चौकी इंचार्ज ने पत्रकार को किया अपमानित

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: गाजीपुर में पुलिस की दबंगई जारी : गाजीपुर में गोरा बाजार चौकी इंचार्ज एक पत्रकार को कालार पकड़कर सबके सामने अपमानित किया। उक्‍त मामला त्रिस्‍तरीय पंचायत चुनाव की मतगणना के दौरान घटित हुई। सरकारी महकमें में पत्रकारों को फर्जी कहने का चलन सा हो गया है। उक्‍त दारोगा ने भी एक अखबार के पत्रकार को फर्जी कहकर मतगणना स्‍थल से बाहर निकाल दिया। इस घटना के बाद से जनपद के पत्रकारों में रोष व्‍याप्‍त है।

जनपद गाजीपुर के मीडियाकर्मियों को खुद अपने हस्ताक्षर से पास जारी करने वाले प्रभारी सहायक सूचना अधिकारी उन्हीं मीडियाकर्मियों को फर्जी कहते आ रहे थे। जिसके चलते दूसरे चरण के मतदान के बाद से ही जनपद के कई पत्रकार एसोसिएशन सूचना विभाग का बहिष्कार कर दिया तथा उक्त अधिकारी के बदलने की मांग पर अड़ गए थे। इसके बाद अब अन्य सरकारी कर्मियों ने भी जनपद के पत्रकारों को फर्जी कहना आरम्भ कर दिया है। जिसके चलते जनपद के मीडियाकर्मियों को प्रतिदिन अपमानित होना पड़ रहा है।

ताजा घटना त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दूसरे दौर के गणना के दिन का है। जहां पर वाराणसी से प्रकाशित प्रात: कालीन संस्करण समाचार ज्योति के पत्रकार विनोद गुप्ता, जो खबरों का संकलन करने के लिए, सुबह से ही डटे हुए थे। कई घण्टों  तक खड़ा रहने के बाद जब वे मतगणना स्‍थल से पानी पीने के लिए वे बाहर सड़क पर आए तो सुरक्षा मे तैनात गोरा बाजार चौकी इंचार्ज श्रीधर पाण्डेय ने पहले तो अपशब्दों का प्रयोग करते हुए उन्हें रोका। जब उन्‍होंने चौकी इंचार्ज को सूचना विभाग से जारी पास दिखाया तो उसे फर्जी बताते हुए हजारों लोगों की भरी भीड़ के सामने कालर पकड़ कर बैरियर के बाहर तक धक्‍का देकर निकाल दिया गया। इस दौरान इस दरोगा ने उक्‍त मीडियाकर्मी को अपशब्‍द कहने के साथ यह भी कहा कि मुझे मालूम है जनपद में बहुत ज्‍यादा फर्जी पत्रकार हो गये हैं। ऐसे फर्जी पत्रकारों को पास भी जारी किया गया है।

जब इस बात की जानकारी एएसपी शलभ माथुर को पत्रकार एसोसिएशन के लोगों ने दिया तो वे तुरन्त मौके पर पहुंचे। मामले की गम्भीरता को समझते हुए उन्‍होंने उक्त दरोगा के कृत्यों के लिए खुद माफी मांगी। हालांकि इस दौरान भी उक्त दरोगा अपनी गलती मानने को तैयार नही था। हालांकि सूत्र बताते हैं उक्‍त दारोगा बहुत ही शातिर किस्‍म का है। उक्त दरोगा के पास एक मास्टर चाभी है, जिसकी सहायता से वो आए दिन कचहरी या फिर भीड़भाड़ वाले स्थान से मोटर साइकिल उठवाकर कोतवाली पहुंचा देता है। जब भुक्त भोगी अपनी गाड़ी की चोरी का मुकदमा दर्ज कराने पहुंचता है तो इधर-उधर की बात कह कर मोटी रकम वसूली जाती है, इसके बाद ही भुक्‍तभोगी की गाडी वापस होती है।

गाजीपुर से अनिल कुमार की रिपोर्ट.


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