मायावी पुलिस ने माताओं का फिर किया अपमान

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मायावती की मायावी पुलिस ने फिर महिलाओं के गिरहबान पर हाथ डाल दिया। चुनावी झगड़े में शामिल लोगों को तो पुलिस नहीं दबोच सकी, लेकिन बाराबंकी के एक प्रतिष्ठित परिवार पर उसने कहर ढा दिया। गाड़ियां तोडीं, खिड़की-दरवाजे ढहा दिये और जो भी मिला, उसे लाठियों से जमकर पीटा। इतने पर भी मन नहीं भरा तो घर की महिलाओं को बाल पकड़ कर घसीटा और उन्हें जीप पर ठूंस कर थाने में सीखचों के पीछे धकेल दिया। हैरत की बात तो यह रही कि इस पूरे पुलिसिया कर्मकाण्ड का नेतृत्व बाराबंकी की महिला एएसपी श्रीपर्णा गांगुली ने किया।

बाराबंकी के असंद्रा थाने के अचीठी गांव में परसों मतदान का तीसरा दौर था। मतदान के बाद शाम घिर आयी और गांव-जंवार के कुछ लोगों में कहासुनी हो गयी। बात मारपीट तक पहुंची। देर रात पुलिस को पता चला तो एएसपी श्रीपर्णा गांगुली और असंद्रा के दारोगा कोमल सिंह भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। मामला तब तक शांत हो चुका था। लेकिन मौके पर कुछ न मिलने से झुंझलायी गांगुली खाली हाथ लौटने को तैयार ही नहीं थीं। फिर शुरू हुआ संदेह के आधार पर ग्रामीणों की लानत मलामत करने का दौर। जो मिला, उसे ही लठिया दिया पुलिस ने। क्या मर्द क्या औरत और क्या बच्चे। घण्टे भर तक तांडव के बाद पुलिसवालों की करतूत पर जब गांव के ही एक प्रतिष्ठित परिवार के लोगों ने हस्तक्षेप किया तो पुलिस का कोप उसी पर टूटा। खिड़की-दरवाजा, तोड़ा गया। घर के वाहनों को भी तोड़ा और तबाह किया गया। लेकिन इतने पर भी जब मन नहीं भरा तो पुलिसवालों ने गांगुली के इशारे पर घर की तीन महिलाओं को बाल पकड़ कर घसीटा और जीप पर लाद कर थाने ले गये। कल सुबह जब इस प्रकरण पर हंगामा खड़ा हुआ तब पुलिस ने आरती सिंह समेत तीनों महिलाओं को छोड़ा। फिलहाल पूरा गांव स्तब्ध है। अब बाराबंकी पुलिस के पास इस बात का कोई भी जवाब नहीं है कि इन महिलाओ को उसने क्यों पीटा, घसीटा, थाने ले गयी और उन्हें रात भर थाने पर क्यूं बिठाये रखा।  मिली खबरों के मुताबिक पुलिस के इस रवैये को लेकर ग्रामीणों में खासा रोष है और वे इसकी शिकायत करने लखनऊ पहुंच रहे हैं।


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