निशंकजी, मेहरबानी बड़े अखबारों पर ही क्यों!

E-mail Print PDF

: निशंक सरकार ने छोटे अखबारों के विज्ञापन का भुगतान अभी तक नहीं किया : उत्तराखण्ड सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग ने साप्ताहिक व छोटे समाचार पत्रों के कई माह पुराने विज्ञापन बिलों का भुगतान नहीं किया है. इससे इन अखबारवालों की दीवाली फीकी रही. हरिद्वार में कुंभ को सम्पन्न हुए 9 माह से अधिक बीत गये और सरकार ने कुंभ के सफल आयोजन पर वाहवाही भी लूट ली लेकिन उत्तराखण्ड की मीडिया को दिये गये विज्ञापनों का भुगतान अभी तक नहीं किया.

उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक पत्रकार भी रह चुके है और पत्रकारों के हिमायती होने का दावा भी उनके लोग करते रहते हैं. पर वे शायद छोटे अखबार वालों के दर्द को नहीं जानते, सिर्फ बड़े अखबार वालों से दोस्ती रखने में यकीन करते हैं. निशंक खुद जानते हैं कि छोटे अखबार वाले धन के अभाव में किस तरह से अखबार निकालते हैं. इसके बावजूद उनके राज में आज छोटे व मझोले मीडिया मालिकों की हालत दयनीय होती जा रही है. या तो अधिकारी उन्हें सही हालात से रूबरू नहीं करा रहे हैं या फिर जानबूझकर मीडिया के हितों की अनदेखी की जा रही है.

राज्य का सूचना विभाग मुख्यमंत्री के अधीन है. ऐसे में यह कहना कि उन्हें छोटे अखबार वालों के साथ हो रहे अन्याय के बारे में पता नहीं है, एक तरह से अविश्वसनीय कथन होगा. सरकार का आँख और कान सूचना विभाग होता है. इसलिए अपनी झूठी तारीफों के कासदें सुनकर सीएम भले ही खुश हों लेकिन हकीकत इससे परे है. मीडिया जगत को मुख्यमंत्री से बड़ी आशा थी. किन्तु अब निराशा हाथ लग रही है. सिर्फ बड़े समाचार पत्रों पर ही मेहरबानियां हो रही है जिससे कुछ हासिल होने वाला नहीं है. अगर यही हालात रहे तो राज्य की जनता और राज्य के बुद्धिजीवी वक्त आने पर निशंक और उनके लोगों को सबक सिखाएगी.

देहरादून से आई एक चिट्ठी पर आधारित. पत्र में उल्लखित तथ्यों के बारे में अगर किसी को कुछ कहना हो तो नीचे कमेंट बाक्स का सहारा ले सकता है.


AddThis