करमवीर और बृजलाल के खिलाफ कार्रवाई हो

E-mail Print PDF

डा. नूतन : दिव्‍या एवं शीलू मामले में आईआरडीएस ने की मांग : कानपुर में 27 सितम्बर 2010 को दिव्या के साथ हुए दुराचार और उसकी हत्‍या तथा 12 दिसंबर 2010 को बांदा में शीलू के साथ हुए संभावित गैंग-रेप के मामले में स्वयंसेवी संगठन इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च एंड डोक्युमेंटेशन इन सोशल साइंसेज (आईआरडीएस) का मत है कि इस मामले में वास्तविक न्याय नहीं हुआ है. अब इन दोनों मामलों में यह साबित हो चुका है कि स्थानीय पुलिस ने निर्लज्ज तरीके से असल अपराधियों की पूरी तरह मदद की.

हमारा मानना है कि इस मामले में दोषी पुलिस कर्मियों के विरुद्ध अब तक न्यायोचित कार्रवाई नहीं हुई है और हम इन सभी दोषी कर्मियों के विरुद्ध कठोरतम कार्यवाही की मांग करते हैं. उससे बढ़ कर हमारा यह मानना है कि इन दोनों मामलों में असल आपराधिक भूमिका उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक करमवीर सिंह और अपर पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था तथा अपराध) बृज लाल की है. ये प्रदेश के सर्वोच्च पुलिस अधिकारी हैं और इनका सीधा दायित्व था कि ये इन मामलों में न्यायोचित कार्यवाही करते.

लेकिन इन दोनों मामलों में मामले की तुरंत जानकारी हो जाने के बावजूद इन लोगों ने कोई कार्यवाही नहीं की बल्कि स्थानीय पुलिस को विधि-विरुद्ध कार्य करने का पूरा अवसर दिया और संभवतः इस हेतु निर्देश भी दिए. इस प्रकार ये दोनों अधिकारी अपने शासकीय कर्तव्य से जान-बूझ के विलग होने, अवैध कार्य को संरक्षण देने और विधि की रक्षा नियमानुसार नहीं करने के सीधे-सीधे दोषी हैं. इन दोनों मामलों में कार्यवाही अंत में राज्य सरकार के स्तर से करनी पड़ी और करमवीर सिंह और बृज लाल ने अपनी सोची-समझी सक्रियता और निष्क्रियता के जरिये गलत साक्ष्य बनाने, एफआईआर दर्ज नहीं होने और असल अपराधियों को बचाने का कार्य किया.

आईआरडीएस “शीलू और दिव्या के लिए न्याय” नाम से एक अभियान शुरू किया है जो इन दोनों मामलों में अंतिम न्याय के मिलने तक जारी रहेगा. साथ ही डीजीपी और एडीजी (ला ऑर्डर तथा अपराध) के रूप में अपने कर्तव्यों के प्रति जान-बूझ कर लापरवाही करने के लिए हम इन दोनों अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्यवाही की मांग करते हैं. इस हेतु हमने गृह मंत्री, भारत सरकार और मुख्य मंत्री, उत्तर प्रदेश को पत्र लिख कर उनसे इन दोनों अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करने का निवेदन किया है. साथ ही इस प्रकरण को सीबीआई को दिए जाने हेतु भी पत्राचार किया है.

हम इस मामले में न्याय पाने में मदद हासिल करने के लिए उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका भी दायर करेंगे जिसमें इन दोनों अधिकारियों के विरुद्ध उनके जान-बूझ कर कर्तव्यहीनता करने और संभवतः अधीनस्थों को गलत निर्देश देने से सम्बन्ध में उचित धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर उसकी नियमानुसार विवेचना करने का निवेदन करेंगे. साथ ही प्रदेश के सर्वोच्च पुलिस अधिकारियों की संलिप्तता होने के नाते हम इन सभी मुकदमों की विवेचना सीबीआई से कराने की मांग भी करेंगे.

Action to be taken against Karmveer and Brijlal

In the cases related with rape and subsequent death of Divya from Kanpur city on 27th September, 2010 and possible gang-rape of Sheelu on 12th December, 2010 Institute for Research and Documentation and Social Sciences (IRDS), a non-government organization is of the strong view that the real justice is still far away. In both cases, it has now been proved that the local police was completely hands in gloves with the accused and has aided and assisted these accused in the most shameless manner. IRDS states that no suitable action has so far been taken against the accused Police officers and demands suitable action to be taken immediately.

IRDS also feels that in these cases, the real accused are Karamvir Singh, the Director General of Police and Brij Lal, the Additional DG (Law/Order and Crime). They are the top ranking officers of the State, responsible for proper functioning of the State Police. But in both these cases, they have not only failed in performing their duty, but possibly have also actively aided and assisted in the crime committed by the local Police, where it shielded the real culprits and acted against innocent people. In both the cases, these two officers got to know of the incidence and its details almost immediately. They not only kept quite (omission of their duty) but quite probably also actively acted by instructing the local officers to perform illegal acts.

In both cases, action was initiated finally at the level of the State government while these two officers just kept waiting and watching the crimes of wrongful framing of evidence, non-registration of FIR and non-action against the real accused being committed.

IRDS has initiated a campaign called “Justice for Sheelu and Divya” which shall remain there till the time final justice is delivered in both these cases. Since justice was delayed and denied in these cases because of the intentional omission of their described duty by the DGP and ADG(Law/order and crime), we demand immediate action against Karamvir Singh and Bril Lal for dereliction of their duty. We are presenting our complaint to the Home Minister, Government of India and the Chief Minister, Uttar Pradesh to take suitable action against these delinquent officers. We are also corresponding with the concerned authorities to get these cases transferred to CBI.

At the same time, we shall be filing a PIL for getting suitable criminal cases registered against these two officers for possibly directing the subordinate police officers for the criminal conduct they got engaged in or at least being passive observer of the crime being committed when it was their duty to intervene and act. We shall also be requesting the High Court to get these cases transferred to CBI, because of the involvement of the top Police officers of the State.

डा. नूतन ठाकुर

सचिव, आईआरडीएस

लखनऊ


AddThis