंग में पत्रकारों ने पत्रकार यशवंत की मां व अन्य महिलाओं को बंधक बनाकर थाने में रखे जाने के जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों को बर्खास्त करने और पूरे थाने को निलंबित व लाइन हाजिर करने की मांग करेंगे. उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के वरिष्ठ-कनिष्ठ पत्रकारों ने गाजीपुर जिले में पत्रकार यशवंत के परिवार के साथ हुई घटना की निंदा की और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की.

justice for मां'justice for मां' अभियान के बारे में यशवंत सिंह ने कहा कि यह कोई मेरी या तेरी मां का मामला नहीं बल्कि सभी के मां व परिवार का मसला है. हम लोगों के दूर-दराज गांवों में रहने वाले परिजनों के मान-सम्मान की गारंटी अगर कानून व्यवस्था के रखवाले नहीं कर पाते तो इन्हें खुद ब खुद नैतिक रूप से इस्तीफा दे देना चाहिए और अगर ऐसा नहीं करते हैं तो इनके खिलाफ अभियान चलाकर इनकी वर्दी उतरवा लेनी चाहिए. यशवंत ने बताया कि गाजीपुर के एसएसपी एल. रवि कुमार को एक पत्र मय सुबूतों के भेज दिया गया है. इस पत्र की प्रतिलिपि यूपी पुलिस के वरिष्ठतम लोगों को भेजने के अलावा राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति, महिला आयोग, मानवाधिकार आयोग, यूपी के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों, डीआईजी, आईजी, देश के वरिष्ठ संपादकों, वेब-ब्लागों के माडरेटरों-एडिटरों व अन्य प्रमुख लोगों के पास भेजी गई है. यशवंत ने आह्वान किया कि इस घटना से संबंधित खबरों, सूचनाओं, वीडियो आदि को ज्यादा से ज्यादा लोगों के पास भेजने में वेब व ब्लागों की दुनिया के लोगों को आगे आना चाहिए ताकि 'justice for मां' कंपेन से ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़कर ऐसे मामलों के प्रति जागरूक बनाया जा सके और सत्ता में बैठे लोगों पर दबाव कायम किया जा सके ताकि फिर किसी और की मां इन हालात से रूबरू न हो.

ताजी जानकारी के अनुसार करीब एक दर्जन से ज्यादा ब्लागों, वेबसाइटों पर इस घटनाक्रम से संबंधित खबरें प्रकाशित कर दी गई हैं और अभी तक जो सूचना है उसके मुताबिक 15 हजार लोगों तक मेल आईडी के जरिए justice for मां कंपेन से संबंधित खबरों को भेजा जा चुका है. यह क्रम अभी जारी है. भड़ास4मीडिया की तरफ से जारी एक अपील में देश के सभी मीडियाकर्मियों, साहित्यकारों, प्रगतिशील व लोकतांत्रिक व्यवस्था में आस्था रखने वाले लोगों, नौकरीपेशा लोगों से अनुरोध किया गया है कि वे इस अभियान से जुड़ें. इसके लिए उन्हें बस करना ये होगा कि वे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पूरे प्रकरण से जुड़ी जानकारी पहुंचाएं और यूपी पुलिस व सरकार के जनविरोधी रवैये की निंदा करते हुए इस मामले में न्याय की मांग करें. मेल में क्या भेजना है, कैसे भेजना है, इसके बारे में विस्तृत जानकारी भड़ास4मीडिया पर प्रकाशित है, इसे पढ़ने के लिए इस शीर्षक पर क्लिक करें- मां को न्याय : कैसे करें, क्या करें


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