यूपी पुलिस ने की अरविंद केजरीवाल से मारपीट

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अरविंद : सूचना आयुक्‍तों ने देश को 86 करोड़ का नुकसान पहुंचाया : नोएडा में रजिस्‍ट्रार आफिस के सामने धरना-प्रदर्शन कर रहे अरविंद केजरीवाल और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ पुलिस ने धक्‍का-मुक्‍की तथा हाथापाई की. यह धरना चूसना बंद संस्‍था की ओर से रजिस्‍ट्रार कार्यालय में व्‍याप्‍त भ्रष्‍टाचार के विरोध में दिया जा रहा था. पुलिस ने अरविंद केजरीवाल सहित कुछ कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट भी की.

चूसना बंद नामक संगठन एक एयरफोर्स के पूर्व अधिकारी वीएस बख्‍शी और उसके बेटे गौरव बख्‍शी ने मिलकर बनाया है. ये रजिस्‍ट्रार कार्यालय में व्‍याप्‍त भ्रष्‍टाचार के शिकार हो चुके हैं. इन लोगों ने इसके पूर्व जब यहां व्‍याप्‍त भ्रष्‍टाचार की वीडियो रिकार्डिंग करनी चाही थी, तो इनका कैमरा तोड़ दिया गया था. इसके बाद इन्‍होंने चूसना बंद नामक संस्‍था बनाई थी. आज जब इस संस्‍था के बैनर तले अरविंद केजरीवाल सहित तमाम सामाजिक कार्यकर्ता शांतिपूर्ण तरीके से धरना दे रहे थे तो पुलिस ने इन लोगों के साथ बदतमीजी की.

अरविंद केजरीवाल एक सामाजिक कार्यकर्ता होने के साथ आरटीआई एक्टिविस्‍ट भी हैं. इनकी संस्‍था पब्लिक कॉज रिसर्च फाउंडेशन (पीसीआरएफ) ने अपने ए‍क विश्‍लेषण में पाया कि सूचना देने में देरी करने वाले लोक सूचना अधिकारी (पीआईओ) पर जुर्माना न लगाकर सूचना आयुक्‍तों ने देश को वित्‍तीय वर्ष 2009-10 में 86 करोड़ रूपये का नुकसान पहुंचाया है. संस्‍था कुल 27 राज्‍यों के 87 सूचना आयुक्‍तों के 76813 आदेशों का विश्‍लेषण करने के बाद इस नतीजे पर पहुंची.

संस्‍था के संस्‍थापक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि नुकसान का यह आकलन केवल सूचना देने में देरी होने के मामले में है, अगर आरटीआई के 7 अन्‍य प्रावधानों के तहत जुर्माना राशि का आकलन किया जा तो यह राशि कहीं और ज्‍यादा होगी. उन्‍होंने कहा कि जुर्माना ना लगाए जाने पर सूचना अधिकारियों में यह संदेश जाता है कि सूचना न देने से कुछ नहीं होता है, इसलिए वे लापरवाही बरतते हैं. उन्‍होंने कहा कि संस्‍था ने पाया कि 26 सूचना आयुक्‍तों ने एक भी मामले में जुर्माना नहीं लगाया. मणिपुर के सूचना आयुक्‍त आरके अंगुसाना सिंह टॉप पर रहे, जिन्‍होंने लगभग 33 प्रतिशत मामलों में पेनाल्‍टी लगाई.


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