माया के वर्दी वाले गुंडों से नहीं डरूंगा

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प्रिय भाई यशवंत जी, उत्‍तर प्रदेश के माया राज में पुलिस वालों की मार झेल रहा हूं, जहां लोगों को आवाज उठाना भारी पड़ता है. मुझे अखबारों में लिखना भारी पड़ गया. माया के इन गुण्‍डों ने मुझे कालेज से लौटते समय पकड़ लिया और पांच दिन तक बिना किसी सबूत व कारण के रिमांड पर रखा, फिर तेरह फर्जी केस लगाकर मुझे एक बड़े गिरोह के साथ जोड़ दिया गया. जिसके चलते मुझे तीन माह सोलह दिन जेल में काटना पड़ा.

मैं चीखता-रोता रहा. जिस समाज की लड़ाई मैं लड़ रहा था, उसमें से कोई मुझे बचाने नहीं आया, जबकि मेरा परिवार एक सम्‍पन्‍न और आदर्शवादी माना जाता है, पर माया राज के आते ही खत्म हो गया. मेरे जैसे जाने कितने लोग हैं जो प्रतिदिन सातये जाते है. व्‍यस्‍त आबादी वाले लोग अपने-अपने में लगे हुए हैं, इनको जगाना ही बस मेरा उद्देश्‍य है. मैं उत्‍तर प्रदेश के बुंदेलखंड के छोटे पिछड़े जिला ललितपुर के एक गांव डोंगर कला का निवासी हूं. पत्रकारिता का छात्र हूं.

आज मुझे पत्रकारिता से जुड़े हुए आठ वर्ष हो गए. इन आठ वर्षो से मैं दर-दर भटक रहा हूं. बुहत से न्यूज़ पेपर, मैग्‍जीन और न्यूज़ चैनल मैं काम किया. मुझे जिस जगह की तलाश थी शायद अब वह मुझे मिल रही है. क्योकि प्रेस में आज इन बेबस बिजनेस मैन और रिश्वत की बुनियाद में दबे हुए लोगो के साथ काम नहीं करना चाहता हूं. खुद की लड़ाई में फंस कर भी ज्‍यादा नहीं उलझना चाहता हूं. मुझे तो चिता है इन सोये हुए लोगों की. ये लोग कब त जातिवाद, क्षेत्रवाद की लड़ाई में फंसे रहेंगे. मेरी बात आप तक पहुंचाने का मकसद ये था कि आप तो मेरे केस की जाँच उच्च स्तर पर नहीं करा सकेंगे, बस लिखने को जगह जरुर देते रहिये.

शैलेन्‍द्र पराशर


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