पुलिस वालों पर हिंदी में दो वेबसाइटें

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वेब पर हिंदी की दुनिया तेजी से बढ़ती जा रही है. भड़ास निकालने का दौर तेज हो रहा है. वेब के लोगों ने जनरलाइज न्यूज की बजाय अब स्पेशफिक न्यूज सेक्शन्स को पकड़ा है. मीडिया पर केंद्रित खबरों के कई पोर्टल लांच हो जाने के बाद अब पुलिस-प्रशासन पर केंद्रित पोर्टलों का दौर शुरू हुआ है. भड़ास4मीडिया की बेहद सफलता से प्रभावित होकर एनएनआई वाले उमेश कुमार ने भड़ास शब्द का इस्तेमाल करते हुए भड़ास4पुलिस डॉट कॉम नामक पोर्टल की शुरुआत की है.

उमेश कुमार ने इस पोर्टल का एडिटर प्रवीण कुमार को नियुक्त किया है. इस पोर्टल में कई पुलिस अधिकारियों के इंटरव्यू, घटनाक्रम, खुलासे आदि को स्थान दिया गया है. पुलिस पर केंद्रित हिंदी में पहला पोर्टल पुलिसवाला डॉट इन नाम से टीवी जर्नलिस्ट बृज दुग्गल ने शुरू किया. इस पोर्टल का संपादक दिनेश कुमार नियुक्त किए गए हैं. इस पोर्टल में भी कई पुलिस अधिकारियों के इंटरव्यू के अलावा कई अन्य तरह की खबरों-घटनाओं को स्थान दिया गया है.

दोनों ही पोर्टलों ने प्रत्येक जिले में रिपोर्टर नियुक्त करने का काम शुरू कर दिया है और इस बाबत वेबसाइट पर आवेदन भी आमंत्रित किया है. देखना है कि ये दोनों पोर्टल पुलिस वालों की पोलखोल के जरिए और आम आदमी को राहत पहुंचाने वाले कंटेंट के दम पर पढ़े-लिखे ईमानदार लोगों में कितनी सफलता, चर्चा और विश्वास हासिल कर पाते हैं या फिर सिस्टम का हिस्सा बनकर अंततः पुलिस अफसरों के पीआर पोर्टल में तब्दील होकर रह जाते हैं.

भड़ास4पुलिस डॉट कॉम में भड़ास शब्द के इस्तेमाल पर कई लोगों को ये भ्रम है कि यह पोर्टल भड़ास4मीडिया से संबंधित है जबकि ऐसा नहीं है. भड़ास ब्लाग की स्थापना कर और बाद में भड़ास4मीडिया को अस्तित्व में लाकर इसके संस्थापक व संपादक यशवंत सिंह ने इस शब्द को ब्रांड में तब्दील कर दिया है. यशवंत ने पहले भी व अब भी, बार-बार कहा है कि जो चाहे, इस शब्द का इस्तेमाल कर अखबार, पोर्टल, मैग्जीन, ब्लाग लांच कर सकता है, इस शब्द पर किसी का कोई ब्रांड अधिकार या कापीराइट नहीं है क्योंकि यह शब्द, यह ब्रांड बिजनेस बढ़ाने के मकसद से इजाद नहीं किया गया. इसका जन्म ही जमी-जमाई सत्ताओं को चुनौती देने के लिए हुआ है और जो भी अपने को किसी सिस्टम से ऊबा, पीड़ित या परेशान पाता है, वह भड़ास किसी भी रूप में निकाल सकता है.


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