सुशासन बाबू के शासन में डीएसपी की गुंडागर्दी

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मदन कुमार तिवारीबिहार के मुज़फ़्फ़रपुर जिले में वहां के नगर डीएसपी एसएस ठाकुर ने लाश के साथ प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों के परिजनों की जिला समाहरणालय यानी कलेक्‍टर के आदेश पर उनके कार्यालय के सामने न सिर्फ़ बुरी तरह पिटाई की बल्कि जबरदस्‍ती लाश को जलाने के लिये दबाव भी डाला। घटना 23 जनवरी की है।

एक महिला की प्राईवेट नर्सिंग होम में डाक्टर की लापरवाही के कारण ईलाज के दौरान मौत हो गई। महिला के परिजन लाश के साथ आज 24 जनवरी को जिलाधिकारी के कार्यालय के समक्ष डाक्टर की लापरवाही की जांच की मांग करते हुये प्रदर्शन कर रहे थे। जिलाधिकारी ने प्रदर्शन कर रहे परिजनों से मुलाकात कर उनकी बात सुनने की बजाय पुलिस को बुलाकर उन्‍हें हटाने का निर्देश दिया। किसी पुलिस अधिकारी को कलक्टर कहे और वह न माने। डीएसपी एसएस ठाकुर ने स्वयं परिजनों को मारना शुरु कर दिया। पुलिस वालों ने लाश के साथ भी बदसलूकी की और डंडे से महिला की लाश को ठेलना शुरु किया। बाद में यह देखकर की पत्रकार फ़ोटो ले रहा है, डैमेज कंट्रोल करने हेतु एंबुलेंस बुलाकर लाश को उसके गांव भेजवाने की व्यवस्था की।

सबसे दुखद रहा राज्य मानव आयोग के सदस्‍य झा का बयान। उन्होंने पत्रकारों के पूछने पर कहा कि जब तक कोई डाक्‍यूमेंटस उनके समक्ष नही आयेगा, आयोग कोई कारवाई नहीं कर सकता। प्रश्न यह है कि सुशासन का दावा करनेवाले नीतीश के शासन में हर जगह अधिकारियों की गुंडागर्दी और भ्रष्‍टाचार नजर आ रहा है। पुलिस की यह हरकत एक प्रश्न भी छोड़ रही है जिसका उतर हमें और आपको देना है। अगर मृत महिला का कोई परिजन बदले की आग में नक्सलवाद की राह पकड़ ले और ठोंक दे गोली डीएसपी के सीने में तो क्या कहेंगे आप। नीतीश और लालू के शासन में मात्र एक ही फ़र्क है। लालू के राज्य में उनके दल के गुंडे लोगों से गुंडागर्दी करते थे और लूटपाट मचाते थे, नीतीश के शासन में यह काम प्रशासन कर रहा है। रुपम पाठक, नवलेश पाठक और अब यह घटना। इस घटना की लाइव रिकार्डिंग आप नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके देख सकते हैं.

http://mediamusic.bhadas4media.com/home/viewvideo/233/--news-incident-event/--.html

लेखक मदन कुमार तिवारी बिहार के गया जिले के निवासी हैं. पेशे से अधिवक्ता हैं. 1997 से वे वकालत कर रहे हैं. अखबारों में लिखते रहते हैं. ब्लागिंग का शौक है. अपने आसपास के परिवेश पर संवेदनशील और सतर्क निगाह रखने वाले मदन अक्सर मीडिया और समाज से जुड़े घटनाओं-विषयों पर बेबाक टिप्पणी करते रहते हैं.


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